विदेशी खेती के अध्ययन से तकनीकी ज्ञान में वृद्धि

मुख्यमंत्री किसान विदेश अध्ययन यात्रा

इस वर्ष मई माह में आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैण्ड के संयुक्त विदेश अध्ययन भ्रमण में मार्गदर्शक के रूप में मेरा चयन, मेरे लिये अत्यंत प्रसन्नता का विषय था। क्योंकि मेरी रूचि विदेशों में खेती के तरीकों को समझने तथा वहां की सभ्यता से परिचित होने में हमेशा ही रही है।
12 मई 2018 को भोपाल के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरते हुए हमारे पूरे दल का मन थोड़े-थोड़े डर के साथ उत्साह और रौमांच से भरा हुआ था। हमारे दल का नेतृत्व विभाग के मुखिया संचालक कृषि आदरणीय श्री मोहन लाल कर रहे थे। कृषि वैज्ञानिक डॉ. अनिता बब्बर भी हमारी तकनीकी मार्गदर्शक के रूप में साथ थीं। इस दल में सभी वर्ग के किसान थे। ये लघु-सीमान्त कृषक भी थे, बड़ी भूमि वाले भी। इनमें अल्प शिक्षित भी थे और उच्च शिक्षित भी। महिलाएं भी थीं और बुजुर्ग भी थे। यानि एक प्रकार से प्रदेश के विभिन्न अंचल के 20 गांवों का छोटा सा परगना था यह। थोड़ी बहुत हिचक के बाद ही यह एक परिवार में बदल गया और स्नेह-आदर के सूत्रों ने सभी को परस्पर ऐसे रिश्तों से जोड़ लिया, जो स्वदेश लौट आने के बाद भी कायम है। भोपाल से दिल्ली की ओर बढ़ते हुए ही बादलों से होड़ लगाने का अनुभव हो गया था तो मन में छिपी हिचक दूर होने लगी थी।

किसानों के हित में निरन्तर प्रयत्नशील राज्य सरकार ने कई अभिनव प्रयोग किए हैं। इनमें से ही एक है मुख्यमंत्री किसान विदेश अध्ययन यात्रा। विगत तीन वर्ष से इस योजना के तहत म.प्र. के प्रगतिशील किसानों को विकसित देशों की उन्नत कृषि प्रणाली के अवलोकन के लिये ले जाया जाता है। यहां प्रत्यक्ष रूप से आधुनिक तकनीकी का अध्ययन कर वे अपने खेतों में तो नये प्रयोग करते ही हैं किन्तु उनके अनुभवों से दूसरे किसान भी लाभान्वित होते हैं। इस दिशा में यह योजना अत्यंत अनूठी और कारगर सिद्ध हुई है। 20-20 किसानों और कृषि विशेषज्ञों, कृषि अधिकारियों तथा वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में अब तक किसानों ने कई देशों की यात्रा की है।

ऑस्ट्रेलिया पहुंचे
दिल्ली से रात के अंधियारे में सिंगापुर और फिर 15 मई को आस्ट्रेलिया के ब्रिस्ब्रेन पहुॅच कर हमारी वास्तविक अध्ययन यात्रा का प्रारम्भ हुआ। टूर प्लान इस तरह तय किया गया था कि किसानों को विविधतापूर्ण कृषि देखने का अवसर मिले। किसानों की आय दोगुनी करने के परिप्रेक्ष्य में यह आवश्यक भी है कि आप समग्र कृषि को अपनाएं तथा खेती के साथ एक दो सह कृषि पद्धतियां अतिरिक्त रूप से समावेशित करें। ब्रिस्ब्रेन में स्ट्राबेरी की मन ललचा देने वाली खेती को जानने के लिये हमारे किसान खूब उत्सुक थे। क्वीन्स लेण्ड के सनरे स्ट्राबेरी फार्म के फायनेन्स हेड श्री रोह्डनी और उनके सहयोगी ने हमें सीडलिंग से लेकर कटाई तक पूरी जानकारी उपलब्ध कराई। स्ट्राबेरी का यह फार्म 80 हैक्टेयर रकबे का था। हमारे यहां तो इतने बड़े क्षेत्र में किसी उद्यानिकी फसल मुश्किल से ही देखने को मिलेगी। ड्रिप सिंचाई, फ्यूमीगेशन के द्वारा कीट व रोग नियंत्रण तथा प्लास्टिक मल्चिंग करने की तकनीकें हमारे किसानों की जिज्ञासों के केन्द्र में थीं। इतने बड़े खेत में स्ट्राबेरी चुनने का काम सहज नहीं होता। इसके लिये बैटरी चलित ट्रालियों का प्रयोग किया जाता है। दोपहर 12 से पूर्व तुड़ाई, तुड़ाई के बाद 3 डिग्री सै. तक फलों को ठंडा करना, क्वालिटी का परीक्षण, ग्रेडिंग, पैकिंग और प्रशीतक वातावरण में ही उनका परिवहन कर बाजारों तक ले जाना बहुत सिस्टमेटिक तरीके से किया जाता है। इस सबके लिये प्रक्षेत्र पर ज्यादातर सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। स्ट्राबेरी फार्म के बाद हमारी अध्ययन यात्रा का अगला पड़ाव था गन्ना प्रक्षेत्र। यह 106 हैक्टेयर का फार्म था। यह फार्म समुद्र के निकट एक बंजर जमीन पर विकसित किया गया था जिसे जैविक पदार्थों से उपजाऊ बना लिया गया था। यहां भू जल स्तर इतना अधिक था कि खेतों से पानी निकालने के लिये पंप का प्रयोग करना पड़ता था।


मेलबोर्न
17 मई की सुबह मेलबोर्न के विक्टोरिया मार्केट में पहुॅचा हमारा दल, फल और सब्जियों की पैकिंग, सफाई और ग्रेडिंग के साथ आकर्षक रूप से सजा कर विक्रय हेतु रखते हुए देख रहा था। व्यवस्थित तथा साफसुथरी दुकानें, प्रशीतन प्रणाली और कैटेग्राइज्ड मार्केट में हमारे देशी बाजारों सी चिल्लपौं तथा आपा-धापी नहीं था। विभिन्न रंग के फल और सब्जियों को ऐसे सजाया गया था जैसे ड्रांइग रूम की सजावट की जाती है। यह बाजार दक्षिण आस्ट्रेलिया का सबसे उन्नत मुक्ताकाश सब्जी व फल बाजार है।
समुद्री पानी की रिसायकलिंग
इसी दोपहर हम साउथ मैलबोर्न के एक उद्यानिकी प्रक्षेत्र पर जा पहुॅचे। पत्तागोभी, फूल गोभी, ब्रोकली, मिर्च और कई अन्य हरी सब्जियों का 17 एकड़ में फैला खेत था यह। लाल रंग की क्षारीय मिट्टी होते हुए भी इससे भरपूर उपज ली जाती है। पॉली हाउस से आच्छादित विशाल नर्सरी के अलावा यहां की विशेषता थी, समुद्र के पानी का रिसायकल करके उपयोग। समुदी खारेपन से लड़कर धरा को वनस्पति आच्छादित करने का कमाल यहां के वैज्ञानिकों की देन है। यह प्रक्षेत्र आस्ट्रेलिया का आदर्श कृषि प्रक्षेत्र भी हैै। यहां स्थानीय कृषि महाविद्यालय द्वारा उद्यानिकी संबंधी प्रशिक्षण भी दिये जाते हैं।
रोबोट चलाते डेयरी
यात्रा का एक और महत्वपूर्ण चरण था रोबोटिक डेयरी। मेलबोर्न से जीलोंग के रास्ते पर अत्याधुनिक तकनीकी से विकसित 290 एकड़ का यह विशाल फार्म था जहां आस्ट्रेलिया की सुप्रसिद्ध होलेस्टीन फ्रीजर दुधारू गाय की नस्ल की 240 गाय और 70 बछड़े, व्यवस्थित ढंग से रखे गये थे। प्रति गाय, औसत 25 लीटर दूध निकालना कोई आसान काम तो हो नहीं सकता। इसके लिये पूरी तरह यंत्रीकृत प्रणाली है जो पशुओं को साफ-सुथरा करने, अयन साफ करने, दोहने और दूध संकलित कर छानने, मात्रा की गणना करने तथा विपणन के लिये भेजने की तैयारी करने तक जारी रहता है। चराई के लिये चारा प्रक्षेत्र पर ही होता है। इसे इस तरह वर्गीकृत किया जाता है कि हर मैदान में गायों को सप्ताह में एक दिन चराई करने को मिले।
गेहूं में हम आगे
होरशेम में 19 मई की सुबह 1880 हैक्टेयर में विस्तृत एक गेहूं प्रक्षेत्र को देखते हुए हम अपने गेहूं उत्पादन से यहां की तुलना कर रहे थे। हमें प्रसन्नता थी कि कम से कम गेहूं उत्पादन में हमारा प्रदेश पूरे भारत में दूसरे क्रम पर तो पहुंच ही गया है, यहां के गेहूं उत्पादन में भी हम इनसे आगे हैं। यहां कल्टीवेटर की एक दिन में 10 हैक्टेयर की क्षमता जरूर प्रभावित करने वाली थी।
न्यूजीलैंड का सफर
20 मई को हम न्यूजीलैंड के लिये रवाना होकर ऑकलैंड पहुॅच गये थे। 21 मई को यहां हैमिल्टन के डेरी फॉर्म का भ्रमण कार्यक्रम था। 80 हैक्टर का सुसज्जित फार्म, 300 दुधारू गाय, 80 बुजुर्ग गायों के साथ वहां थीं।
आस्ट्रेलिया की तरह न्यूजीलैण्ड में भी डेयरी उद्योगों का आधुनिकीकरण उसी प्रकार किया गया है। हैमिल्टन में पशुपालन ही मुख्य व्यवसाय है। 23 मई को यात्रा के अंतिम पड़ाव पर लाइम स्टोन से बनी गुफाओं में नाव से घूमते हुए कहीं हवाओं का गर्मागरम स्वागत हमें मिला। अंतत: कुछ नई सीख, नये अनुभव, नई रोशनी सकोर कर हम अपनी दुनियां में वापस लौट पड़े जहां हमारे परिवार बेसब्री से हमारी प्रतीक्षा कर रहे थे।

 

प्रस्तुति : डॉ. अनंता दीवान
सहायक संचालक, संचालनालय कृषि, भोपाल
मो. : 9424914690

www.krishakjagat.org

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