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कड़कनाथ मुर्गीपालन से आय दूनी कैसे करें

कड़कनाथ प्रमुखत: पश्चिम मध्यप्रदेश के झाबुआ और धार जिले के आदिवासी लोगों द्वारा पाला जाने वाला पक्षी है। इस मुर्गे का रंग पूरी तरह काला होता है और इसका मांस काला होने के कारण इसे कालामासी भी कहते हैं। यह मुर्गे आदिवासी प्रजाति में बहुत ही प्रसिद्ध हैं तथा स्थानीय पर्यावरण के लिये बहुत ही अच्छी तरह अनुकूलित है। अपनी रोग प्रतिरोध क्षमता, स्वादिष्ट मांस और स्वादिष्ट स्वाद के लिये मुख्य रूप से आदिवासी जनजातीय समुदायों के बीच बहुत ही लोकप्रिय है।

कड़कनाथ भारत में मिलने वाली एकमात्र कालामासी मुर्गे कि नस्ल है। यह भील और भिलाला जनजातीय समुदायों द्वारा पाला हुआ मध्यप्रदेश का एक देशी पक्षी है। कड़कनाथ सामान्यत: मुख्य रूप से जेट ब्लैक, पेन्सिल एवं सुनहरा प्रजाति में उपलब्ध है।
शारीरिक लक्षण
कड़कनाथ पक्षी छोटे आकार के चंचल स्वभाव वाले होते हैं एवं दिखने में संपूर्णत: काले होते हैं। इनके जेट ब्लैक, पेन्सिल, गोल्डन तीन नस्लें मध्यप्रदेश में मिलती है। शरीर मध्यम, पूंछ नीची, पीठ छोटी तथा छाती चौड़ी होती है। टांगे अपेक्षाकृत छोटी होती है। चोंच, खाल, टांगे एवं अंगूठे सभी काले रंगी की होती है। इकहरी कलंगी तथा गलचर्म संपूर्णत: काला रंग का होता हैं अण्डे सफेद और भूरा तपकिरी रंग के होते हैं तथा आकार में मध्यम होते है। एक मुर्गी सालभर में 110-120 अण्डे देने की क्षमता रखती है। नर का वजन 1.5 से 2.5 कि.ग्रा. तथा मादा का वजन 1 से 1.5 कि.ग्रा. होता है।
कड़कनाथ अण्डा एक पूर्ण आहार
दूध, मांस की भांति अण्डे से प्रोटीन बहुत बड़ी मात्रा में प्राप्त होती है। इसमें चर्बी और खनिज भी पर्याप्त मात्रा में होते हैं। जिसे छोटे-छोटे बच्चे भी आसानी से पचा लेते हैं। अण्डे में फैटी एसिड तथा विटामिन ए, बी, डी भी अच्छी मात्रा में पाये जाते हैं। इसके अतिरिक्त शरीर के लिये आवश्यक तत्व लोहा, कैल्शियम, फास्फोरस एवं अन्य खनिज पदार्थ भी प्राप्त होते हैं।
आयु के आधार पर कड़कनाथ मुर्गियों का आहार
प्रारंभिक आहार: जो आहार 7-8 सप्ताह की आयु वाले चूजों को दिया जाता है उसे प्रारंभिक राशक कहते हैं। इस प्रकार के आहार में तीन भाग अनाज वाले खाद्य और एक भाग प्रोटीन युक्त खाद्य होते हैं। इनमें प्रोटीन की मात्रा 20 प्रतिशत रखी जाती है।
वृद्धिकारक आहार: जो आहार 9 से 20 सप्ताह की आयु वाले पक्षियों को दिया जाता है उसे वृद्धिकारक आहार कहते हैं। इसमें 16 से 18 प्रतिशत प्रोटीन होती है।
अण्डा उत्पादक आहार: यह आहार अण्डा उत्पादन के लिये 20 सप्ताह से अधिक आयु वाले मुर्गियों को दिया जाता है। इस आहार में प्रोटीन की मात्रा 15 प्रतिशत होती है।
एक से सात दिन के कड़कनाथ चूजों का रखरखाव एवं प्रबंधन
बु्रडऱ का तापमान 90 डिग्री फारेनहाईट से 95 फारेनहाईट तक होना अति आवश्यक है। चूजों को दाना खिलाने एवं पानी पिलाने का अभ्यास आवश्यक रुप से कराना चाहिए। पानी में इलेक्ट्राल 24 घण्टे तक देना चाहिए, 8 से 10 कि.ग्रा. चिक मैस 1000 चूजों पर देना चाहिए। चिक मैस पेपर पर भुरकाव कर केवल 24 घण्टे के लिए ही देना चाहिए। इसके बाद ट्रे में या बेबी चिक फीडऱ में फीडिंग कराना चाहिए। ध्यान रहे कि बुरादे के ऊपर बिछाये गये पेपर कम से कम 6 दिन तक बिछे रहना चाहिए यदि पेपर गीला होता है, या फट जाता है तो उसे बदल देना चाहिए। यदि चूजा प्रथम सप्ताह में खुले बुरादे में चलता है तो यह आवश्यक है कि आने वाले दिनों में ई. कोलाई बीमारी या साँस संबधी समस्या आयेंगी।
कड़कनाथ मुर्गियों में डीविकिंग (चोंच कटाई)
अण्डादेय मुर्गियों में डीविकिंग एक महात्वपूर्ण कार्य है। जिससे मुर्गियों को सबसे अधिक तनाव पड़ता है। इस कार्य में यदि सावधानी नहीं बरती तो उत्पादन क्षमता में बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
ध्यान रखने योग्य बाते
– चोंच का कटाव सही होना चाहिए ताकि आगे समय चोंच अधिक न बढ़ सके।
– यदि चोंच जल्दबाजी में काटी गई है तो जल्दी बढ़ जाती है। और पिकिंग (मुर्गा में चोंच के द्वारा एक दूसरे को नोंचना) होने की पूरी संभावना बन जाती है। एवं मुर्गियों को सन्तुलित आहार ग्रहण करने में परेषानियों का सामना करना पडता है। जिससे मुर्गियों के शारीरीक शर में भिन्नता आ जाती है।
इस तरह यदि किसान भाई अपने यहॉं 100 कड़कनाथ मुर्गी की एक छोटी सी इकाई स्थापित करते हैं तो चार माह में लगभग रू. 33000/- शुद्ध आय कमा सकते हैं अर्थात प्रति माह लगभग रू. 8000/- की कमाई कर सकते हैं।

कड़कनाथ मुर्गों की आय व्यय का आकलन (100 कड़कनाथ मुर्गों की यूनिट की चार माह के लिये)
क्र. विवरण राशि रू.
1 स्थाई खर्चा (एक बार) 20000
2 बर्तन 2000
3 टीकाकरण एवं दवाईयां 3000
4 चूजा 6000
5 कुक्कुट आहार 16000
कुल लागत 2 से 5 27000
कुल आय 60000
(रू. 600/- प्रति नग)
शुद्ध आय 33000
कड़कनाथ मुर्गों में टीकाकरण कार्यक्रम
सप्ताह दिन टीका का नाम देने की विधि
1 7 एफ-1, बी-1 आँख व नाक में एक बूंद
(रानीखेत बीमारी) डालकर
2 14 गम्बोरो एन्टरमीडीएट पीने के पानी में/आई ड्रॉप
3 21 लासोटा (रानीखेत बीमारी) पीने के पानी में/आई ड्रॉप
4 35-45 गम्बोरो एन्टरमीडीएट पीने के पानी में
कड़कनाथ मुर्गियों की आवास की संरचना एवं सिद्धांत
कड़कनाथ मुर्गियों के घर बनाते समय ऐसे स्थान का चुनाव करना चाहिये जहां सामान लाने और ले जाने की आवागमन की पूर्ण सुविधा हो, जल तथा विद्युत का अच्छा प्रबंध हो, आवास के स्थान पर हवा तथा सूर्य की रोशनी की पर्याप्त सुविधा हो परन्तु तेज धूप तथा हवा के झोकों से बचने के प्रबंध हों, फार्म आबादी से कुछ दूरी पर हो, जहॉं छायादार वृक्ष हों परन्तु दूरी इतनी अधिक न हो कि क्रय-विक्रय में कठिनाई हो, जहॉं पानी न भरता हो अर्थात आवास की जगह ऊँची होनी चाहिये, जहॉं के लोग मांस और अण्डे में रूचि रखते हों, जहां पर बिक्री के लिये बाजार निकट हो, जहां से संबंधित अधिकारियों तथा पशु चिकित्सक आदि से सुगमता से संपर्क किया जा सके, जहां किसी प्रकार का सामाजिक अवरोध न हो, जहॉ फार्म के लिये निजी या कम कीमत पर जमीन उपलब्ध हो, कम जमीन होने पर दुमंजिले मकान बनाने की सुविधा हो, जहॉं कम दूरी पर ही मुर्गियों के आहार उपलब्ध हो सके, आवासीय व्यवस्था की सामग्री सुगमता से उपलबध होने वाला स्थान हो, मुर्गियों के टीके तथा दवा आदि उपलब्ध होने वाला स्थान हो, मिट्टी दोमट हो तथा हरे चारे की फसलें उगाने की सुविधा हो इत्यादि।
मुर्गियों की संख्या अनुसार उनके घरों की लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई निम्न होना चाहिये।
मुर्गियों की संख्या लंबाई मी. में चौड़ाई मी. में ऊँचाई मी. में
100 6 4.5 3
200 9 6 3
500 30 7.5 3
1000 30 9 3

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