हाईटेक खेती से लाखों कमा रहे चंदर सिंह परमार

(श्रवण मीणा)

शाजापुर। चंदर सिंह परमार ने इस वर्ष 2 एकड़ में बने नेट/पाली हाऊस में हाईटेक मल्चिंग ड्रिप पद्धति से शिमला मिर्च लगाई। इसका उत्पादन खर्च 3 लाख रुपये आया, 1 एकड़ में 400 क्विंटल शिमला मिर्च का उत्पादन हुआ जो 2 हजार रुपये प्रति क्विंटल के भाव से मंडी में बिकी। 8 लाख रुपये मिले। इस प्रकार शिमला मिर्च से लगभग 5 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ और यही तकनीक से 1 एकड़ में खीरा, ककड़ी का उत्पादन लिया गया। उत्पादन पर एक लाख पच्चीस हजार रुपये खर्च हुआ और फसल लगभग 400 क्विंटल हुई। जो 1500 रु. प्रति क्विंटल के भाव से बेची गई। 6 लाख रुपये कीमत मिलने के साथ खीरा उत्पादन पर 4.75 चार लाख पच्चहत्तर रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।

तालाब बनाया
श्री परमार ने अपने फार्म हाऊस में एक तालाब का भी निर्माण किया है। जिसकी 180 फीट लम्बाई, 90 फिट चौड़ाई और 18 फिट गहराई है। इसको तैयार करने में उन्हें लगभग 5 लाख 50 हजार रुपये का खर्च आया उद्यानिकी विभाग से अनुदान लगभग सवा लाख रु. मिला है। सिंचाई को ध्यान में रखते हुए 2 एकड़ में बने नेट पॉली हाऊस में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया। जिससे वर्षा जल को सीधे तालाब में उतारा गया। इससे तालाब की भरण क्षमता पूर्ण हो जायेगी और आगामी रबी सीजन में लगभग 10-11 एकड़ भूमि की सिंचाई ड्रिप पद्धति से आसानी से की जा सकती है। श्री परमार कृषि एवं उद्यानिकी से जुड़ी सभी योजनाओं का लाभ बखूबी ले रहे हैं चाहे वह भारत सरकार की हो या म.प्र. शासन की योजना हो।
25 वर्ष के लिये बिजली का बंदोबस्त किया
इसी प्रकार मुख्यमंत्री सोलर पंप योजना का लाभ भी श्री परमार द्वारा लिया गया। योजना में 5 एच.पी. डी.सी. सबमर्सिबल पंप की लागत 4,53,000 आई। 85 प्रतिशत अनुदान 385,000 काटकर हितग्राही कृषक अंश 680,00 जमा कर योजना का लाभ लिया एवं सोलर ऊर्जा से बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की। सोलर प्लेट से बिजली पैदा कर प्रगतिशील किसान ने बिजली कटौती और दूरस्थ क्षेत्र में बिजली लाईन और ट्रांसफार्मर जलने जैसी समस्याओं से मुक्ति पाई। सोलर प्लेट से 300 वॉट बिजली पैदा होती है। पांच हार्स पावर की मोटर से 8 से 9 घंटे लगातार पानी लेने के लिये श्री परमार ने 16 प्लेट की इकाई लगाई है। एक इकाई से 4800 वॉट बिजली मिलती है। एक बार सोलर इकाई लगाने के बाद 25 वर्ष तक निर्वाध बिजली मिलेगी। जिससे लगभग 5-6 एकड़ की सिंचाई आसानी से की जा सकती है।
फल बगीचे में बहार
श्री परमार ने अपने फार्म हाऊस में 1 एकड़ भूमि में सीताफल ए.एम.एच-1 किस्म का बगीचा भी लगा रखा है और 1 एकड़ में अमरूद एल-49 लखनऊ की प्रजाति भी लगाई। इसमें पौधे से पौधे की दूरी 6 फिट एवं कतार से कतार की दूरी 10 फिट रखी गयी। बगीचे में इस बार सीताफल और अमरूद के फलों की भरपूर मात्रा में उत्पादन आने की संभावना है। सीताफल, अमरूद के बगीचे अंतरवर्तीय फसल के रूप में सोयाबीन की फसल लगी है और रबी में चना और प्याज की फसल का उत्पादन अच्छी मात्रा में प्राप्त करते है। शेष 8 एकड़ में सोयाबीन फसल बीज किस्म जे.एस. 95-60, जे.एस.2029, 2069, आर.व्ही.एस.2001-4 लगाई है। फसल लगभग 40 दिन की हो गई। इसमें एक बार खरपतवार एवं कीटनाशक का भी छिड़काव किया गया है। मौसम की इसी प्रकार अनुकूलता रही तो सभी फसलों से अच्छा उत्पादन आने की संभावना है। पटलावदा गांव मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले के शुजालपुर विकासखंड में आता है और क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्री एस.के. पवैया मो. : 9926428022 पर अपने आवंटित 18 गांव के कृषकों के निरंतर सम्पर्क में रहते है। और विभाग की सभी योजनाओं की विस्तारपूर्वक जानकारी अपने किसान भाईयों तक पहुंचाते है। विस्तारपूर्वक जानकारी के लिये पाठकगण कृषक श्री चंदर सिंह परमार के मोबाइल नं. 9826788847 पर सम्पर्क कर सकते हैं।

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