कृषक दल खेती में यंत्रीकरण से प्रभावित

मुख्यमंत्री किसान विदेश अध्ययन यात्रा-स्पेन-फ्रांस
भोपाल। किसानों के हित में चलाई जा रही मुख्यमंत्री किसान विदेश अध्ययन यात्रा द्वारा राज्य के कई किसानों ने विदेशी खेती का अध्ययन कर इसे अपनाने एवं समझने की कोशिश की है। गत दिनों 9 से 20 मई 2018 तक 20 किसानों के एक दल ने स्पेन फ्रांस की यात्रा कर वहां की खेती, डेयरी एवं कृषि यंत्रों का प्रदर्शन देखा। इस दल में 20 प्रगतिशील कृषकों के अलावा वैज्ञानिक के रूप में ग्वालियर कृषि वि.वि. के मृदा एवं रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एस.के. वर्मा एवं नोडल अधिकारी के रूप में होशंगाबाद के उपसंचालक कृषि श्री जितेन्द्र सिंह शामिल थे।

फ्रांस
10 मई को कृषकों का यह दल फ्रांस पहुंचा। पूरे फ्रांस में लगभग 50 लाख कृषि फार्म है जिसमें मुख्यत: गेहूं, सरसों, मक्का, अंगूर से निर्मित शराब एवं पशुपालन होता है। मध्य फ्रांस में स्थित डिजोन शहर में रात्रि विश्राम कर दल ने चरनोव ग्राम के बकरी पालक कृषक श्री मिशैल नार्वे के फार्म को देखा। उनके पास सनिल प्रजाति की 300 बकरियां हैं जिसमें से प्रत्येक बकरी 4 लीटर दूध देती है। दूध से चीज का निर्माण कर तथा फार्म से ही बेच कर प्रतिवर्ष 5 लाख यूरो कमाते हैं तथा लागत 1400 यूरो आती है। इनका बकरी फार्म 70 हेक्टेयर का है। इसके पश्चात दल ने सम्बरसन गांव के श्री स्टीफन के 270 हेक्टेयर के डेयरी फार्म को देखा। यहां चारोलीस प्रजाति की 80 गाय हैं, 150 हेक्टेयर में चारागाह है शेष 120 हेक्टेयर में गेहूं, जौ, मटर, सरसों, ट्रिटिकेल एवं अल्फा-अल्फा की खेती होती है। डेयरी एवं खेती के सभी कार्य मशीनों द्वारा किए जाते हैं। भ्रमण दल ने अरने गांव के श्री बेनो का 120 हेक्टेयर का डेयरी फार्म भी देखा। यहां 450 हजार लीटर दूध प्रतिवर्ष होता है तथा सहकारी संस्था को बेचा जाता है। दूध की कीमत 350 यूरो प्रति टन मिलती है। तथा यूरोपीय संघ द्वारा प्रतिवर्ष कृषक परिवार को 250 यूरो प्रति हेक्टेयर प्रतिवर्ष अनुदान दिया जाता है।
भ्रमण दल ने प्रेसी गांव में लाल एवं सफेद अंगूर से शराब बनाने का कारखाना देखा। सुश्री जूली ने इस कारखाने में ही 40 से 50 हेक्टेयर में अंगूर की खेती होती है। जिसका उपयोग वह शराब बनाने में करती हैं। वह 10 से 12 हजार लीटर प्रतिवर्ष शराब का उत्पादन करती हैं। इसके पश्चात पेरिस का एफिल टावर देखकर दल 15 मई को स्पेन के बार्सिलोना पहुंचा।
स्पेन
बार्सिलोना स्पेन के कैतलुनिया प्रांत की राजधानी है यहां का मुख्य कृषि उद्योग शराब उत्पादन, गाय एवं सुअर का मांस है। भ्रमण दल ने अगले दिन बार्सिलोना से 105 कि.मी. दूर कोल्सकाबरा गांव में 1000 भेड़ों के फार्म हाऊस का अवलोकन किया। फार्म हाऊस के प्रबंधक श्री जोसेफ ने बताया कि भेड़ों को सूखी घास खिलाई जाती है। यह भेड़ें मेडिटेरिन प्रजाति की है इनसे मांस, ऊन एवं चमड़े का उत्पादन करते हैं। इनके उत्पाद का मुख्य बाजार स्पेन, इंग्लैंड और चीन है। दल ने इसके अलावा गांव इलकोल के कॉफ फार्म एवं ग्राम कलरेई के गाय फार्म को देखा। अगले दिन भ्रमण दल सहकारी संस्था मिराल केम्प पहुंचा जिसका प्रारंभ 1954 में हुआ था। यह संस्था शुष्क प्रक्षेत्र पर कार्य करती है यहां की वार्षिक वर्षा 300 मि.मी. प्रतिवर्ष है। यहां फल वृक्ष 10 प्रतिशत क्षेत्र में एवं अनाज 90 प्रतिशत क्षेत्र में उगाया जाता है। अधिकांश जैविक खेती होती है। इस सहकारी संस्था में 40 किसान भागीदार है। फसलें लगभग 9 माह में पककर तैयार होती है। 2500 हेक्टेयर किसान समूह के पास जमीन है। यहां मक्के का उत्पादन 180 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है तथा 1600 लाख किलो फल उत्पादन करते हैं। यह संस्था 50 हजार उत्तम नस्ल के सुअरों का पालन भी करती है। सुअरों का मांस बेचा जाता है। दल ने लीबर्गेस गांव में जैतून का तेल बनाने वाली सहकारी संस्था का भ्रमण भी किया। यहां 600 हेक्टेयर में जैतून के वृक्ष लगे हैं इसके बीजों से तेल निकलता है। यहां जैतून का तेल 500 यूरो प्रति लीटर बिकता है।
भ्रमण दल ने बार्सिलोना से 45 कि.मी. दूर बिल्सार में सहकारी संस्था द्वारा चलाए जा रहे फूलों के बाजार का भ्रमण किया। 350 किसान सदस्यों की यह संस्था 1983 में प्रारंभ हुई थी। 10 हजार स्क्वायर मीटर के वातानुकूलित स्थान पर किसान फूल बेचते हैं। अगले दिन बार्सिलोना के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थलों को देखकर दल स्वदेश के लिये रवाना हो गया। 20 मई को दल दिल्ली आकर फिर भोपाल पहुंचा।

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