लाभ की आशा में बुआई क्षेत्र में वृद्धि

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मानसून के केरल तट पर समय से पहुंचने के बाद भी मध्यप्रदेश, राजस्थान तथा अन्य उत्तरी राज्यों में यह देर से पहुंचा और वर्षा सम्बन्धी भविष्यवाणियां एक बार फिर गलत साबित हुई, इसके कारण किसानों की बुआई में व्यवधान आये और किसानों की व्यवस्था गड़बड़ा गई। इन व्यवधानों के बाद भी जुलाई के तीसरे सप्ताह तक खरीफ फसलों के बुआई क्षेत्र में इस वर्ष पिछले वर्ष की अपेक्षा 11.90 लाख हेक्टर क्षेत्र की वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष जहां जुलाई के तीसरे सप्ताह तक 673.41 लाख हेक्टर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई की गई थी, वहीं इस वर्ष यह क्षेत्र बढ़कर 685.31 लाख हेक्टर हो गया है। इस वर्ष बुआई क्षेत्र में 1.76 प्रतिशत की वृद्धि किसानों की जागरुकता का प्रतीक है।
धान का कुल क्षेत्र जो पिछले वर्ष 169.23 लाख हेक्टर था वह इस वर्ष बढ़कर 177.04 लाख हेक्टर हो गया है, जो कि पिछले वर्ष के क्षेत्र से 4.6 प्रतिशत अधिक है। पिछले वर्ष किसानों को दलहनी फसलों की उचित कीमत नहीं मिल पाई थी। उसके बाद भी इस वर्ष अब तक किसानों ने 93.36 लाख हेक्टर क्षेत्र में इन्हें लगाया है जबकि पिछले वर्ष 90.33 लाख हेक्टर क्षेत्र में इन्हें लगाया था। मोटे अनाजों के क्षेत्र में भी इस वर्र्ष मामूली वृद्धि हुई है। इन फसलों की बुआई 130.90 लाख हेक्टर क्षेत्र में हुई है जो पिछले वर्ष 129.41 लाख हेक्टर में ली गई थी।
इस वर्ष तिलहनी फसलों की बुआई में बड़ी कमी आई है। पिछले वर्ष खरीफ तिलहनी फसलों की बुआई 144.82 लाख हेक्टर में की गई थी जो इस वर्ष अब तक मात्र 123.55 लाख हेक्टर में की गई है। तिलहनी फसलों की बुआई में पिछले वर्ष की तुलना में 14.6 प्रतिशत की कमी एक बड़ी कमी है जो आने वाले माह में तेलों के दामों को प्रभावित करेगी और तेलों के अधिक आयात का कारण बनेगी। इस वर्ष गन्ना भी पिछले वर्ष की तुलना में 3.93 लाख हेक्टर में लगाया गया है। पिछले वर्ष गन्ने का क्षेत्र जहां 45.22 लाख हेक्टर था वहीं इस वर्ष इसकी बुआई 49.15 लाख हेक्टर में की गई है। इसका प्रभाव चीनी उद्योग पर अवश्य पड़ेगा। केन्द्रीय सरकार को इसके आयात/ निर्यात में संतुलन बनाना होगा। जिसका असर गन्ना उत्पादक किसानों को गन्ने की कीमत के भुगतान पर भी पड़ेगा।
किसानों ने इस वर्ष कपास की बुआई पर अधिक जोर दिया है। पिछले वर्ष देश में जहां कपास 86.86 लाख हेक्टर में लगाई गई थी वहीं इस वर्र्ष अब तक इसकी बुआई 104.29 लाख हेक्टर क्षेत्र में की जा चुकी है। कपास के क्षेत्र में पिछले वर्ष की तुलना में 20.0 प्रतिशत क्षेत्र में वृद्धि एक सकारात्मक पक्ष तो है परन्तु कपास किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पाने की आशा पूर्ण हो पाती है कि नहीं यह समय ही बता पायेगा।

 

नियमों का विधान मनुष्य के लिए हुआ,
मनुष्य का निर्माण नियम के लिए नहीं। – स्वामी रामतीर्थ

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