पॉली हाउस में खीरा उत्पादन

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सामान्यतया: खीरे की प्रचलित किस्में कम पसंद की जाती है, क्योंकि इन किस्मों में कभी – कभी कड़वापन होता है, साथ ही इनका छिलका कठोर होता है एवं बहुतायात में बीज होने की वजह से स्वाद बहुत अच्छा नहीं होता है, लेकिन खीरे की आधुनिक किस्में जो बीज रहित होने के साथ-साथ स्वाद में भी भरपूर होने की वजह से इनकी लोकप्रियता दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। खीरा मुख्यतया: गर्म मौसम की फसल है लेकिन पॉली हाउस में खीरा की सफल खेती सालभर की जा सकती है। खीरा की उत्पादन तकनीक इस प्रकार है।
उन्नत किस्में :- सेटिश, कियान, इनफाइनीटी, हिल्टन, मल्टिस्टार, डायनेमिक, काफ्का आदि।
तापमान एवं आद्र्रता :- खीरा गर्म मौसम की फसल हो खुले वातावरण में इसकी खेती फरवरी-मार्च से लेकर सितम्बर तक की जा सकती है। संरक्षित वातावरण में खीरे की खेती सालभर की जा सकती है इसके अंकुरण के लिये 20 सेन्टीग्रेड तापमान उपयुक्त रहता है तथा पौधों के वृद्धि एवं विकास के लिये 22 से 30 से. ग्रे. तापमान ठीक रहता है। आपेक्षिक आद्र्रता 70-80 प्रतिशत उपयुक्त रहती है।
नर्सरी तैयार करना – सामान्यतया: खीरे की सीधी बुवाई की जाती है, परंतु पॉली हाउस में फसल सघनता बढ़ाने के लिये पो. ट्रे में पौध की तैयारी की जाती है, जिससे कम समय में पौधे फलने लग जाते है एवं पॉली हाउस का सदुपयोग हो जाता है।

संरक्षित वातावरण में उगायी जाने वाली अधिक मुख्य एवं कीमती सब्जियों में खीरा का विशेष स्थान है, क्योंकि पॉली हाउस में उगायी जाने वाली प्रचलित सब्जियों में सिर्फ खीरा ही एकमात्र फसल है जो कम समय में तैयार हो जाती है एवं आय का एक बहुत अच्छा जरिया साबित होती है। एक वर्ष में खीरा की तीन फसल ली जा सकती है एवं आय की दृष्टि से भी अन्य फसलों से श्रेष्ठ है। ककड़ी अथवा खीरा के अपरिपक्व एवं पूर्ण विकसित फल सलाद, सब्जी एवं अचार के रूप में उपयोग किये जाते हैं ।

नर्सरी तैयार करने के लिए पहले प्रो – ट्रे का निर्जमीकरण किया जाता है एवं कोकोपिट, वर्मीकुलाईट एवं परलाइट का 2:1:1 के हिसाब से तैयार मिश्रण प्रो-ट्रे में भरा जाता है। प्रति कोष्ठिका एक बीज बोया जाता है। तत्पश्चात् प्रतिदिन झारे की सहायता से पानी दिया जाता है। खीरा की पौध मौसम के अनुसार 12-15 दिन में तैयार हो जाती है जब पौधे में बीज पत्रों के अलावा दो पत्तियाँ आ जाती है, तब पौधा स्थानांतरण योग्य माना जाता है।
क्यारियाँ तैयार करना एवं रोपाई करना :- नर्सरी तैयार होने से पहले पॉली हाउस में क्यारियाँ बना लेनी चाहिए। क्यारियों की ऊंचाई 30 से.मी., चौड़ाई एक मीटर एवं लम्बाई पॉली हाउस के आकार के अनुसार रखी जाती है। दो बेड के बीच में 60 सेमी पाथ रखा जाना चाहिए।
पौधों की ट्रेनिंग एवं कृन्तन :- अन्य कद्दूवर्गीय फसलों की तरह खीरा भी रेंगने वाली लताएं होती है एवं पौधों की वृद्धि के साथ-साथ सहारा नहीं मिलने पर फैलने लगते है। पौधा रोपण के 15 दिन बाद पौधे से धागाकार संरचनाएं निकलती है इस समय पौधे को सहारा आवश्यक होता है। अत: धागे लटकने से पहले पौधे को सुतली की सहायता से ऊपर की ओर सहारा दिया जाता है। पौधों की वृद्धि शीघ्र होती है इसलिए सप्ताह में दो बार पौधे की ट्रेनिंग करनी चाहिए। मुख्य तने से निकलने वाली फूटानों एवं पुरानी पत्तियों को भी समय-समय पर हटाते रहना चाहिए।
तुड़ाई एवं उपज:- पौधारोपण के 30-35 दिन बाद पहली तुड़ाई की जाती है, तत्पश्चात अगले 60 दिन लगातार तुड़ाई की जा सकती है। प्रति पौधा 20-25 फल लगते हैं। जिनका वजन लगभग 4 किलो होता है। इस प्रकार प्रति 1000 मीटर क्षेत्र से लगभग 100 क्विंटल उत्पादन हो जाता है।

  • श्रवण कुमार
  • रामनारायण कुम्हार
    email : rknarayan19@gmail.com
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