भावांतर के भरोसे नहीं किसान – 5 में से 3 वर्ष सर्वश्रेष्ठ उत्पादकता के आंकड़े औसत फसल के लिए मान्य होंगे

भोपाल। किसान कल्याण एवं कृषि विभाग ने प्रदेश के किसानों के हित में निर्णय लिया है कि भावांतर भुगतान योजना में प्रदेश के प्रत्येक कृषि जलवायु क्षेत्र में आने वाले जिलों में से चयनित फसल के पिछले 5 वर्षों में 3 सर्वश्रेष्ठ उत्पादकता के आंकड़े के औसत वाले जिले को उक्त कृषि जलवायु क्षेत्र में आने वाले समस्त जिलों में मान्य किया जाएगा।
प्रदेश में 11 कृषि जलवायु क्षेत्र हैं। इनमें मालवा का पठार, जिसमें इंदौर, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, राजगढ़ और नीमच जिला शामिल हैं। निमाड़ के मैदानी जलवायु क्षेत्र में धार, खरगोन, बड़वानी, खण्डवा, बुरहानपुर और हरदा जिला शामिल हैं। कैमूर का पठार और सतपुड़ा की पहाडिय़ाँ, जिसमें जबलपुर, कटनी, सिवनी, पन्ना, रीवा और सतना जिला शामिल हैं। छत्तीसगढ़ का उत्तरी पठार, जिसमें मण्डला, डिण्डोरी, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर और उमरिया जिले शामिल हैं। विंध्य के पठार जलवायु क्षेत्र में सागर, दमोह, भोपाल और विदिशा जिले को शामिल किया गया है। मध्य नर्मदा घाटी में नरसिंहपुर, सीहोर, रायसेन, होशंगाबाद और गिर्द अंचल जलवायु क्षेत्र में मुरैना, श्योपुरकलां, भिण्ड, ग्वालियर और गुना जिले को शामिल किया गया है। जलवायु क्षेत्र बुंदेलखण्ड पठार में टीकमगढ़, छतरपुर, शिवपुरी, अशोकनगर और दतिया जिले, झाबुआ की पहाडिय़ों के जलवायु क्षेत्र में धार, झाबुआ और अलीराजपुर जिले को शामिल किया गया है। प्रदेश के 10वें जलवायु क्षेत्र सतपुड़ा का पठार में छिन्दवाड़ा और बैतूल जिले को शामिल किया गया है। ग्यारह कृषि जलवायु क्षेत्र छत्तीसगढ़ का पठार में प्रदेश के अकेले बालाघाट जिले को शामिल किया गया है।

मंडी सचिवों व व्यापारियों को नोटिस
राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने भावान्तर भुगतान योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही का संज्ञान लेकर दो मंडी सचिवों भोपाल के सचिव श्री विनय पटेरिया और खिलचीपुर के श्री रवीन्द्र कुमार शर्मा को नोटिस जारी किया है। इसी तरह मंडी में किसानों की फसल को मनमाने भाव पर खरीदने वाले व्यापारियों को नोटिस जारी किया है।

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