किसानों को फसल की उचित कीमत दिलाने की पहल

केन्द्र ने अपनाई म.प्र. की भावांतर योजना

किसानों को फसल की उचित कीमत दिलाने की पहल

प्रधानमंत्री आशा योजना को मिली मंजूरी

नई दिल्ली। म.प्र. सरकार की भावान्तर भुगतान योजना की तर्ज पर केन्द्र सरकार ने गतदिनों किसानों से समर्थन मूल्य पर फसल खरीदी की नई योजना प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम आशा) को मंजूरी दे दी। इसके लिए सरकार ने 15053 करोड़ रुपए का प्रबंध किया है। इस वर्ष 6250 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसमें राज्यों को यह छूट रहेगी कि वे किसानों को बाजार में फसल बेचने के बाद समर्थन मूल्य में अंतर की राशि भावांतर के अनुभव दे सकेंगे या निजी एजेंसी के जरिये खरीदी करा सकेंगे। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया। उल्लेखनीय है कि म.प्र. में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में गत खरीफ 2017 में भावांतर भुगतान योजना लागू की गई।

इस नई योजना के तहत तिलहन किसानों पर विशेष ध्यान दिया गया है। यदि मूल्य एमएसपी के नीचे आते हैं तो निजी संस्थाएं खरीदी करेगी परन्तु राज्य सरकार की अनुमति से।

इस नई योजना के तहत राज्य सरकारों को कृषक हित में तीन योजनाओं का विकल्प दिया गया है। तिलहन किसानों के हित में म.प्र. की भावांतर योजना के समान मूल्य न्यूनता भुगतान योजना (पीडीपीएस) तैयार की गई है। यह राज्य में तिलहन उत्पादन के 25 फीसदी तक लागू किया जाएगा। इसमें एमएसपी और बाजार में तिलहनों की मासिक औसत कीमत के बीच के अंतर का भुगतान सरकार करेगी।

राज्यों के पास मूल्य समर्थन योजना (पीेएसएस) चुनने का विकल्प भी होगा जब कीमतें एमएसपी के नीचे आएंगी तो केन्द्रीय एजेंसियां खरीदी करती है।

पीएम-आशा’ के घटक

नई समग्र योजना में किसानों के लिए उचित मूल्य की व्यवस्था शामिल है –

  • मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस)
  • मूल्य न्यूनता भुगतान योजना (पीडीपीएस)
  • निजी खरीद एवं स्टॉकिस्ट पायलट योजना (पीपीपीएस)
खर्च : कैबिनेट ने १६,५५० करोड़ रुपये की अतिरिक्त सरकारी गारंटी देने का फैसला किया है जिससे यह कुल मिलाकर ४५,५५० करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई है।
इसके अलावा खरीदी के लिए बजट भी बढ़ा दिया गया है और पीएम-आशा के लिए १५,०५३ करोड़ रुपये मंजूर किये गये हैं।

धान, गेहूं एवं पोषक अनाजों/मोटे अनाजों की खरीद के लिए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) की अन्य मौजूदा योजनाओं के साथ-साथ कपास एवं जूट की खरीद के लिए कपड़ा मंत्रालय की अन्य वर्तमान योजनाएं भी जारी रहेंगी, ताकि किसानों को इन फसलों की एमएसपी सुनिश्चित की जा सके।

कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया है कि खरीद में निजी क्षेत्र की भागीदारी भी प्रायोगिक तौर पर सुनिश्चित करने की जरूरत है, ताकि इस दौरान मिलने वाली जानकारियों के आधार पर खरीद में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई जा सके। यह पीडीपीएस के अतिरिक्त है।

तिलहन के मामले में यह निर्णय लिया गया है कि राज्यों के पास यह विकल्प रहेगा कि वे चुनिंदा जिले की एपीएमसी में प्रायोगिक आधार पर निजी खरीद स्टॉकिस्ट योजना (पीपीएसएस) शुरू कर सकते हैं जिसमें निजी स्टॉकिस्टों की भागीदारी होगी। प्रायोगिक आधार पर चयनित जिले की चयनित एपीएमसी तिलहन की ऐसी एक अथवा उससे अधिक फसल को कवर करेगी जिसके लिए एमएसपी को अधिसूचित किया जा चुका है।

जब भी बाजार में कीमतें एमएसपी से नीचे आ जाएंगी तो चयनित निजी एजेंसी पीपीएसएस से जुड़े दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए पंजीकृत किसानों से अधिसूचित अवधि के दौरान अधिसूचित बाजारों में एमएसपी पर जिन्स की खरीदारी करेगी।

केन्द्र सरकार ने म.प्र. की भावांतर भुगतान योजना को स्वीकार करते हुए पीएम आशा योजना लागू की है। यह जानकारी देते हुए म.प्र. के प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि प्रदेश में भावान्तर भुगतान योजना के तहत खरीफ 2017-18 में चयनित आठ फसलों के लिए भावान्तर भुगतान योजना लागू की गई थी जिसके तहत 12 लाख 80 हजार किसानों को लगभग 2000 करोड़ का भुगतान किया गया है।

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