ड्रिप पंजीयन बंद, किसान परेशान, सप्लायर हैरान

‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ में आया ड्रॉप
(राजेश दुबे)
भोपाल। विगत 12 वर्षों से म.प्र. उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित केन्द्र प्रवर्तित माइक्रो इरीगेशन योजना बंद है। विगत 1 माह से अधिक समय से इस योजना के लिए विभागीय पोर्टल पर अनुदान हेतु नवीन पंजीयन बंद हैं। इस योजना में जिलेवार लक्ष्य जारी होने के बाद भी नवीन पंजीयनों का दीर्घावधि तक बंद रहना कई सवालों को जन्म देता है। उद्यानिकी विभाग में शासन स्तर पर हुए बदलाव के बाद 12 वर्षों से चल रही इस किसान हितैषी योजना में अचानक क्या कमी पाई गई कि इस योजना को अचानक स्थगित कर दिया गया। यदि कोई कमी थी भी तो क्या कारण है कि 1 माह बीत जाने के बाद भी उसे दूर नहीं किया जा सका ?
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की दो फ्लैगशिप योजनाएं डिजिटल इंडिया और ‘पर ड्राप मोर क्रॉप’ मध्यप्रदेश में तीव्र गति से न चलकर वीरगति को प्राप्त हो रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश में राजगढ़ जिले के मोहनपुरा सिंचाई परियोजना का लोकार्पण करते हुए कहा कि भारत सरकार माइक्रो इरीगेशन को बढ़ावा देगी। मध्यप्रदेश में माइक्रो इरीगेशन के क्षेत्र में हो रही प्रगति की भी उन्होंने प्रशंसा की। परंतु शायद उन्हें पता नहीं था कि म.प्र. में ही केंद्र की महत्वाकांक्षी माइक्रो इरीगेशन योजना को राज्य शासन किस तरह नेस्तनाबूद करने में जुटा है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस योजना को डीबीटी के तहत लाने के प्रयास किये जा रहे हैं। परंतु सरकार को शायद यह जानकारी नहीं है कि ड्रिप सिंचाई एक महंगा संसाधन है। किसान इसकी संपूर्ण लागत एकमुश्त जमा नहीं कर सकता है। इसी कारण प्रदायक कम्पनियां अपने स्तर पर किसान को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है और शासन अनुदान का भुगतान प्रदायक कम्पनियों को करता है।

केन्द्र प्रवर्तित यह योजना अपने प्रारंभ काल से ही विवादों में रही है लेकिन समयानुसार इसमें आ रही विसंगतियों का निराकरण करते हुए यह योजना मैनुअल से डिजिटल तक पहुंच चुकी है। इस योजना के अंतर्गत प्रति वर्ष की तरह वर्ष 2018-19 के लिये जिलेवार लक्ष्य भी उद्यानिकी विभाग ने जारी कर दिये हैं। इस वर्ष इस योजना में प्रदेश में 79 लाख 50 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में ड्रिप व स्प्रिंकलर पर अनुदान देने का लक्ष्य है। परंतु शासन द्वारा नवीन पंजीकरण बंद कर देने से किसान परेशान है तो प्रदायक कम्पनियां हैरान हैं कि वित्तीय वर्ष की प्रथम तिमाही समाप्त होने को है और अभी तक नवीन पंजीकरण नहीं हो पाये हैं। ऐसे में लक्ष्य की पूर्ति कैसे संभव हो पायेगी? तकनीकी रूप से भी वर्षा काल में मैदानी स्तर पर कार्य करना संभव नहीं होता है। यदि वर्षाकाल में कार्यादेश जारी भी होते हैं तो निर्धारित समय सीमा में कार्य पूर्ण कैसे होगा?
हालांकि सूत्रों एवं योजना से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना में आनन-फानन में डीबीटी लागू करने और उसके हर स्तर पर विरोध के बाद सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे की तर्ज पर डीबीटी वापिस लेने का रास्ता ढूंढने के चक्कर में फिलहाल योजना पर ही तालाबंदी कर दी गई है। एक संभावना यह भी व्यक्त की जा रही है कि भावान्तर भुगतान आदि योजनाओं के चलते राज्य सरकार पर आर्थिक दबाव है। इस योजना में भी राज्य शासन को अनुदान राशि में लगभग 40 प्रतिशत राज्यांश मिलाना पड़ता है। यदि योजना प्रारंभ होने में विलंब होता है तो राज्य सरकार को उतने समय राज्यांश से राहत मिलेगी। कारण चाहे जो भी हो लेकिन शासन को चाहिए कि इस दिशा में शीघ्र निर्णय लें ताकि प्रदेश का किसान समय रहते इस योजना का लाभ ले सके।

          डीबीटी के चक्कर में अनुदान  योजना लटकी
योजना में अनुदान का सिस्टम
योजना में यंत्र – ड्रिप एवं स्प्रिंकलर
पात्र – सभी वर्ग के कृषक
अनुदान राशि – लागत का 55 से 65 प्रतिशत
पंजीयन – ऑन लाइन आधार कार्ड के साथ
किनसे मिलेगा – विभाग से रजिस्टर्ड कंपनियां
अनुदान के विकल्प
1. पूर्ण राशि भुगतान कर अनुदान किसान के खाते में
2. ऋण लेने पर अनुदान ऋणी किसान के बैंक खाते में
3. केवल कृषक अंश देने पर अनुदान कंपनी खाते मेंवर्ष 2018-19 में विकल्प (3) को समाप्त कर दिया गया है|
इनका कहना है

ई-पोर्टल के संबंध में प्रमुख सचिव के निर्देशन में एक समिति का गठन किया गया है जिसकी पहली बैठक हो गई है, दूसरी बैठक 3 जुलाई को होगी। पोर्टल पर केवल प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का सेक्शन बंद है, शेष सभी चालू है। इस योजना के अपडेशन के बाद पोर्टल शीघ्र प्रारंभ होगा।
– सत्यानंद
आयुक्त सह-उद्यानिकी संचालक (म.प्र.)
ई पोर्टल के संबंध में विचार किया गया है परन्तु अभी कोई निर्णय नहीं हो सका है। उद्यानिकी विभाग के पोर्टल पर चर्चा की जा रही है। अभियांत्रिकी के पोर्टल पर कोई परेशानी नहीं है। पुन: लक्ष्य प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।

 

– राजीव चौधरी
संचालक कृषि अभियांत्रिकी (म.प्र.)
कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के पोर्टल को एक करने पर विचार किया जा रहा है। जिससे किसान को असमंजस की स्थिति का सामना न करना पड़े। बड़े कृषि यंत्रों के लिए कृषि अभियांत्रिकी, ड्रिप को छोड़कर शेष माईक्रो इरीगेशन यंत्रों के लिए कृषि विभाग एवं ड्रिप के लिए उद्यानिकी विभाग को जिम्मेदारी दी जा सकती है। समिति इस पर विचार कर रही है।
– बी.एम. सहारे
अपर संचालक कृषि (म.प्र.)

www.krishakjagat.org
Share