मुनाफे के फेर में अमानक उर्वरक बेचकर – किसानों को लूट रहीं नामी कंपनियां

इंडियन पोटाश, जीएसएफसी पर लगा बैन

(विशेष प्रतिनिधि)
भोपाल। प्रदेश में कृषि विभाग की सख्त कार्यवाही के बावजूद अमानक आदान बिक्री करने से कंपनियां बाज नहीं आ रही हैं। छोटी-मोटी कंपनियों की कारगुजारियां तो समझ में आती हैं परंतु जब नामी- गिरामी कंपनियाँ अमानक स्तर का उर्वरक बेचेंगी तो किसान का क्या होगा? वह किस पर भरोसा करेगा। अभी हाल ही में गुना एवं खंडवा जिले में नामी कंपनियों के अमानक उर्वरक पाए जाने पर उन्हें प्रतिबंधित किया गया है। यह कहानी सिर्फ दो जिलों की नहीं पूरे प्रदेश की है जहां धड़ल्ले से अमानक उर्वरकों की बिक्री की जा रही है।

प्रदेश में रबी सीजन अपने चरम पर है। इस स्थिति का फायदा उठाने तथा अधिक मुनाफे के चक्कर में नामी कंपनियां भी अमानक उर्वरक बेचने में पीछे नहीं है। गुना जिले में इंडियन पोटाश लि. का डीएपी 18:46 को अमानक स्तर का पाए जाने पर तथा खंडवा जिले के छैगांव माखन में जीएसएफसी बड़ोदरा का डीएपी अमानक स्तर का पाए जाने पर उसकी खरीदी, बिक्री एवं भंडारण पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह कार्यवाही दोनों जिलों के उपसंचालकों द्वारा की गई है।
अमानक डीएपी का विक्रय दलहन उत्पादन को प्रभावित कर सकता है जिससे सरकार का 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का सपना अधूरा रह सकता है क्योंकि आमदनी दोगुनी करने में दलहन उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका है तथा केंद्र एवं राज्य सरकारें भी दलहन उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। प्रदेश में इस वर्ष कम वर्षा के चलते गेहूं का रकबा कम कर दलहनी फसलों का रकबा बढ़ाया गया हैं। विशेषकर चने के रकबे में 4 लाख हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी की गई है। इन परिस्थितियों में अमानक डीएपी उत्पादन प्रभावित करने के साथ-साथ किसान की जेब भी ढीली कर रहा है। क्योंकि इसकी कीमत अधिक है। 50 किलो की बोरी 1076 रुपये में मिलती है। बाकी प्रमुख उर्वरकों के दाम कम है यूरिया की 50 किलो की बोरी 295 रु. में तथा एमओपी की 50 किलो की बोरी 577 रुपये 38 पैसे में मिलती है। इन्हें किसान एक बार झेल सकता है परंतु डीएपी जैसे महंगे उर्वरक का नकली एवं अमानक होना किसान के साथ धोखाधड़ी है। वहीं किसानों को धोखे में रखकर कालाबाजारी चालू है।
चालू रबी में प्रदेश में कुल 5 लाख टन डीएपी बांटा जाएगा तथा इस माह दिसम्बर में 50 हजार टन डीएपी बांटने का लक्ष्य है। गत माह नवम्बर रबी बुवाई की दृष्टि से महत्वपूर्ण था इसमें 2 लाख टन डीएपी बांटने का लक्ष्य था इसमें कितने किसानों को अमानक स्तर का मिला होगा यह विचारणीय प्रश्न है? अमानक स्तर का आदान उत्पादन पर असर तो डालेगा ही, साथ ही किसान की आमदनी बढऩे के बजाय लागत बढ़ेगी जो सरकार के लिए चुनावी वर्ष में शुभ संकेत नहीं होगा।

कृषि विभाग के समस्त मैदानी अधिकारियों को नकली एवं अमानक स्तर के आदानों की धरपकड़ एवं सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही किसानों से लगातार संपर्क बनाए रखने के लिये कहा गया है। प्रदेश में अमानक स्तर के आदानों का विक्रय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मोहन लाल
संचालक कृषि, म.प्र.

 

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