चुनावी वर्ष में – किसानों के लिए सरकार ने खोला खजाना

किसानों को गेहूं की कीमत 2000 रुपए क्विंटल मिलेगी

(विशेष प्रतिनिधि)

भोपाल। चुनावी वर्ष में म.प्र. सरकार ने किसानों के लिए खजाना खोल दिया है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के सवाल भावान्तर भुगतान योजना जारी रखें कि नहीं? पर हाँ में जवाब देते हुए किसानों ने भावान्तर पर मुहर लगाई। मुख्यमंत्री ने भोपाल में आयोजित किसान महासम्मेलन में किसानों से हामी भरवाकर कई घोषणाएं कीं। इसमें गेहूं 2000 रुपए क्विंटल खरीदने वाली घोषणा ने किसानों को खुश कर दिया।

किसान को रबी में समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने वाले गेहूं की कीमत 2000 रुपये क्विंटल मिलेगी। उन्होंने कहा कि 1735 रु. क्विंटल गेहूं का समर्थन मूल्य भारत सरकार ने घोषित किया है। इस पर राज्य सरकार मुख्यमंत्री उत्पादकता प्रोत्साहन योजना के तहत 265 रुपये प्रति क्विंटल की राशि पंजीकृत कृषकों के खाते में उपलब्ध कराएगी जिससे उसकी कीमत 2000 रु. प्रति क्विंटल हो जाएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि गत वर्ष खरीफ में धान एवं रबी में गेहूं की हुई समर्थन मूल्य पर खरीदी में पंजीकृत कृषकों को 200-200 रुपये की राशि प्रति क्विंटल अतिरिक्त रूप से दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने महासम्मेलन में कई कृषक हितैषी घोषणाएं की। उन्होंने कहा कि अगले 5 वर्षों में 1 लाख करोड़ की राशि से सिंचाई सुविधाएं बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि फसल बीमा और फसल नुकसान का मुआवजा एकसाथ दिया जाएगा। महासम्मेलन में मुख्यमंत्री ने भावांतर भुगतान योजना के तहत दिसम्बर माह में की गई उपज विक्रय का भावान्तर 620 करोड़ की राशि का एक क्लिक कर भुगतान किया तथा प्रमाण-पत्र वितरित किए। यह भुगतान 3 लाख 98 हजार किसानों को किया गया। उन्होंने कहा कि रबी में चना, मसूर, सरसों एवं प्याज को भावान्तर योजना में शामिल किया गया है।

किसान महासम्मेलन में मुख्यमंत्री की घोषणा

  • किसानों को उपज का मूल्य दिलाने मुख्यमंत्री कृषि उत्पादकता योजना लागू होगी
  • गेहूँ और धान पर समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 200 रु. प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि मिलेगी
  • ओला वृष्टि प्रभावित फसलों के नुकसान की भरपाई की जाएगी
  • रबी 2017-18 में चना, मसूर, सरसों एवं प्याज को भावान्तर योजना में शामिल किया।
  • उपज गोदाम में भण्डारण करने पर 4 माह तक के शुल्क का भुगतान सरकार करेगी।
  • बीहड़ को कृषि योग्य बनाने के लिये 1200 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे।
  • 150 कृषि उपज मण्डियों में प्रदेश तथा बाहर की मण्डियों के भाव प्रदर्शित किये जाएंगे।
  • 50 कृषि उपज मण्डियों में ग्रेडिंग एवं पैकेजिंग प्लांट लगाए जाएंगे।
  • 25 कृषि उपज मण्डियों में कलर सोट्रेक्स प्लांट लगाए जाएंगे।
  • अल्पकालीन फसल ऋण की देय तिथि 31 मार्च से बढ़ाकर 30 अप्रैल की जाएगी।
  • किसान क्रेडिट कार्ड रूपे कार्ड में बदला जाएगा।
  • 4530 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में माइक्रो ए.टी.एम. मशीन लगाई जाएगी।
  • पशुपालन क्रेडिट कार्ड प्रदान किए जाएंगे।
  • आचार्य विद्यासागर गौ-संवर्धन योजना में 1500 के स्थान पर प्रतिवर्ष 15 हजार हितग्राहियों को लाभ मिलेगा।
  • संशोधित खसरा नकल-नामांतरण एक महीने में कर दिया जायेगा।
  • अब आवेदन देने के दिन ही सीमांकन की तारीख दे दी जायेगी।
  • बँटाईदार किसानों को भी सभी योजनाओं का लाभ मिलेगा।
  • यदि गाँव के लोग ट्रांसफार्मर स्वयं परिवहन व्यवस्था कर लायेंगे, तो किसानों को ट्रांसफार्मर का किराया नहीं लगेगा।
  • यदि तीन महीने में ट्रांसफार्मर जल गया हो, तो चार्ज नहीं लगेगा।
  • अब डिफाल्टर किसानों को भी कर्ज मिलेगा।
  • किसान मुख्यमंत्री कृषि पंप योजना में राशि जमा कर आवेदन करेंगे उन्हें अस्थाई कनेक्शन का चार्ज नहीं लगेगा।

श्री शिवराज सिंह ने घोषणा करते हुए कहा कि किसान अब 30 अप्रैल तक जीरो प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण ले सकेंगे। पूर्व में यह तिथि 31 मार्च तय थी। उन्होंने कहा कि क्रेडिट कार्ड को रूपे कार्ड में बदला जाएगा तथा 4530 सहकारी समितियों में माइक्रो एटीएम मशीन लगाई जाएगी जिससे किसान को पैसा निकालने में आसानी होगी। पशु आहार के लिए 50 हजार तक का ऋण देने के साथ-साथ विद्यासागर पशु संवर्धन योजना में 1500 की जगह अब 15 हजार किसानों को लाभ दिया जाएगा। बटाई पर खेती करने वाले कृषकों को भी सभी योजनाओं का लाभ मिलेगा। विद्युत ट्रांसफार्मर लगने के तीन माह के भीतर जलने पर बिना चार्ज लिए उसे बदला जाएगा।
मुख्यमंत्री ने भण्डारण योजना की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब किसान 4 माह तक वेयरहाऊस में उपज का भण्डाण कर सकेंगे। पैसे की आवश्यकता पडऩे पर उपज का 25 फीसदी पैसा ले सकेंगे। इस पर ब्याज सरकार देगी। उन्होंने कहा कि राज्य की 150 मंडियों में फसल भाव डिस्प्ले किए जाएंगे साथ ही 50 मंडियों में ग्रेडिंग और पैकेजिंग प्लांट लगाए जाएंगे।
इसके पूर्व कार्यक्रम में कृषि मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन ने कहा कि भावान्तर भुगतान योजना बनाने वाला म.प्र., देश में पहला राज्य है। इसे देखकर अब अन्य राज्य भी यह योजना बनाकर लागू कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गत खरीफ में 8 फसलों के लिए भावान्तर लागू की गई थी जिसका भुगतान 1512 करोड़ का किया गया है। उन्होंने कहा कि कौशल विकास के माध्यम से प्रदेश में ट्रैक्टर कंपनियों के सहयोग से 6 ट्रैक्टर प्रशिक्षण संस्थान प्रारंभ किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में किसानों को भावान्तर भुगतान योजना के प्रमाण पत्र वितरित किए गए। आभार कृषि राज्य मंत्री श्री बालकृष्ण पाटीदार ने माना।

 केन्द्र से भावांतर योजना की 50 प्रतिशत राशि शीघ्र जारी करने का आग्रह

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली से मुलाकात कर किसानों को उनकी उपज के उचित दाम दिलाने के लिए प्रदेश में चल रही भावांतर भुगतान योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। श्री चौहान ने उन्हें बताया कि इस योजना के तहत मध्यप्रदेश सरकार ने अभी तक 19 सौ करोड़ रुपये अपने संसाधनों से किसानों को वितरित कर दिये हैं। श्री चौहान ने कहा कि भावांतर भुगतान योजना केन्द्र और राज्य के सहयोग से चलाये जाने वाली योजना है जिसमें केन्द्र और राज्य का 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी है। उन्होंने केन्द्रीय वित्त मंत्री से आग्रह किया कि इस योजना में केन्द्र सरकार की हिस्सेदारी (50 प्रतिशत) की राशि शीघ्र राज्य को जारी की जाये। मुख्यमंत्री ने वित्तमंत्री से सूखा राहत की केन्द्र में लम्बित 28 सौ करोड़ की राशि शीघ्र जारी करने की मांग की।

भण्डारण का 4 माह का खर्च सरकार देगी

इस योजना में किसान फसल को तुरंत नहीं बेचना चाहे और अधिकृत भंडार गृहों में रखना चाहें, तो 4 माह तक भंडारण का खर्च राज्य सरकार द्वारा दिया जायेगा। इसी तरह चना,

मसूर और सरसों के लिये भी भावांतर भुगतान योजना लागू की जायेगी। योजना में अगर किसान अपनी फसल भंडारण गृह में रखता है, तो उसकी आवश्यकता के लिये फसल के मूल्य का 25 प्रतिशत उसे सहकारी बैंक द्वारा दिया जायेगा, जो वह फसल बिकने पर लौटाएगा। इस राशि पर लगने वाला ब्याज राज्य सरकार भरेगी। मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना में किसानों के बेटे-बेटियों को 25 लाख से 2 करोड़ रुपये तक के ऋण की गारंटी तथा 15 प्रतिशत अनुदान राज्य सरकार देगी। साथ ही 7 साल तक 5 प्रतिशत ब्याज भरेगी।

 

 सिंचाई क्षमता बढ़ेगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई क्षमता साढ़े सात लाख हेक्टर से बढ़ाकर चालीस लाख हेक्टेयर कर दी गयी है। अगले पांच वर्ष में सिंचाई सुविधा बढ़ाने पर एक लाख करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे। होशंगाबाद संभाग में साढ़े सात हजार करोड़ रुपये सिंचाई पर खर्चा होगा।

अगले पाँच सालों में बुंदेलखंड में 4 लाख 50 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई होगी। चंबल में तीन लाख दस हजार हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई होगी। इस पर पाँच हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जायेगा। मालवा क्षेत्र में नर्मदा के पानी से 11 लाख 5 हजार हेक्टेयर नये क्षेत्र में सिंचाई होगी। रेवांचल क्षेत्र में 6 लाख 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई होगी। महाकौशल क्षेत्र में 4 लाख 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई होगी। भोपाल संभाग में 6 लाख 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी।

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