फूड प्रोसेसिंग उद्योगों के लिए प्रदेश में अनुकूल वातावरण

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भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र को बढ़ावा देने गंभीर प्रयास कर रही है। प्रदेश में उत्पादित फलों, सब्जियों और खाद्यान्नों के उचित भंडारण के लिये कोल्ड स्टोरेज खोले जाने के लिये 350 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की जा चुकी है। साथ ही इन्हें खोलने के लिये प्रोत्साहन देने 25 फीसदी सब्सिडी का प्रावधान भी किया गया है। कृषि के मामले में देश में अव्वल होने तथा फलों व सब्जियों में अग्रणी होने के चलते मध्यप्रदेश में फूड प्रोसेसिंग उद्योगों की स्थापना के लिये बहुत अनुकूल वातावरण है।
यह बात प्रदेश के कृषि एवं बागवानी मंत्री श्री सूर्यप्रकाश मीणा ने एसोसिएट चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज एसोचैम द्वारा आयोजित कृषि एवं खाद्यान्न शिखर सम्मेलन तकनीक, निवेश एवं अधोसंरचना को संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर उन्होंने एसोचैम द्वारा मध्यप्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र पर प्रकाशित एक स्मारिका का विमोचन भी किया।
एसोचैम पश्चिमी क्षेत्र की खाद्य प्रसंस्करण व लघु एवं मध्यम उद्यम इकाई के अध्यक्ष श्री धवल रावल, केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल के निदेशक डॉ. के.के. सिंह कृषि एवं वानिकी विभाग के संचालक श्री सत्यानंद सहित विभिन्न आमंत्रित विशेषज्ञों ने इस दौरान अपने विचार रखे।
सम्मेलन में राज्य एवं केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों के उच्चाधिकारियों सहित खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों, बैंकों व वित्तीय संस्थानों, मशीनरी निर्माण व तकनीक से जुड़े संस्थानों तथा शोध एवं अनुसंधान से जुड़े संस्थानों के अधिकारियों ने भाग लिया।
डॉ. के.के. सिंह ने मध्यप्रदेश में खाद्यान्न उत्पादन के इतिहास और वर्तमान परिदृश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि रिकार्ड उत्पादन के बावजूद हम अपने अनाज व अन्य खाद्यान्नों का सही इस्तेमाल फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही उन्होंने विश्व में फूड प्रोसेसिंग उद्योग की स्थिति और भारत से उसकी तुलना करते हुए कहा कि हम चीन, अमेरिका और फिलीपीन्स आदि देशों से अभी बहुत पीछे हैं।
मध्यप्रदेश कोल्ड चेन एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री हसमुख जैन ने कहा कि प्रदेश सरकार को टमाटर, प्याज, लहसुन और आलू उत्पादकों की समस्याओं पर ध्यान देना होगा।

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