सोयाबीन निर्यात पर प्रोत्साहन राशि बढ़ाने से म.प्र. के किसानों को मिलेगा लाभ

(विशेष प्रतिनिधि)
नईदिल्ली/ भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के सुझाव को मोदी सरकार ने मान लिया है। सीएम ने गतदिनों नई दिल्ली में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात कर सोयाबीन को चीन को निर्यात करने के लिए कदम उठाने की मांग की थी। श्री शिवराज ने अमेरिका से आयातित सोयाबीन पर चीन द्वारा आयात शुल्क 25 फीसदी किये जाने का हवाला देते हुए कहा कि चीन में सोयाबीन की पूर्ति नहीं हो पा रही है। भारत को इसका फायदा मिल सकता है। इसके बाद केन्द्र सरकार ने सोयाबीन के निर्यात पर दी जाने वाली 7 प्रतिशत की प्रोत्साहन राशि को 3 फीसदी बढ़ा दिया है। यानि सोयाबीन के निर्यात पर सीधे 10 फीसदी प्रोत्साहन राशि मिलेगी।

श्री चौहान ने प्रधानमंत्री को बताया कि चीन में सोयाबीन की मांग 11 करोड़ 50 लाख मी. टन है जबकि चीन में सोयाबीन का उत्पादन केवल एक करोड़ 50 लाख मी. टन है। इस स्थिति को देखते हुए लगभग 10 करोड़ मी. टन चीन सोयाबीन आयात कर रहा है। इसमें से पचास प्रतिशत से अधिक सोयाबीन उत्तरी अमेरिका से आयात होता है।

नाफेड से मांगा भुगतान
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर बताया कि प्रदेश में चना, मूंग और सरसों का बम्पर उत्पादन होने के कारण राज्य सरकार ने इसको किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद लिया है। राज्य सरकार ने इस पर होने वाले खर्चे का भुगतान अपने स्वयं के संसाधनों से किया है।
राज्य सरकार को नाफेड ने अभी तक इसका भुगतान नहीं किया है। श्री चौहान ने नाफेड से शीघ्र भुगतान करवाने का आग्रह किया।

यह राहत 31 मार्च 2019 तक के लिए दी गई है। म.प्र. कृषि विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा का कहना है कि इस आदेश का लाभ किसानों को भी मिलेगा। सोयाबीन की अच्छी कीमत मिल सकेगी। नई व्यवस्था में निर्यातक व्यापारियों को जितनी प्रोत्साहन राशि अधिक मिलेगी, वे उतना ही सस्ता सोयाबीन चीन को बेच सकेंगे। इसका मुनाफा किसानों को भी कीमत में बढ़ोत्तरी से मिल सकता है। वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मूल्य 450 अमरीकी डॉलर प्रति टन है, 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि होने पर व्यापारी को औसत 14 यूएस डॉलर प्रति टन का फायदा होगा।

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