पालक

हरी पत्तेदार सब्जियां उगाएं

भूमि:- हरी पत्तेदार सब्जियों की खेती सभी प्रकार की भूमि में आसानी से की जा सकती है किन्तु बलुई दोमट मिट्टी जिसका पी.एच.मान 6-7 एवं जल निकास की उचित व्यवस्था हो इनकी खेती के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।

उन्नत किस्में- पालक -पूसा भारती, आलग्रीन, पूसा ज्योति, पूसा हरित, जोबनेर-ग्रीन, एच. एस. 23 ।

मैथी- हिसार सोनाली, हिसार मुक्ता, पूसा अर्ली बंचि-, आर. एम.टी. -1, पूसा कसूरी।

लालसाग- पूसा लाल चौलाई, पूसा कीर्ति, पूसा किरण

सलाद पत्ता: ग्रेट लेक, चाईनीज येलो ।

प्रमुख कीट:-
थ्रिप्स/ फुदका: ये कीड़े छोटे और पीले रंग के होते हैं जो पत्तियों पर सफेद धब्बे बनाने के साथ रस चूस लेते हैं।


नियंत्रण: इनके नियंत्रण हेतु कीटनाशक दवा डाइमिथियेइट 2 मि.ली./लीटर या इमिडाक्लोप्रिड 9 मि.ली./लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
लीफ माइनर: यह कीट पत्तियों का रस चूसकर नाग के आकार की संरचना बना देता है जिससे पत्तियों की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
नियंत्रण: इसके नियंत्रण हेतु कीटनाशक दवा प्रोफेनोफॉस 2 मि.ली./ लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
प्रमुख रोग :-
आद्र्र गलन : यह रोग पौधों की प्रारंभिक अवस्था में लगता जिससे पौधे मरने लगते है। और खेत खाली होने लगता है। यह रोग भूमि एवं बीजों के माध्यम से फैलता है।
रोकथाम: बुवाई से पूर्व बीजों को फफूंदनाशक दवा बाविस्टीन ग्राम या ट्राईकोडर्मा विरडी ग्राम/कि.ग्रा बीज की दर से बीजोपचार कर बुवाई करें।
पत्ती धब्बा: इस रोग के प्रकोप से पत्तियों पर भूरे रंग के धब्बे पड़ जाते है जिससे यह सब्जियां बाजार में बेचने योग्य नहीं रह जाती है।
रोकथाम : इसके नियंत्रण हेतु फफंूदनाशक दवा मेन्कोजेब + कार्बेन्डाजिम (1+1)2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें।
पाउडरी मिल्ड्यू (छाछया) : इस रोग में पत्तियों पर सफेद चूर्णी धब्बे दिखाई देते है।


रोकथाम : घुलनशील गंधक 2 ग्रा. या डायनोकेप 48 ई.सी. एक एम. एल. प्रति ली. पानी में मिलाकर छिड़काव करें। यह आवश्यकतानुसार 10 दिन के अंतर से दोहराएं ।

खाद व उर्वरक:- बुवाई से पूर्व 100 क्वि.  अच्छी व सड़ी हुई गोबर खाद, 100 किलो ग्राम नत्रजन, 100 कि. ग्रा. फास्फोरस तथा 40 कि. ग्रा. पोटाश/हे. की दर से भूमि में मिलाकर बुवाई करें। प्रत्येक कटाई के बाद 25 कि. ग्रा. नत्रजन/हे. की दर से छिटक कर दें। इससे अधिक उपज प्राप्त होती है।

बुआई:- 

फसल कतार से कतार      की दूरी बीज से बीज       की दूरी
पालक 20 सेमी. 3-4 सेमी.
मैथी 20-25 सेमी. 3-4 सेमी.
चौलाई (छोटी) 20-25 सेमी. 4-5 सेमी.
चौलाई (बड़ी) 30-35 सेमी. 4-5 सेमी.

बुआई विधि:- बीज बुवाई के लिए सर्वप्रथम क्यारियों में खाद डालकर अच्छी तरह से मिला दें और भुरभुरी कर लें। यदि नमी न हो तो बुआई के पहले क्यारियों में पलेवा या सिंचाई कर पर्याप्त नमी बना ले। तत्प्यचात बीजों की बुवाई करें । बीज 10-15 सेमी. की दूरी पर बनी लाइनों में बोयें। आवश्यकता से अधिक पौधों को निकाल दें । पत्तियों की कटाई करते समय यह ध्यान रखें कि कटाई जमीन की सतह से 3-5 सेमी. ऊपर से ही करें।

खरपतवार नियंत्रण:-क्यारियों से खरपतवार निकालकर क्यारी सदैव साफ -सुथरी रखनी चाहिए ताकि पौधों के बढऩे में कोई असुविधा न हो। यदि आवश्यकता पड़े तो समय-समय पर हल्की निंदाई – गुड़ाई भी करते रहे। इनसे पत्तियों की पैदावार -गुणवत्ता युक्त और अधिक प्राप्त होती है। तथा कीड़ों का प्रकोप भी कम होता है।

सिंचाई:- सब्जियों की किस्म, मिट्टी की दशा व मौसम को ध्यान में रखकर समय-समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए। रोपण किये गये पौधों की अपेक्षा पुराने पौधों को अपेक्षाकृत कम सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है। वर्षा ऋतु के अधिक पानी को बाहर निकालने की भी पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। बीज की बुवाई सदैव नमीयुक्त स्थिति में करनी चाहिए। सूखे खेत में बीज की बुवाई करने या बीज की बुवाई के तुरंत बाद सिंचाई करने पर मिट्टी बैठ जाती है। और अंकुरण अच्छा नहीं होता हैं।

  हरी पत्तेदार सब्जियों की बीज दर, बुवाई का उपयुक्त समय एवं कटाई:
बीज दर /हे. बुवाई का    समय पत्तियों की कटाई                 (कि.ग्रा.)
पालक 25-30 सितम्बर-अक्टूबर
विलायती पालक 15-20 सितम्बर-अक्टूबर
मैथी (देशी) 20-25 सितम्बर-मध्य नवम्बर
मैथी (कसूरी) 10 – 15 सितम्बर-मध्य नवम्बर
चौलाई (छोटी) 2-2.5 फरवरी-मार्च
चौलाई (बड़ी) 5 – 7  जून-जुलाई                                         व फरवरी-मार्च

कटाई:- बुआई के 25-30 दिन बाद प्रथम कटाई करें, बाद में 15-20 दिन के अंतर पर कटाई करते रहे।

उपज:-

फसल उपज क्विंटल/हे. कटाई संख्या
पालक 100-150 4 – 8
मैथी 80-100 3 – 5
चौलाई 70-100 6 – 7

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