विशाल अफ्रीकी घोंघे

कृषि में उभरती एक नई समस्या

धरती पर पाये जाने वाले भिन्न-भिन्न प्रजाति के घोंघों में विशाल अफ्रीकी घोंघे (एचिटीना फुलाका) सबसे बड़े आकार के होते हैं। इनका शरीर 19 से.मी. तक लंबा होता है जो कि एक कड़े सुरक्षात्मक आवरण से ढंका हुआ होता है। ये घोंघे वर्षा ऋतु में अत्यंत ही सक्रिय होते है तथा स्वभाव से ये जीव रात्रिचर होते है। विशाल अफ्रीकी घोंघों का प्रकोप कृषि तथा उद्यानिकी फसलों तथा शोभाकारी पौधों पर होता है इस जीव के प्रमुख पोषी पौधों में पपीता, शहतूत, बैंगन, भिंडी, पत्ता गोभी, फूल गोभी, सेम, सुपारी, रबर की नई कोपलें, कॉफी के नवांकुर, ऑर्किड आदि शामिल होते है। विशाल अफ्रीकी घोंघे इन पौधों की पत्तियों, तनों, फलों तथा फूलों आदि को खाकर बड़ी भारी मात्रा में आर्थिक नुकसान पहुंचाते है। नर्सरी अवस्था में इन घोघों द्वारा नवांकुरों को बहुत ही भारी नुकसान पहुंचाते है। विभिन्न पौधों के अलग-अलग भागों को खाने के साथ ही ये पत्तेदार सब्जियों को अपने मल से दूषित कर उनको खाने के लिए अनुपयोगी बना देते हैं। ये घोंघे केले तथा पपीते के पौधों की ऊपर की पत्तियों तथा फलों पर भी चढ़ कर उनको कुतर देते है जिससे वे फल भी खराब हो कर खाने के लिए अनुपयुक्त हो जाते हैं। इसी के साथ ये घोंघे कृषि कार्यों में भी बाधा पैदा करते हैं। उद्यानों में उगाये जाने वाले फूलों तथा क्रोटोन जैसे पौधों की पत्तियों पर भी ये बड़ी संख्या में चढ़ कर उनको खा कर उनमें छिद्र बना देते हैं जिससे इस शोभाकारी पौधों का संपूर्ण सौंन्दर्य ख़त्म हो जाता है तथा वो बीमारु दिखाई देते है। विशाल अफ्रीकी घोंघे बहुलिंगी जीव होते है अर्थात् एक ही जीव में नर तथा मादा के प्रजनन अंग पाये जाते हैं तथा ये पीले रंग के 50 से 100 अंडे जमीन पर में देते है। इन अंडों से एक सप्ताह में शिशु घोंघे बाहर निकाल आते है जो की विभिन्न अवस्थाओं को पार करके एक वर्ष में पूर्णतया विकसित हो जाते है। विशाल अफ्रीकी घोंघे का जीवन काल 3 से 5 वर्ष का होता है।

विशाल अफ्रीकी घोंघे के प्रबंधन हेतु क्या करें

  • इन घोंघों के छिपने के स्थानों को तथा वहां पर छिपे घोघों को एकत्रित करके उन्हें नष्ट कर देना चाहिए।
  • घोंघों के प्रकोप की शुरुआत में उन्हें पौधों से व उनके चलने तथा छुपने के स्थानों से एकत्र करके उनका नाश करना चाहिए।
  • इन घोंघों को आकर्षित करने के लिये पपीते के तने को आड़ा चीर कर उसे ट्रेप के रूप में बागों में रखना चाहिए। इससे घोंघे इसके ऊपर तथा नीचे एकत्रित हो जाते है जिन्हें बाद में एकत्रित करके नष्ट कर देना चाहिये।
  • घोंघा प्रभावित बागों मे गीली बोरियों पर पपीते की पत्तियों को रख कर बागों में यत्र-तत्र रखना चाहिए इससे घोंघे इसकी ओर आकर्षित होते हैं जिनको बाद में एकत्रित करके नष्ट कर देना चाहिये।
  • सब्जियों के खेत के चारों तरफ गेंदे को ट्रेप फसल के तौर पर उगाना चाहिये जिससे ये जीव इन गेंदे के पौधों की ओर आकर्षित होकर प्रमुख फसल को कम संक्रमित करते हैं।
  • विशाल अफ्रीकी घोंघे से प्रभावित क्षेत्रों में नमक अथवा ब्लीचिंग पाउडर की फुहार मारनी चाहिये जिसके कारण ये घोंघे फसलों से दूर भागते हैं तथा काफी संख्या में मारे भी जाते है जिससे इनके प्रकोप में भी कमी आती है।
  • घोंघों से ग्रस्त छोटी जगहों या छोटे बागों में घरेलू नमक का भुरकाव करके इन जीवों को नष्ट किया जा सकता है।
  • खेतों तथा बागों में इस जीव के प्रकतिक शत्रु बड़ी संख्या में पाये जाते हैं। इनमें परभक्षी घोंघे, हर्मिट केकड़े, पक्षी तथा मिलीपीड़ शामिल है अत: इन फायदेमंद जीवों की पहचान करके उनका संरक्षण तथा संवर्धन करना चाहिये।
  • विशाल अफ्रीकी घोंघों की संख्या को कम करने के लिये विषचुग्गे का भी प्रयोग किया जाता है इसके लिये घोंघानाशी रसायन मेटाल्डीहाईड (5%) को चावल के आटे के साथ मिला कर विष चुग्गा बना कर घोंघों के चलने तथा छुपने के स्थानों तथा बागों में रखने से इस जीव की संख्या में काफी कमी करी जा सकती है।
  • घोंघानाशी रसायन, मेटाल्डीहाईड के बारीक टुकड़ों को भी बागो में घोंघों के चलने तथा छुपने के स्थानों तथा बागों में रखने से इन घोंघों की संख्या में कमी लाई जा सकती है।
  • घोंघो के बहुत ही अधिक प्रकोप की दशा में कॉपर सल्फेट (1%) अथवा 0.5% फेनीट्रोथीयोन का छिड़काव करना कुछ हद तक फायदेमंद साबित होता है।
  • जमीन पर क्विनालफॉस अथवा मिथाईल पैराथियॉन दवा के चूर्ण का भुरकाव इस जीव के नियंत्रण में कुछ हद तक फायदेमंद साबित होता है।
  • डॉ. आभिषेक शुक्ला 
  • हिरल पटेल
  • डॉ. जी.जी. रादडिय़ा, email : abhishekshukla@nau.in

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