समस्या- ईसबगोल की खेती करना क्या लाभदायक होगा, कृपया विस्तार से तकनीकी सुझायें।

मैं ईसबगोल की खेती करना चाहता हूं, इसकी आधार आवश्यकताओं व उत्पादन तकनीक की जानकारी देने की कृपा करें।

समाधान- ईसबगोल एक नगदी औषधीय फसल है।

  • इसके लिये ठंडा व शुष्क मौसम अनुकूल रहता है।
  • अच्छे जल निकास वाली हल्की बालुई मिट्टी इसके लिए अधिक उपयुक्त रहती है। वैसे जल निकास की अच्छी व्यवस्था कर इसे उगाया जा सकता है।
  • पलेवा दें, खेत को अच्छी तरह जुताई कर, मिट्टी को भुरभुरी कर ले।
  • जवाहर ईसबगोल -4, गुजरात इसबगोल-1, गुजरात ईसबगोल-2 या हरियाणा ईसबगोल-5 में से जाति का चयन करें। द्य नवम्बर के प्रथम से अंतिम सप्ताह तक फसल की बुआई करंे। देर से बोने पर कीट व्याधियों का प्रकोप अधिक होता है।
  • बुआई के समय खेत में ट्राइकोडर्मा 5 किलो/हे. की दर से डालें।
  • कतारों से कतारों की दूरी 30 से.मी. रखें व बीज 4 से 5 किलो ग्राम प्रति हेक्टर के मान से डालें।
  • 2 से 4 टन गोबर या अन्य जैविक खाद प्रति हेक्टर के मान से बुआई के 10-15 दिन पूर्व खेत में मिलायें।
  • नमी अनुसार सिंचाई लगभग 30,60 व 80 दिन बाद करें।
  • फसल लगभग 110 से 120 दिन में पकती है कटाई सुबह के समय ही करंे जिससे बीज कम झड़े।
  • ईसबगोल की औसत उपज लगभग 1000 कि.ग्रा./हेक्टर होती है।
  • ईसबगोल के बीजों के ऊपर पाया जाने वाला छिलका ही औषधि के रूप में उपयोग में लाया जाता है।

– सत्यनारायण साहू, राजनांदगांव

www.krishakjagat.org

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