देश के 111 आकांक्षी जिलों में – कृषि कल्याण अभियान की शुरूआत

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(नई दिल्ली से निमिष गंगराड़े )
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का महत्वाकांक्षी लक्ष्य 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 1 जून से 31 जुलाई के दौरान देश के 111 आकांक्षी जिलों में कृषि कल्याण अभियान की शुरूआत की है। इस अभियान के तहत किसानों को उत्तम तकनीक और आमदनी बढ़ाने के बारे में सहायता और मार्गदर्शन दिया जाएगा। ये जानकारी भारत सरकार के एग्रीकल्चर कमिश्नर डॉ. एस. के मल्होत्रा ने कृषक जगत को विशेष मुलाकात में दी।

डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि यह अभियान आकांक्षी (एस्पिरेशनल) जिलों के प्रत्येक 25 गांवों में चलाया जा रहा है। इन जिलों के लिए कृषि मंत्रालय के विभिन्न विभागों ने संयुक्त रूप से एक कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत विशेष गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। इस अभियान में पशुपालन, डेयरी उद्योग, मत्स्य पालन, आईसीएआर मिलकर प्रत्येक जिले के कृषि विज्ञान केन्द्र के साथ खेती की बेहतर पद्धतियां और कृषि आमदनी बढ़ाने के लिए विभिन्न गतिविधियां करेंगी।
डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि इस अभियान में म.प्र. के 8 जिले, राजस्थान के 5 और छत्तीसगढ़ के भी 10 जिले शामिल हैं। प्रत्येक जिले के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त किया गया है जो इस अभियान का समन्वय एवं मॉनीटरिंग देखेगा। इनमें कृषि मंत्रालय के 50 अधिकारी, आईसीएआर के 40 और पशुपालन विभाग के 21 अधिकारी रहेंगे।
डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय ने नीति आयोग द्वारा निर्धारित विभिन्न मानकों के आधार पर 22 राज्यों के 111 जिलों को एस्पिरेशनल याने आकांक्षी चिन्हांकित किया गया। इनमें झारखंड के सबसे अधिक 19 जिले, बिहार के 13, उड़ीसा के 10, उत्तर प्रदेश के 8 जिले शामिल हैं।

मानक जिनके आधार पर जिले चिन्हांकित किए गए  प्रतिशत
1. स्वास्थ्य एवं पोषण 30 प्रतिशत
2. शिक्षा 30 प्रतिशत
3. कृषि एवं जल संसाधन 20 प्रतिशत
4. वित्तीय समावेश 10 प्रतिशत
5. कौशल विकास 5 प्रतिशत
6. बुनियादी ढांचा 5 प्रतिशत
कृषि आमदनी बढ़ाने और खेती की बेहतर पद्धतियों के लिये 10 सूत्रीय गतिविधियां
1. स्वाईल हेल्थ कार्ड का सभी किसानों में वितरण।
2. एफएमडी से बचाव के लिये शत-प्रतिशत टीकाकरण।
3. दलहन-तिलहन मिनीकिट का वितरण।
4. प्रत्येक परिवार को 5 बागवानी/वानिकी/बांस के पौधे।
5. प्रत्येक गांव में 100 नाडेप पिट बनाना।
6. कृत्रिम गर्भाधान के बारे में जानकारी देना।
7. सूक्ष्म सिंचाई से जुड़े कार्यक्रमों का प्रदर्शन।
8. भेड़-बकरी में शत-प्रतिशत पीपीआर उन्मूलन।
9. प्रत्येक गांव में 10 से 20 कृषि यंत्रों का वितरण।
10. प्रत्येक गांव में मधुमक्खी पालन, मशरूम की खेती और गृह वाटिका के लिये प्रशिक्षण का आयोजन।
आकांक्षी जिले
मध्यप्रदेश- 8 जिले
दमोह, सिंगरौली, बड़वानी, विदिशा, खंडवा, छतरपुर, राजगढ़, गुना।
राजस्थान – 5 जिले
धौलपुर, करौली, बारां, जैसलमेर, सिरोही।
छत्तीसगढ़- 10 जिले
कोरबा, महासमुंद, बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, राजनांदगांव, सुकमा।
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