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दुधारू पशुओं की प्रजनन क्षमता पहचानें

भैंस प्रजनन संबंधी समस्याएं

उक्त सभी कारणों से भैंस देर से ब्याती हैं। इससे उनका दूध उत्पादन देर से शुरू होता है। जिसके कारण भैंस पालक को आर्थिक हानि उठानी पड़ती है।
प्रबंधन

स्वास्थ्य प्रबंधन

जिस भैंसा को ब्रुसेल्लोसिस या ट्राईकोमोनियासिस जैसी कोई प्रजनन से जुड़ी बीमारी हो उसे मिलान के लिए नहीं लें।
पशु को ब्याते वक्त साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें। ब्याने के बाद उसका पिछला हिस्सा, लाल दवा सा डेटाल या सांवला की कुछ बूंदे गुनगुने पानी में डालकर उसे धोएं।
प्रजनन प्रबंधन
पशुओं के गर्मी में आने के लक्षणों पर ध्यान रखें। गर्मी में आने के बारह घंटे बाद ठंडे वक्त सुबह या देर रात उसे अच्छे सांड द्वारा प्राकृतिक रूप से मिलन करवाएं और फिर 21 दिन बाद वह पशु गर्मी में आती है या नहीं इसका ध्यान रखें। अगर वह गर्मी में नहीं आती मतलब गर्भित हो चुकी है। लेकिन अगर वह गर्भित नहीं हुई होगी तो वह फिर से गर्मी में आती है। ऐसा बार-बार होने पर अनुभवी पशुओं के डॉक्टर द्वारा जांच करवाकर उचित दवा का प्रबंध करें।
बांझ पशुओं को बेच दें। पशुओं के पालन-पोषण के कुल खर्च का 70 प्रतिशत खर्च उनके पोषण पर होता है। अत: अनावश्यक बांझ बिना उत्पादक 1 से 2 लीटर दूध देने वाली पशु को बेचकर अच्छी ज्यादा दूध देने वाली अच्छी प्रजननमय पशु खरीदें।

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