दुधारू पशुओं की प्रजनन क्षमता पहचानें

भैंस प्रजनन संबंधी समस्याएं

  • भैंसों को दो ब्यात के बीच का फासला गाय के मुकाबले ज्यादा यानि 16 माह होता है। इसमें दूध उत्पादन देरी से प्राप्त होता है।
  • भैंस देरी से गर्मी में आती हैं तथा जब गर्मी में आती हैं तब उसके लक्षण स्पष्ट रूप से उभरते नहीं है।
  • भैंस देर रात तथा एकदम सबेरे गर्मी में आती हैं इससे उसकी पहचान ठीक से नहीं हो पाती।
  • भैंस कई बार गर्भित करवाने का प्रयास करवाने के बाद ही गर्भित नहीं होती अत: उसे बार-बार भैंस के साथ छोडऩा पड़ता है।

उक्त सभी कारणों से भैंस देर से ब्याती हैं। इससे उनका दूध उत्पादन देर से शुरू होता है। जिसके कारण भैंस पालक को आर्थिक हानि उठानी पड़ती है।
प्रबंधन

  • भैंसों को धूप में न रखें। उन्हें छाया में ही रखें।
  • उन्हें चराने हेतु धूप में न भेजें। बाड़े में खुला रखकर वहीं चारा तथा पानी का प्रबंध करें।
  • उन्हें प्रात: सबेरे तथा रात्रि में सूखा चारा तथा दिन में हरा चारा खिलाएं।
  • उन्हें ठंडा ताजा जल पीने हेतु उपलब्ध कराएं।
  • उन्हें हरा पौष्टिक चारा जैसे बरसीम, लूसर्न ग्रास, मक्का आदि 25 से 35 किलो रोजाना खिलाएं।
  • उन्हें खनिज मिश्रण उपलब्ध करवाएं।
  • उन्हें दूध निकालने से आधा घंटा पहले ठंडे जल से नहलाएं। संभव हो तो 1 घंटा पहले ठंडे पानी के टांके में बैठने दें।
  • दूध निकालने से पहले तथा दूध निकालते वक्त प्यार से पुचकारें। धक्का-मुक्की न करें।
  • शांत जगह दुग्धदोहन करें।
  • दूध जल्दी 7 से 10 मि. में निकालें।
  • दूध निकालने से पहले कटड़े या कटड़ी को उनके पास सामने रखें। थोड़ा दूध पीने दें फिर निकालें।
  • दूध हल्के हाथों से धीरे निकालें, अंगूठा उल्टा कर दूध न निकालें। लगातार दूध दोहन करें।

स्वास्थ्य प्रबंधन

  • पशु का रोजाना निरीक्षण करें। जरा भी सुस्त नजर आए या बीमारी के कोई लक्षण दिखाई दें तो तुरंत पशुओं के डॉक्टर द्वारा जांच कराकर दवा दें।
  • बाड़े से गोबर मूत्र का निष्कासन करें। गंदगी से कई बीमारियां होती हैं। अत: उनके प्रजनन अंगों को पानी से धोकर साफ रखें। उन्हें गंदे पानी या कीचड़ में न बैठने दें।
  • उनके गर्मी में आने की तारीख, गर्भित होने की तारीख भैंसा से मिलान की तारीख या कृत्रिम गर्भाधान करवाने की तारीख एवं सभी मदों की जानकारी लिख कर रखें।

जिस भैंसा को ब्रुसेल्लोसिस या ट्राईकोमोनियासिस जैसी कोई प्रजनन से जुड़ी बीमारी हो उसे मिलान के लिए नहीं लें।
पशु को ब्याते वक्त साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें। ब्याने के बाद उसका पिछला हिस्सा, लाल दवा सा डेटाल या सांवला की कुछ बूंदे गुनगुने पानी में डालकर उसे धोएं।
प्रजनन प्रबंधन
पशुओं के गर्मी में आने के लक्षणों पर ध्यान रखें। गर्मी में आने के बारह घंटे बाद ठंडे वक्त सुबह या देर रात उसे अच्छे सांड द्वारा प्राकृतिक रूप से मिलन करवाएं और फिर 21 दिन बाद वह पशु गर्मी में आती है या नहीं इसका ध्यान रखें। अगर वह गर्मी में नहीं आती मतलब गर्भित हो चुकी है। लेकिन अगर वह गर्भित नहीं हुई होगी तो वह फिर से गर्मी में आती है। ऐसा बार-बार होने पर अनुभवी पशुओं के डॉक्टर द्वारा जांच करवाकर उचित दवा का प्रबंध करें।
बांझ पशुओं को बेच दें। पशुओं के पालन-पोषण के कुल खर्च का 70 प्रतिशत खर्च उनके पोषण पर होता है। अत: अनावश्यक बांझ बिना उत्पादक 1 से 2 लीटर दूध देने वाली पशु को बेचकर अच्छी ज्यादा दूध देने वाली अच्छी प्रजननमय पशु खरीदें।

  • डॉ. अंकुर नारद
    email : ankurnarad240@gmail.com

www.krishakjagat.org

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