बीटी कपास

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बीज के चयन में

  • बीटी किस्म/संकर का चुनाव क्षेत्र एवंं भूमि के अनुरूप करें।
  • बीज अधिकृत विक्रेता से ही खरीदें।
  • बीज क्रय रसीद या बिल आवश्यक रूप से लें।
    बुवाई समय
  • रिफ्यूजिया कतारें आवश्यक रूप से लगायें।
  • बीटी बीज के साथ मिलने वाले नान बीटी बीज को मिलाकर न बोयें।
  • वर्षा आधारित कपास को भूमि में 5 से 6 इंच गहराई तक नमी होने पर ही लगायें।
    उर्वरक/खाद
  • मिट्टी परीक्षण की सिफारिश के अनुसार डालें। सामान्य तौर पर 326 किलो यूरिया, 450 किलो एसएसपी तथा 65 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति हेक्टेयर दें।
  • डीएपी 2 प्रतिशत या यूरिया 1 से 2 प्रतिशत या पोटेशियम नाइट्रेट 2 प्रतिशत का छिड़काव फूल एवं डेन्डूओं के विकास की अवस्था पर करें।
  • यूरिया की 50 प्रतिशत मात्रा बुवाई के समय तथा 25-25 प्रतिशत मात्रा 30 एवं 60 दिन बाद प्रयोग करें।
  • कपास फसल में एजेटोबेक्टर एवं पीएसबी कल्चर का प्रयोग पोषक तत्वों के प्रबंधन हेतु करें।
  • सूक्ष्म पोषक तत्वों या द्वितीयक पोषक तत्वों (मेग्रीशियम सल्फेट 0.5 से 1 प्रतिशत या बोरान) का छिड़काव करें।
    कीट नियंत्रण
  • बीटी कपास में रस चूसक कीटों के साथ अनेक मित्र कीट भी होते हंै। उनका बचाव कर उनसे पूर्ण लाभ लें।
  • आवश्यक होने पर लाभदायक कीटों को हानि न पहुंचाने वाले कीटनाशकों का ही प्रयोग करें।
  • पक्षियों के लिए आश्रय स्थल (बर्ड पर्चर) स्थापित करें।
  • आरंभिक अवस्था में चूसक कीटों के नियंत्रण के लिए नीम आधारित कीटनाशकों का उपयोग करें।
  • कीटों के आर्थिक क्षतिस्तर को ध्यान में रखकर सिफारिश किए गए कीटनाशकों का बताई मात्रा में उपयोग करें।
  • लगातार एक ही कीटनाशक का दोहराव न करें। यथा संभव अदल-बदल कर दवाओं का उपयोग करें।
  • सफेद मक्खी की मॉनीटरिंग हेतु पीले चिपचिपे प्रपंच स्थापित करें।
    रोग नियंत्रण
  • जीवाणु झुलसा का प्रकोप होने पर कॉपर आक्ॅसीक्लोराइड एवं स्ट्रेप्टोसाईक्लिन का छिड़काव करें।
  • नया उकठा (न्यू विल्ट) या पौधों को सूखने की समस्या के लिए पोषक तत्वों एवंं सिंचाई का उचित प्रबंधन करें।
  • ग्रे मिल्ड्यू की रोकथाम के लिए घुलनशील गंधक का छिड़काव करें।
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