जीरो टिलेज तकनीक द्वारा गेहूं उत्पादन बढ़ायें

www.krishakjagat.org

बीज उचित दूरी पर तथा समान रूप से बुवाई की जा सकती है। इस विधि से बीज तथा खाद एक साथ बोये जा सकते हैं । वैज्ञानिक तौर पर यह पूरी तरह सिद्ध हो चुका है कि बाजरा, गेहूं, कपास-गेहूं तथा धान-गेहूं, सोयाबीन-गेंहू फसलचक्र वाले क्षेत्रों में यह मशीन पूरी तरह उपयोगी पाई जाती है। यह तकनीक हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तरप्रदेश राज्यों में किसान भी अत्यधिक अपना रहे हैं तथा गेहूं की बुवाई कम लागत में करके अधिक पैदावार प्राप्त कर रहे हैं।
जीरो टिलेज क्यों और कैसे: अनुसंधान से यह पाया गया है कि अगर गेहूं की बुवाई 25 नवंबर के बाद करते हैं तो प्रतिदिन 25-30 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर उपज में कमी आती है। इसके साथ-साथ खेत को तैयार करने के लिए होने वाले खर्च को भी बचाया जा सकता है। अत: मशीन द्वारा समय पर बुवाई करके पैदावार में होने वाले नुकसान को बचाया जा सकता है। बाजरा, कपास तथा धान की फसलों में अगर हो सके तो कटाई से कुछ दिन पहले या कटाई के बाद सिंचाई कर दी जाती है। फसल कटाई होते ही बची हुई नमी में तुरंत इस मशीन द्वारा सीधे तौर पर गेहूं की बुवाई कर दी जाती है। इस प्रकार खेत तैयारी में जो समय लगता है उसे सुचारु रूप से दूसरे खेती कार्यों में उपयोग किसान भाई कर सकते हैं।

आज के समय में गेहूँ की खेती करते समय किसान भाई अगर भूमि के साथ ज्यादा खिलवाड़ न करके बोएं या यूँ कह सकते हैं कि जुताई अगर शून्य के बराबर करके करें तो अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। शून्य जुताई से गेहूँ बुवाई एक अनोखी तकनीक है जिसका नाम है जीरो टिलेज एवं सीड कमफर्टिलाइजर ड्रिल मशीन व हैप्पी शीडर आदि मशीनेंं जीरो टिलेज के लिये उपयुक्त है। इन मशीनों से किसान भाई बाजरा, कपास, धान, सोयाबीन आदि की फसलों की कटाई करते ही तुरंत पलेवा करके गेहूँ की बुवाई सीधी जमीन में कर सकते हैं। इस तकनीकी से जो समय जुताई आदि में लगता है उसे बचाया जा सकता है।

जीरो टिलेज कहाँ:- जहां पर फसल कटाई में या देर से पकने में ज्यादा समय लगता है तथा गेहूं की बुवाई 25 नवंबर के बाद हो पाती है वहां पर इस मशीन का उपयोग अति लाभदायक सिद्ध हुआ है। इस मशीन का उपयोग अति चिकनी मिट्टी को छोड़कर सभी प्रकार की मिट्टी में सुचारु रूप से किया जा सकता है।
जीरो टिलेज संबंधी कुछ महत्वपूर्ण सुझाव:-

  • बाजरा, कपास तथा धान कटाई करते समय यह ध्यान रखें कि डंठल/फानें ज्यादा बड़े ना हो।
  • अगेती बिजाई करने से फसल उत्पादन में वृद्धि होती है ।
  • मशीन की देख रेख समय समय पर करते रहें तथा उचित स्थान पर रखें ।
  • इस मशीन को चलाने के लिए प्रशिक्षण लेना जरुरी है ।
  • बिजाई करते समय उचित गहराई करने हेतु मशीन के दोनों तरफ पहिये से स्क्रू बोल्ट की सहायता से ऊपर नीचे रखें।
  • मशीन के दोनों तरफ ड्राविंग व्हील होते हैं इससे आवश्यकता आनुसार दिए गए ग्रुप की सहायता से व्यवस्थित करें।
  • मशीन चलते समय पीछे दिए गए लकड़ी के फट्टे पर बैठकर एक व्यक्ति को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए की बीज या खाद सही निकल रहे हैं या नहीं, कोई नलकी बंद तो नहीं है।
  • इस मशीन द्वारा किसानभाईयों से सुझाव दिया जाता है कि गेहूं बीज की मात्रा 50 कि. ग्रा. प्रति एकड़ प्रयोग करें ।

 

  • पी. एन. त्रिपाठी
  • अल्पना शर्मा द्
  • ऋषिराज नेगी
    email: kvkshahdol@rediffmail.com
FacebooktwitterFacebooktwitter
www.krishakjagat.org
Share