मछली पालन से भी हो सकती है अतिरिक्त आय

किसान की आय बढ़ाने के लिए मत्स्य पालन आय का एक अच्छा ोत हो सकता है। बहुत कम किसानों के पास मछली पालन के अपने निजी ोत हैं, परन्तु किसान आपस में मिलकर गांव के पानी के स्रोत में मछली पालन कर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं। भारत सरकार के किसान की आय वर्ष 2022 तक दुगना करने के संकल्प में भी मछली पालन अपनी भूमिका निभा सकता है। 21 नवम्बर मत्स्य पालकों के लिए एक विशेष दिन है। 21 नवम्बर 1997 को विश्व के 18 देशों के मछली उत्पादक नई दिल्ली में एकत्रित हुए थे और इस दिन को मछली पालक दिवस मनाने का निश्चय किया था। पिछले 20 वर्षों से 21 नवम्बर को विश्व मत्स्य पालन दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इस वर्ष भी नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केन्द्र, पूसा में विश्व मत्स्य पालन दिवस मनाया गया। इस अवसर पर देश के कृषि मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने मत्स्य उत्पादन के 114.1 लाख टन के पहुंचने की सूचना दी। देश अब विश्व में दूसरा सबसे अधिक मत्स्य उत्पादन करने वाला देश बन गया है। पिछले तीन वर्षों में मत्स्य पालन में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2013-14 में जहां देश में मत्स्य उत्पादन 95.72 लाख टन था वहीं यह वर्ष 2014-15 व वर्ष 2015-16 में बढ़कर क्रमश: 101.64 व 107.95 लाख टन तक पहुंच गया। पिछले 3 वर्षों में मत्स्य के कुल उत्पादन समुद्री तथा भूस्थली लगभग 18.86 प्रतिशत वृद्धि हुई है, जबकि देश के भूस्थल में मत्स्य उत्पादन में 26.00 प्रतिशत वृद्धि देखी गयी है। देश के मध्य क्षेत्र के तीन राज्यंों मध्यप्रदेश, राजस्थान तथा छत्तीसगढ़ में वर्ष 2013-14 में मत्स्य उत्पादन मात्र 0.96, 0.35 तथा 2.84 लाख टन था जो वर्ष 2015-16 में बढ़कर क्रमश: 1.15, 0.44 तथा 3.94 लाख टन तक पहुंच गया। पिछले दो वर्षों में ही मध्यप्रदेश में 19.87, राजस्थान में 26.36 तथा छत्तीसगढ़ में 11.36 प्रतिशत की वृद्धि मत्स्य पालन में देखी गई है। इन तीनंों ही राज्यंों के स्थानीय जल ोतों का उपयोग यदि मत्स्य पालन के लिए किया जाय तो इन राज्यों के मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। इसके लिए ग्राम स्तर पर सहकारी समितियां बना कर किसानंों को मत्स्य पालन के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।

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