बैंगन की इल्ली का इलाज

पन्ना। कृषि विज्ञान केन्द्र पन्ना के डॉ. बी. एस. किरार वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख एवं डॉ. आर. के. जायसवाल वैज्ञानिक द्वारा ग्राम सिंहपुर, प्रतापपुर, खोरा, नयागांव में विगत दिवस भ्रमण किया गया। भ्रमण के दौरान सब्जी उत्पादक रामप्रसाद साहू, कौशल किशोर मिस्त्री,एवं रामलगन पाल आदि कृषकों के खेतों पर बैंगन में कीट व्याधियों से ग्रसित पौधों का अवलोकन कर उन्हें कीड़े एवं बीमारियों के नाम से अवगत कराया गया। बैंगन का लघुपत्र रोग एक घातक एवं प्रमुख बीमारी है। इस रोग से ग्रसित पौधे में फूल और फल नहीं आते हैं। रोगग्रस्त पत्तियां अत्यधिक छोटी एवं समूह में दिखाई देती हैं। इसके नियंत्रण के लिए पौधे को लगाने से पहले कार्बोफ्यूरान 2 ग्राम/ली. पानी या थायोमिथाक्जाम 3 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल में 24 घंटे डुबोकर लगायें और खड़ी फसल में मेटासिस्टाक्स 1 मिली./ली. पानी या इमिडाक्लोरोप्रिड 0.5 मिली. प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर छिड़काव करें। बैंगन के कुछ पौधों में पत्ती धब्बा एवं फल गलन की समस्या देखी गई।इसके नियंत्रण हेतु मेंकोजेब 3 ग्राम या कार्बेन्डाजिम 1 ग्राम प्रति ली. पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
बैंगन में तना छेदक एवं फलभेदक से ग्रसित पौधे भी देखे गये। जिससे शाखा मुरझाकर लटक जाती है और बाद में सूख जाती है। फल लगने पर इल्ली ठंडल के पास से फल के अन्दर चली जाती है और फल के गूदे को खाती है। जिससे गूदा खराब हो जाता है और फल टेडे मेढ़े हो जाते हैं। इसके नियंत्रण हेतु क्विनालफॉस 20  साइपरमेथ्रिन 3 प्रतिशत ई.सी. 200 मिली या 4 साईपरमेथ्रिन 25 प्रतिशत ई.सी. 60-70 मिली/एकड़ की दर से 200 लीटर पानी मेें घोल बनाकर छिड़काव करें।

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