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बैतूल जिले में – खेती में नवाचार से तस्वीर बदलेगी

श्री दीपक कपूर

भा. किसान संघ के संरक्षक श्री दीपक कपूर बताते हैं कि कलेक्टर महोदय के कृषि में किए जा रहे नवाचारों से बैतूल जिले में खेती और किसानी उत्तरोत्तर प्रगति पर है। इसके साथ ही श्री कपूर का मानना है कि कृषि विभाग और उद्यानिकी विभाग अनुदान (डीबीटी) पोर्टल एक ही रखा जाए साथ ही आईटीडीपी की आत्मा परियोजना के अंतर्गत आदिवासियों, किसानों के बैंक खातों में ही राशि का ट्रांसफर डीबीटी प्रक्रिया द्वारा हो, जिला प्रशासन छोटे किसानों को शासकीय, अशासकीय, वित्तीय संस्थानों से ऋण दिलाने में सहयोग करेंगे।

जैविक खाद पर सब्सिडी मिले
जैविक खाद पर भी सोसायटी इत्यादि से सब्सिडी मिले, जैविक खाद की लायसेंस प्रणाली जिले में ही हो व उसे सरल करें। गौशालाओं की स्थिति में सुधार आएगा, वे स्वावलम्बी बनेंगी।

केसीसी दलालों पर शिकंजा कसें
किसान क्रेडिट कार्ड ऋण में आरबीआई के नियमों के मुताबिक नियमित खातेदार हैं तो उससे ऋण की राशि न भरकर केवल ब्याज भराकर 10 प्रतिशत लिमिट राशि बढ़ाकर ऋण दिए जाने का प्रावधान है। ऐसा कुछ बैंक कर भी रहे हैं। अधिकांश बैंकों में दलालों का कब्जा है व ऋण पलटी के नाम पर यही दलालों से 1-2 दिवस हेतु किसानों को महंगी ब्याज दर पर पैसे लेने पड़ते हैं। श्री कपूर ने सुझाव दिए हैं कि प्रत्येक जिले में केसीसी दलाल, एजेंट को चिन्हित कर लिस्टेड करें, पुलिस उनको आर्थिक अपराधी निगरानी सूची में डालें ताकि किसान कर्ज के जाल से निकल सके व उनकी आत्महत्या पर विराम लग सके। बैंक प्रबंधन कृषि ऋण में एजेंटों को शामिल न करें।

बैतूल जिले में किसानों को अनेक समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। अमानक खाद, बीज, केसीसी एजेंटों का मकडज़ाल, सब्सिडी का टाईम पर नहीं मिलना आदि दिक्कतों से जूझते बैतूल के किसानों के लिए कलेक्टर श्री शशांक मिश्र उम्मीद की एक किरण बनकर उभरे हैं। व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए वे प्रत्येक सोमवार कृषि एवं संबद्ध विभागों की नियमित समीक्षा करते हैं। इस बैठक में अधिकारी स्वयं सेवी संस्थाएं, किसान गौशाला प्रतिनिधि और भारतीय किसान संघ भी उपस्थित रहता है। नियमित बैठकों से और योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन से किसानों में संतोष है।

भूमि डायवर्सन की बाध्यता न हो
मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार में सभी वर्गों को जो ऋण व अनुदान दिया जाता है, उसमें बैंक से ऋण लेकर योजना का लाभ लिए जाने की जो बाध्यता है उसे रद्द किया जाये। कृषि, उद्यानिकी विभाग में बैंक की बाध्यता नहीं है, उक्त योजनाओं में तेजी से प्रगति हेतु बैंकों की बाध्यता समाप्त करें, कृषक परिवार अपनी कृषि भूमि पर, हाईवे किनारे कोई उद्योग, व्यापार करना चाहे तो उसका भूमि के डायवर्सन की बाध्यता नहीं होनी चाहिए।

अमानक आदान पर मुआवजा मिले
प्रदेश में खाद, बीज, दवा निजी/ शासकीय विक्रेताओं से कृषि विभाग नमूने एकत्रित कर लैब टेस्टिंग कराते हैं, नमूने फेल हो जाने पर किसानों को इसकी जानकारी न दी जाती, न ही उसे अमानक खाद, बीज, दवा से बर्बाद हुई फसलों का कोई मुआवजा भी नहीं दिया जाता है। अत: नमूने फेल हो जाने पर पारदर्शिता के साथ कृषक को उसके नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करेंगे। अत: किसानों को फसल नुकसान की राशि कंपनियों से दिलाई जाए।

ऊर्जा निगम की मनमानी बंद हो
कृषि सिंचाई पंप हेतु अनुदान पर दिए जाने वाले सोलर पम्पसेट के चयन में ऊर्जा विकास निगम द्वारा निर्धारित कंपनियों से ही क्रय करने की बाध्यता समाप्त हो। खुले बाजार से मानक स्टार के सोलर पंप किसान स्वयं क्रय करें, बिल व आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर स्वयं के बैंक खाते में डीबीटी अनुदान प्राप्त करें। ऊर्जा विकास निगम की मनमानी बंद हो। निगम से जो सोलर पम्प सेट दिए जाते हैं, वे घटिया, महंगे होकर उनकी सर्विस पाटर््स इत्यादि की उपलब्धता नहीं रहती।

तेलांगना राज्य की ही भांति सभी प्रकार के अनुदान न देते हुए छोटे कृषकों को एक निश्चित राशि प्रति हेक्टेयर उनके बैंक खातों में प्रतिवर्ष जमा करवा सकते हैं एवं तेलांगना राज्य में रेत सभी के लिए फ्री है, ऐसा ही अपने प्रदेश में भी करवाएं ताकि सभी प्रकार के विवाद समाप्त होकर सभी को राहत मिलेगी, किसानों को सुविधा होगी।

खरीदी समितियों में भी हो
भावान्तर सहित सभी अनाजों की समर्थन मूल्यों पर खरीदी में मंडी की बाध्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करायें तथा सभी प्रकार की कृषि फसलों अनाज की खरीदी, गेहूं खरीदी की भांति को-ऑपरेटिव सोसाइटी लेवल पर ही हो। हमारे जिले में छोटे तबके के किसान 80 से 100 कि.मी. दूर मंडी में अनाज लाने में असमर्थ होते हैं, वे व्यवस्था के खिलाफ हो जाते हैं। बैतूल जैसे अन्य बड़े जिलों में भौगोलिक परिस्थितियां अलग होती हैं, छोटे जिलों में मंडी व्यवस्था सफल हो सकती है।

बासमती को मान्यता मिले
बासमती चावल की मान्यता केन्द्र सरकार से न मिलने से किसानों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

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