मधुमक्खी से किसानों की आय बढ़ेगी

मुरैना। समन्वित मधुमक्खी पालन विकास केन्द्र परियोजना अन्तर्गत मधुमक्खी पालन एवं प्रबंधन विषय पर आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द्र-कृषि विज्ञान केन्द्र, मुरैना द्वारा गत दिवस राज्य स्तरीय क्षमता विकास प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में मध्यप्रदेश के इन्दौर, उज्जैन, देवास, सागर, नरसिंहपुर, सतना, शहडोल, श्योपुर, भिण्ड एवं मुरैना जिले के 28 ग्रामीण नवयुवकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान कीट वैज्ञानिक एवं प्रभारी मधुमक्खी पालन डॉ. अशोक सिंह यादव ने मधुमक्खी पालन-प्रबंधन, मधुमक्खी पालन हेतु उपयुक्त मौनचर, मधुमक्खियों की कृषि में उपयोगिता, मधुमक्खी पालन से प्राप्त उत्पाद व परिशोधन, गुणवत्ता परीक्षण, विपणन, स्वरोजगार निर्माण में भूमिका एवं कृषकों की आय वृद्धि में भूमिका इत्यादि की जानकारी दी। साथ ही साथ उन्होंने मधुमक्खी पालन से प्राप्त उत्पादों जैसे-शहद, मोम, प्रोपोलिस, मधुमक्खी विष, रॉयलजेली एवं परागकणों इत्यादि का व्यवसायिक एवं औषधि महत्व बताया।
आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द्र, मुरैना के सहसंचालक डॉ. एस.एस. तोमर ने प्रशिक्षणार्थियों को मधुमक्खियों की परपरागण में भूमिका तथा मधुमक्खी पालन को कृषकों एवं नवयुवकों की रोजगार के लिये आवश्यक साधन बताया। डॉ. वाय.पी. सिंह प्रमुख वैज्ञानिक ने म.प्र. में मधुमक्खी पालन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। डॉ. एस.पी. सिंह वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केन्द्र, मुरैना ने मधुमक्खी पालन तकनीकी विस्तार पर जानकारी दी।
समापन सत्र के दौरान प्रो. ए.के. सिंह कुलपति राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्व विद्यालय, ग्वालियर, मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित हुये। उन्होंने मधुमक्खी पालन को फसल परागण के लिए आवश्यक तथा कृषकों की आय का अतिरिक्त स्त्रोत बताया।
प्रो. ए.के. सिंह ने म.प्र. के विभिन्न जिलों से आये हुये प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किये। इस अवसर पर आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द्र एवं कृषि विज्ञान केन्द्र, मुरैना के समस्त वैज्ञानिक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

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