असरकारी अलसी है लाभकारी

अलसी बहुमूल्य औद्योगिक तिलहन फसल है। अलसी के बीज से निकलने वाला तेल प्राय: खाने के रूप में उपयोग में नहीं लिया जाता है बल्कि दवाइयॉ बनाई जाती हैं । इसके तेल का पेंट्स, वार्निश व स्नेहक बनाने के साथ पैड इंक तथा प्रेस प्रिंटिंग हेतु स्याही तैयार करने में उपयोग किया जाता है। अलसी के तने से उच्च गुणवत्ता वाला रेशा प्राप्त किया जाता है व रेशे से लिनेन तैयार किया जाता है। अलसी की खली दूध देने वाले जानवरों के लिये पशु आहार के रूप में उपयोग की जाती है तथा खली में विभिन्न पौध पौषक तत्वों की उचित मात्रा होने के कारण इसका उपयोग खाद के रूप में किया जाता है। अलसी के पौधे का काष्ठीय भाग तथा छोटे-छोटे रेशों का प्रयोग कागज बनाने हेतु किया जाता है।

अलसी के कम उत्पादकता के कारण अलसी के कम उत्पादकता के कारण

1. कम उपजाऊ भूमि पर खेती करना

2. असिंचित दशा अथवा वर्षा आधारित स्थिति में खेती करना

3. स्थानीय किस्मों का प्रचलन व उच्च उत्पादन देने वाली किस्मों का अभाव

4. असंतुलित एवं कम मात्रा में उर्वरकों का उपयोग

5. कीट बीमारियों हेतु उचित पौध संरक्षण के उपायों को न अपनाना ।

जलवायु

अलसी की फसल को ठंडे व शुष्क जलवायु की आवश्यकता पड़ती है। अलसी के उचित अंकुरण हेतु 25-30 डिग्री से.ग्रे. तापमान तथा बीज बनते समय तापमान 15-20 डिग्री से.ग्रे. होना चाहिए। अलसी के वृद्धि काल में भारी वर्षा व बादल छाये रहना बहुत ही हानिकारक साबित होते हैं। परिपक्वन अवस्था पर उच्च तापमान, कम नमी तथा शुष्क वातावरण की आवश्यकता होती है ।

भूमि का चुनाव

अलसी की उफसल के लिये काली भारी एवं दोमट (मटियार) मिट्टियां उपयुक्त होती हैं। अधिक उपजाऊ मृदाओं की अपेक्षा मध्यम उपजाऊ मृदायें अच्छी समझी जाती हैं। भूमि में उचित जल निकास का प्रबंध होना चाहिए ।

खेत की तैयारी 

अलसी का अच्छा अंकुरण प्राप्त करने के लिये खेत भुरभुरा एवं खरपतवार रहित होना चाहिये । अत: खेत को 2-3 बार हैरो चलाकर पाटा लगाना आवश्यक है जिससे नमी संरक्षित रह सके । अलसी का दाना छोटा एवं महीन होता है, अत: अच्छे अंकुरण हेतु खेत का भुरभुरा होना अति आवश्यक है ।

उन्नतशील प्रजातियां

जवाहर अलसी-23 , जवाहर अलसी-9 जे.एल..एस.-66,जे.एल..एस.-67, जे.एल.एस.-73

बुवाई का समय

असिंचित क्षेत्रों में अक्टूबर के प्रथम पखवाड़े में तथा सिचिंत क्षेत्रों में नवम्बर के प्रथम पखवाड़े में बुवाई करना चाहिये। उतेरा जल्दी बोनी करने पर अलसी की फसल को फली मक्खी एवं पाउडरी मिल्डयू आदि से बचाया जा सकता है ।

बीज दर एवं अंतरण

अलसी की बुवाई  25-30 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से करनी चाहिये। कतार से कतार के बीच की दूरी 30 सेमी तथा पौधे से पौधे की दूरी 5-7 सेमी रखनी चाहिये। बीज को भूमि में 2-3 सेमी की गहराई पर बोना चाहिये।

बीजोपचार

बुवाई से पूर्व बीज को कार्बेन्डाजिम की 2.5 से 3 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करना चाहिये अथवा ट्राइकोडर्मा विरीडी की 5 ग्राम मात्रा अथवा ट्राइकोडर्मा हारजिएनम की 5 ग्राम एवं कार्बोक्सिन की 2 ग्राम मात्रा से प्रति किलोग्राम बीज को उपचारित कर बुवाई करनी चाहिये।

पोषक तत्व प्रबंधन

अलसी की फसल के बेहतर उत्पादन हेतु अच्छी तरह से पकी हुई गोबर खाद 4-5 टन/हे. अन्तिम जुताई के समय खेत में अच्छी तरह से मिला देना चाहिये । मिट्टी परीक्षण अनुसार उर्वरकों का प्रयोग अधिक लाभकारी होता है। अलसी को असिंचित अवस्था में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश की क्रमश: 40:20:20 किग्रा./हे. देना चाहिये । बोने के पहले सीडड्रिल से 2-3 से.मी. की गहराई पर उर्वरकों की पूरी मात्रा देना चाहिये। सिंचित अवस्था में अलसी फसल को नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटाश की क्रमश: 60-80:40:20 कि.ग्रा./हे. देना चाहिये । नाइट्रोजन की आधी मात्रा फास्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा बोने के पहले तथा बची हुई नाईट्रोजन की मात्रा प्रथम सिंचाई के तुरन्त बाद टाप ड्रेसिंग के रूप में देना चाहिये

खरपतवार प्रबंधन

खरपतवार प्रबंधन के लिये बुवाई के 20 से 25 दिन पश्चात पहली निंदाई-गुड़ाई एवं 40-45 दिन पश्चात दूसरी निंदाई-गुड़ाई करनी चाहिये। अलसी की फसल में रसायनिक विधि से खरपतवार प्रबंधन हेतु पेंडीमिथालीन 1 किलोग्राम सक्रिय तत्व को बुवाई के पश्चात एवं अंकुरण पूर्व 500-600 लीटर पानी में मिलाकर खेत में छिड़काव करें।

जल प्रबंधन

अलसी के अच्छे उत्पादन के लिये विभिन्न क्रांतिक अवस्थाओं पर 2 सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है। यदि दो सिंचाई उपलब्ध हो तो प्रथम सिंचाई बुवाई के एक माह बाद एवं द्वितीय सिंचाई फल आने से पहले करना चाहिये। सिंचाई के साथ-साथ प्रक्षेत्र में जल निकास का भी उचित प्रबंध होना चाहिये। प्रथम एवं द्वितीय सिचाई क्रमश: 30-35 व 60 से 65 दिन की फसल अवस्था पर करें।

  • डॉ. अनिल कुमार सिंह
  • डॉ. आशीष त्रिपाठी                                                  कृषि विज्ञान केन्द्र, सागर                                          email : ashish1973_tripathi@rediffmail.com

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