कृषि-मनरेगा के समन्वय से बढ़ेगी किसानों की आय

म.प्र. में हुआ विचार मंथन

(विशेष प्रतिनिधि)
भोपाल। कृषि में विविधीकरण, उद्यानिकी फसलों का बेहतर उत्पादन, ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई पर फोकस, एग्रो फारेस्ट्री पर जोर, फार्म विकास के लिए उचित गतिविधियां तथा पशुपालन को बढ़ावा देकर वर्ष 2022 तक किसानों की आय में वृद्धि की जा सकती है। इस आशय के सुझाव कृषि मनरेगा समन्वय पर नीति आयोग की उप समिति की भोपाल में हुई कार्यशाला में आये। कार्यशाला कृषि एवं ग्रामीण विकास द्वारा आयोजित की गई थी।

कार्यशाला में मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, दमन-द्वीव तथा छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास विभाग, कृषि विभाग, पंचायत प्रतिनिधि, किसान प्रतिनिधि, कृषक उत्पाद संस्थाओं के प्रतिनिधि और गैर-सरकारी संगठन के पदाधिकारी मौजूद थे।

तीन सत्रों में हुई कार्यशाला में पहले सत्र में एलायनमेंट ऑफ वक्र्स अंडर मनरेगा वित्त स्टेट स्पेसिफिक इंटरवेंशंस विषय पर चर्चा हुई। इस विषय पर भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव श्री अमरजीत सिन्हा, मध्यप्रदेश के अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री इकबाल सिंह बैंस, छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री पी.सी. मिश्रा एवं गुजरात ग्रामीण विकास विभाग की सचिव सुश्री मोना खन्धार ने विचार रखे।

श्री बैस ने कहा कि मनरेगा से सड़कों के लिए नहीं बल्कि फार्म की गतिविधियों के लिए राशि खर्च होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी में प्लांटेशन के लिए ड्रिप सिंचाई पर मनरेगा से राशि खर्च की जा सकती है।

दूसरा सत्र इंटरवेंशस ऑफ मनरेगा फॉर रिडक्शन इन एग्रेरियन डिस्ट्रेस एण्ड क्रिएशन ऑफ लाइवलीहुड विषय पर आधारित था। इस सत्र में कृषि मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव श्री एस.के. पटनायक, मध्यप्रदेश के प्रमुख सचिव कृषि एवं किसान कल्याण डॉ. राजेश राजौरा और कृषि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने विचार रखे।

श्री पटनायक ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में सिंचाई पर ध्यान देना जरूरी है तथा वर्षा जल संग्रहण के लिए संसाधन जुटाने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेम्बू मिशन के तहत बांस का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है जिसे काटने पर कोई रोक नहीं है।

डॉ. राजौरा ने कहा कि कृषि की लागत को कम करने के लिए विविधीकरण आवश्यक है। क्रॉप पैटर्न बदलने में मनरेगा की मुख्य भूमिका हो सकती है। इसके साथ ही एग्रो फारेस्ट्री किसानों को आय का बेहतर विकल्प दे सकती है। उन्होंने कहा कि किसान को फसल का बेहतर मूल्य कैसे मिले इस पर विचार करना जरूरी है।

राजमाता सिंधिया कृषि वि.वि. ग्वालियर के कुलपति डॉ. एस.के. राव ने कहा कि वाटर बाड़ी को मनरेगा में बढ़ाना होगा साथ ही कड़कनाथ जैसे मुर्गे की प्रजाति किसानों की आय बढ़ाने का अच्छा जरिया बन सकती है।

छत्तीसगढ़ के सचिव कृषि श्री ए.के. श्रीवास्तव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 3 जोन नार्थ, साउथ और सेन्ट्रल बनाकर किसानों को जलवायु अनुसार फसल लगाने और अच्छा उत्पादन लेने की कवायद की जा रही है जिससे उनकी आय बढ़ सके। उन्होंने कहा कि सिंचाई के स्त्रोत मनरेगा से पैदा कर सुविधा बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। मछली पालन भी किसानों की आय बढ़ाने का राज्य में अच्छा जरिया बन रहा है। मछली पालन के क्षेत्र में वृद्धि हो रही है।

कार्यशाला के तीसरे सत्र में कन्वर्जेंस ऑफ मनरेगा रिसोर्सेस एक्रॉस डिपार्टमेंट विषय पर रखा गया था। इस विषय पर नीति आयोग के सलाहकार श्री ए.के. जैन एवं ज.ने.कृ.वि.वि. के कुलपति श्री पी.के. बिसेन ने तथा विषय-विशेषज्ञों ने विचार रखे। कार्यशाला में म.प्र. के संचालक कृषि श्री मोहनलाल, संचालक अभियांत्रिकी श्री राजीव चौधरी सहित कृषि एवं पंचायत विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। कार्यशाला के अंत में मनरेगा आयुक्त श्रीमती जी.व्ही. रश्मि ने आभार व्यक्त किया।

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