किसानों का संगठित होना आवश्यक

किसानों का देशव्यापी गांव बंद आन्दोलन का मिला-जुला असर रहा, परन्तु इसके परिणाम क्या निकलेंगे यह समय ही बतायेगा। देश के किसानों द्वारा सब्जियों, फलों व दूध की आपूर्ति यदि रोक दी गई तो अंतत: हानि किसान की ही होगी। भारत सरकार द्वारा ही नियुक्त स्वामीनाथन कमेटी की रपट को ही सरकार ने अभी तक लागू नहीं किया है। किसानों के हित में आई इस रपट को लागू करने में टालमटोल इस बात को दर्शाता है कि किसान को सरकारें अन्नदाता का दर्जा देकर उसे चने के पेड़ पर चढ़ा तो देती है परन्तु उसका मेहनताना देने में हिचकिचाती है। फलों व सब्जियां कभी-कभी खाद्यान्न फसलों का किसानों का अधिक उत्पादन का प्रयास अभिशाप बन जाता है और उन्हें उत्पाद की लागत तक नहीं मिल पाती। आशा है कि इस देशव्यापी आन्दोलन से केन्द्रीय व राज्य सरकारों का किसानों के प्रति कुछ तो रुख बदलेगा और किसानों के स्वामीनाथन के रपट के अनुसार खाद्यान्न फसलों की लागत का 50 प्रतिशत जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य निश्चित हो पायेगा। इस न्यूनतम समर्थन मूल्य निश्चित होने के बाद भी किसान के मन में शंका बनी रहती है कि उसका उत्पाद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जायेगा या नहीं, राज्य सरकारों को किसान के शत-प्रतिशत उत्पादों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में किसानों का भी दायित्व बन जाता है कि उनका उत्पाद न्यूनतम समर्थन मूल्य के मानकों पर खरा उतरे।
सरकार को सब्जियों के उत्पादक किसानों की समस्याओं के निराकरण के लिए भी कुछ करना होगा। अधिक उत्पादन की दशा में सब्जी उत्पादक किसानों को विपरण की समस्या से जूझना पड़ता है। ऐसी अवस्था में सब्जी उत्पादक क्षेत्रों को चिन्हित करना होगा और वहां विशेष सब्जी के संरक्षण व उनके उत्पाद बनाने के छोटे संयंत्र लगाने होंगे ताकि अधिक उत्पादन की दशा में इनके मूल्य वृद्धि उत्पाद बनाये जा सकें। किसानों के इस आन्दोलन से यदि पंचायत, ब्लाक, जिले, राज्य या देश के किसान संगठित हो जायें तो यह एक बड़ी उपलब्धि होगी। तब किसान अपने हितों को नजर में रखकर ठोस निर्णय लेने की स्थिति में होंगे। इससे उपभोक्ता तथा उत्पादक किसानों के बीच की दूरी भी कम होगी और बिचौलिये जो सबसे अधिक मुनाफा कमाते हैं उनको अलग-थलग किया जा सकेगा। किसानों को अपने उत्पाद के मूल्य स्वयं निश्चित करने की ओर भी शुरुआत हो सकती है तथा उपभोक्ता को भी कम मूल्य पर कृषि उत्पाद मिलने की आशा की जा सकती है। बस आवश्यकता है किसानों को अपने व्यवसाय के लिए संगठित होने की।

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