आम के महानायक दीपक भाई

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नवसारी। केसर, जम्बोकेसर, हापुस, लंगड़ा, दशेरी, राजापुरी, तोतापुरी जी हाँ आपने सही पहचाना यह वेरायटी आम की है, इन प्रजातियों के 3200 वृक्ष 125 बीघा भूमि पर देखने के लिए आपको नवसारी के नजदीक ग्राम काछीया बाड़ी में आना पड़ेगा।
बचपन में खेती जीवनयापन का साधन होते देख खेती में परिवर्तन के जुनून ने आम फसल के प्रति लगाव पैदा कर दिया इसका परिणाम यह निकला कि आम फसल जीवनयापन के अलावा उद्योग की तरह हो गई। यह सब सच कर दिखाया श्री दीपक भाई भवन भाई पटेल ने। 46 वर्षीय श्री पटेल को विरासत में 20 बीघा भूमि मिली थी। जब से आम की खेती में लाभ कमाया तो आज इनकी जमीन 65 बीघा हो गई एवं 70 बीघा लीज पर ले रखी है।
5 वर्षों में फसल देने वाला आम 100 वर्षों तक फल देता है। श्री पटेल ने विभिन्न कृषि अनुसंधान का भ्रमण कर सन् 2005 में 1 हजार पेड़ आम के 20 बीघा भूमि पर लगाये, साथ ही अंतरवर्तीय खेती के रूप में सब्जी उत्पादन करते रहे। 5 वर्ष के बाद आम में अधिक फायदा देख पूरा ध्यान इस खेती पर लगा दिया। धीरे-धीरे वृक्ष लगाने से आम के 2000 पेड़ों से 2 लाख किलो आम की पैदावार हुई जिसको 25 रु. प्रति किलो से बाजार में विक्रय कर 55 लाख की आमदनी हुई। अनुमानित 10 लाख खर्च कर शुद्ध लाभ 45 लाख का हुआ। श्री दीपक पटेल ने 250 वृक्ष चीकू, केला, टिश्यू कल्चर, हल्दी, सूरन, सब्जी- भाजी एवं मेड़ पर नारियल वृक्ष भी लगाए हैं। गुजरात में आत्मा योजना अंतर्गत वेस्ट फार्मर अवॉर्ड सहित 19 अवॉर्ड आम उत्पादन में मिले हैं। उन्होंने आम बगीचों में जैविक खाद का भी प्रयोग किया। नवसारी विश्व विद्यालय, जिला कृषि विभाग के अलावा जलगांव, नाशिक, नई दिल्ली, उदयपुर, जयपुर, बैंगलोर आदि स्थानों पर जाकर तकनीकी ज्ञान आम उत्पादन में सहायक बना। नवसारी स्थित सहकारी फेडरेशन ने आम खरीदी कर कृषकों को आम का अच्छा दाम दिलाना भी श्री पटेल की सफलता का रास्ता बना।
आम की अन्य जानकारी श्री दीपक पटेल के मो.: 9824890290 पर ले सकते हैं।

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