आर्थिक मुनाफे के लिए बकरे की देखभाल

www.krishakjagat.org

मेमनों का चुनाव
नर मेमने जिनकी उम्र तीन माह है उनका चुनाव करें। जन्म के समय उनका शरीर भार 3 से 4 किलो का हो तो सामान्यत: उनकी बढ़वार शरीर भार वृद्धि दर अच्छी रहती है। रोजाना कम से कम 100 ग्राम वजन वृद्धि होना अच्छा माना जाता है। मेमने हष्ट-पुष्ट, निरोगी होने चाहिये। उनकी ऊंचाई, लंबाई अच्छी खासी होनी चाहिये। उनके पैर तथा खुर समान तथा मजबूत होने चाहिये। शरीर चमकदार तथा कांतिमान होनी चाहिये।
नस्ल
मांस उत्पादन हेतु मारवाड़ी, कच्छी, उस्मानाबादी सिरोही, ब्लॉक बंगाल आदि नस्लों के नर मेमने अच्छे माने जाते हैं क्योंकि इनका मांस स्वादिष्ट होता है।
मेमनों का प्रबंधन
पैदा होने के पश्चात मेमनों को खीस पिलाना अत्यावश्यक है। तथा उनका नाभी सूत्र उनके शरीर से 1 से डेढ़ इंच दूरी पर जंतु नाशक द्रव में धागा डुबोकर उससे कसकर बांध दें और निचला हिस्सा ब्लेड से काट दें। वहां 2-4 दिन तक दवा लगाते रहें। अगर आप मेमने बाहर से खरीदकर लाये हैं तो उन्हें अलग रखें। उन्हे ‘तनावÓ कम करने हेतु ताजा छाछ में चुटकीभर पिसी हल्दी मिलाकर पिलावें। उन्हें हर चारा उपलब्ध करायें अगर बरसीम या ल्यूसर्न जैसे फलीधारी वनस्पति चारे खिलावें तो उनकी बढ़वार अच्छी होगी। वे 2-3 दिन में नई जगह में ठीक से रहने लगेंगे। उन्हें पहचान हेतु नंबर प्लेट लगवायें इससे कई लाभ होते हैं।
आरोग्य प्रबंधन
उन्हें खुरपका मुंहपका, गलघोंटू लंगड़ा रोग, जहरी बुखार , पीवीआर आदि से बचाव के लिए रोगविरोधी टीके लगवायें। उन्हें पेट के कीड़े मारने की दवा अलबेडॅझॉल पिलावें। उनको खस्सी करवायें ताकि उनके द्वारा ग्रहण किये चारे से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग उनके शरीरभार बढऩे तथा मांस वृद्धि में हो। उनके शरीर पर रोजाना ब्रश करें ताकि चकड़ी में रक्ताथिसरण तथा लसिका ग्रंथी से स्त्रवित लसिका रस का अभिसरण अच्छा हो, चमड़ी से ढीले बाल और धूल निकल जाये और साथ ही बाह्य परजीवी जैसे जुएं और किसनी निकल जायें।
मेमनों का पोष प्रबंधन
मेमनों के आहार में विविधता जरूरी हैं उनके आहार में हरा चारा सूखा चारा दोनों होने चाहिये। उन्हें रोजाना कम से कम आधा पाव खुराक खिलावें। वयस्क बकरों को 340 से 440 ग्राम खुराक खिलावें। उन्हें खनिज मिश्रण खिलावें या बाड़े में खनिज र्इंट चाटने हेतु टांगकर रखें। उनको पीने के लिये ताजा साफ पानी उपलब्ध करावें।
मेमनों के लिये आवास
मेमनों का आवास (बाड़ा) पर्याप्त बड़ा, हवादार, प्रकाशमान व ऊंचाई पर सूखी जगह होना चाहिये।
बाड़े का छत घांस-फूस का या कवेलू या सीमेंट की चादरों से बना होना चाहिये न ज्यादा जो ठंडे रहें और न ज्यादा गर्म हों। आंगन में लकड़ी के कुछ ठूंठ रख सकते हैं जिन पर वे उछल कूद कर सकें।
महिने दो महिने में बाड़े में डेल्टामेथ्रिन दवा का 4 से 5 प्रतिशत सान्द्र घोल का छिड़काव करें ताकि किलनी तथा बाह्य जीवियों का नाश हो। बाड़े में सीलन, गीलापन, कीचड़ नहीं होना चाहिये। जहां गीलापन हो वहां सूखा मुरम डाल दें। बाड़े के चारों ओर जाली (क्रिंपलड वायर जाली/वोव्हन वायर मेश) लगायें ताकि बिल्लियां , कुत्ते, कौवे आदि मेमनों को तकलीफ न पहुंचाएं।
मेमनों का हर महिने में एक बार और हो सके तो पंद्रह दिनों में एक बार शरीर भार नापें। यह वह 1 वर्ष की उम्र तक पहुंचने तक नापें। इससे हमें ज्ञात होता है कि मेमने का शरीरभार सही बढ़ रहा है या नहीं? वैसे 3 माह की उम्र में उनका शरीर भार 15 किलो, 6 माह में 20 किलो, 9 माह में 25 किलो तथा 1 वर्ष की आयु में 30 किलो होना चाहिये तभी उनसे अच्छा मांस प्राप्त होगा। मेमनों की देखभाल करते समय हर बात का लेखा-जोखा रखें। इससे यह व्यवसाय फायदे में चल रहा है या नहीं यह पता लगेगा।
विपणन
बकरों को पहले कुर्बानी के लिये बेचने का प्रयास करें। फिर बकरी फार्म हेतु इच्छुक लोगों को बेचें। अंत में बचे हुये बकरे खुले बाजार में बेचें तभी अच्छा ज्यादा मुनाफा मिलेगा। इस प्रकार सुयोग्य ढंग से नर बकरे का प्रबंधन तथा विपणन करें तो मुनाफा ज्यादा मिलेगा।

FacebooktwitterFacebooktwitter
www.krishakjagat.org
Share