ट्रैक्टर चलित यंत्रों का महत्व

पावर टिलर
पावर टिलर द्वारा खेत की तैयारी, सिंचाई, निराई-गुड़ाई, अनाज की सफाई आदि में होता है। भारत में ज्यादातर किसानों के पास खेती के लिए ट्रैक्टर रख पाना मुश्किल है। पावर टिलर एक तरह का छोटा ट्रैक्टर है, जिसमें केवल 02 पहिए होते हैं। और चलाने वाले को इसके पीछे-पीछे चलते हुए हैण्डिल द्वारा नियंत्रण करना होता है। छोटे खेत और पहाड़ों पर व धान की खेती में पावर टिलर बहुत ही कारगर है। यह न केवल जुताई करता है बल्कि खेत की मिट्टी को भी अच्छी तरह मिला देता है। पावर टिलर लघु तथा मध्यम वर्ग के कृषकों के लिए सघन खेती हेतु सर्वाधिक उपर्युक्त शक्ति का स्रोत बहुउपयोगी मशीन है। इसका इंजन हल्के भार वाला मध्यम/ हाई स्पीड वाटर कूल्ड 8-16 अश्व शक्ति का होता है। विभिन्न कृषि कार्यो में डीजल, आयल की खपत 1-1.5 लीटर प्रति घंटा होती है।
लेजर लैंड लेवलर
लेजर लैंड लेवलर एक प्रमुख आधुनिक परिशुद्ध समतलीकरण यन्त्र है। यह परम्परागत विधियों से एकदम हटकर एक अत्याधुनिक तकनीक है, जिसमें लेजर में लगे किरणों के द्वारा लेवलर को अपने आप नियन्त्रित करके भूमि को बराबर मात्रा में समतल कर देते हैं। इस यन्त्र को चलाने के लिए एक प्रशिक्षित मैकेनिक की आवश्यकता पड़ती है। यह यन्त्र 50-60 अश्वशक्ति के ट्रैक्टर की सहायता से चलता है। एक एकड़ भूमि को समतल बनाने के लिए कम से कम एक या डेढ़ घण्टा लगता है। लेजर लैण्ड लेवलर का इस्तेमाल कर किसान सिंचाई जल की बचत करता है तथा सिंचाई दक्षता में सहायक है। लेजर लेवलर द्वारा सीमित जल स्रोतों द्वारा भी किसान सब्जी उगा सकते हैं।
टेरेसर ब्लेड
यह यन्त्र खेत की जुती हुई सतह को समतल करने में इस्तेमाल होता है। इसके ब्लेड को विभिन्न कोण पर समायोजित करके मिट्टी से मेड़ आदि बनाई जा सकती हैं। यह ब्लेड छोटे एवं मध्यम अश्व शक्ति के ट्रैक्टर के पीछे लगाया जाता है। इससे मिट्टी उठाकर इधर-उधर नहीं ले जाई जा सकती है तथा इससे थोड़ी मात्रा में मिट्टी काटकर आस-पास के क्षेत्र में फैलाई जा सकती है।
स्क्रेपर
स्क्रेपर ट्रैक्टर के पीछे लगाकर चलाया जाता है। इससे भारी क्षमता में मिट्टी को काटकर और उठाकर किसी भी दूरी तक ले जाया जा सकता है और मिट्टी को जहाँ भी चाहें और जिस मात्रा में चाहें, फैलाया जा सकता है।
पल्वराइजिंग रोलर
यह लोहे की छड़ों से बना रोलर कल्टीवेटर के पीछे चलाया जा सकता है। कल्टीवेटर द्वारा जुती हुई भूमि को अधिक भुरभुरी बनाने में यह प्रभावी होता है। पल्वरजिंग रोलर में फ्रेम व भार देने वाले स्प्रिंग होते हैं। इसकी कुल लम्बाई व चौड़ाई कल्टीवेटर के नाप पर निर्भर करती है। कल्टीवेटर के साथ लगा रोलर खेत को जल्दी तैयार करता है। इसके प्रयोग से 20-30 प्रतिशत ऊर्जा की बचत होती है।
मेड़ बनाने वाला यन्त्र
यह यन्त्र मेड़ तथा कूँड बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है। कूंड बनाने की गहराई या मेड़ की ऊँचाई को ट्रैक्टर के हाइड्रोलिक प्रणाली की सहायता से घटाया-बढाया जा सकता है। इसमें दो मोल्ड बोर्ड लगे होते हैं जिनमें से एक दाहिनी ओर एवं दूसरा बायीं ओर मिट्टी पलटता है। दोनों मोल्ड बोर्ड एक ही फ्रेम में लगे होते हैं। इससे मेड़ या रिज बनाया जाता है तथा मिट्टी चढ़ाने का भी काम लिया जाता है। इनसे चौड़े मेड़ तथा छोटी नालियाँ बनती हैं। इसके लिए फ्रेम में 150 सेमी. की दूरी रखी जाती है।
बेड बनाने का यन्त्र
इस यन्त्र का प्रयोग विभिन्न चौड़ाई की बेड बनाने में होता है। कुछ फसल जैसे मक्का, कपास एवं सब्जियों आदि को बेड पर उगाने से सिंचाई की क्षमता प्रभावी होती है। जिससे फसलों की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में वृद्धि होती है।
पाटा
कभी-कभी खेत में जुताई करने के बाद भी ढेले बच जाते हैं। ऐसी अवस्था में इस यन्त्र का प्रयोग किया जाता है। यह लकड़ी का बना होता है और दोनों सिरों पर दो कडिय़ों में जंजीर या रस्सी से बांध कर इसे चलाया जाता है।
अधिक सूखी जमीन में काम करने के लिए वजन का प्रबन्ध करना पड़ता है।

  • अनुराग पटेल
  • दुष्यन्त सिंह
    email : 3679anuragpatel@gmail.com

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