विपणन वर्ष 2017-18 में – कपास उत्पादन में बढ़ोत्री की उम्मीद

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मुंबई। गत अक्टूबर से शुरू हुए विपणन सत्र में कपास की पैदावार 9.3 फीसदी तक बढऩे की सरकार ने संभावना जताई है लेकिन वह भी उद्योग जगत के अनुमानों से कम ही रहने के आसार हैं। केंद्रीय वस्त्र आयुक्त कविता गुुप्ता ने एक सम्मेलन में कपास की पैदावार में तेजी आने का अनुमान जताया। उन्होंने बताया कि अक्टूबर से शुरू हुए कपास सत्र 2017-18 में 3.77 करोड़ गांठों की उपज होने का अनुमान है जो पिछले सत्र के 3.45 करोड़ गांठों की तुलना में 9.3 फीसदी अधिक है।
वैसे कपास की पैदावार में इतनी बढ़ोतरी होने पर भी इसके उद्योग जगत के अनुमानों से कम ही रहने के आसार हैं। कपास उद्योग का आकलन था कि 2017-18 के दौरान 4 करोड़ गांठ का उत्पादन होगा। 170 किलोग्राम प्रत्येक गांठ। सरकार का अनुमान है कि पैदावार बेहतर रहने से उसका कपास निर्यात भी अधिक होगा। अमेरिका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपास निर्यातक भारत इस विपणन सत्र में 67 लाख गांठों का निर्यात कर सकता है।
वस्त्र आयुक्त ने कहा कि खासतौर पर महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में बालवर्म कीड़े का ज्यादा प्रकोप देखने को मिला है जिससे उपज पहले के अनुमानों से कम रहेगी।
म.प्र. में कपास
इधर म.प्र. में भी खरीफ वर्ष 2017-18 में कपास 6 लाख 3 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बोई गई है तथा उत्पादन अग्रिम अनुमान के मुताबिक 11 लाख टन होने की संभावना है। गत वर्ष खरीफ 2016-17 में 6 लाख हेक्टेयर में कपास की बोनी की गई थी। जबकि उत्पादन 9 लाख 11 हजार टन होने का अनुमान है।

कपास उत्पादन

  • इस वर्ष 3.77 करोड़ गांठों की उपज होने का अनुमान है।
  • गत वर्ष के 3.45 करोड़ गांठों की तुलना में 9.3 फीसदी अधिक।
  • भारत इस वर्ष में 67 लाख गांठों का निर्यात कर सकता है।
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