बिफरे बिसेन V/s भुक्तभोगी भगत बीज ने किया बवाल

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(विशेष प्रतिनिधि)
भोपाल। प्रदेश में किसान आंदोलन के चलते कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन खबरों में बने रहने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं। वैसे तो सत्तारूढ़ दल भाजपा के अन्य मंत्री, विधायक भी विभिन्न वाकचातुर्य का प्रदर्शन कर रहे हैं। ताजा मामला कृषि मंत्री बिसेन और सांसद बोधसिंह भगत के मध्य है, जिसमें मंच पर माइक के सामने दोनों के मध्य असांस्कृतिक वचनों का आदान-प्रदान हुआ। सार्वजनिक रूप से दोनों के मध्य असंस्कारित, अमर्यादित टिप्पणियों, पदवियों का थोपा-रोपण हुआ और एक-दूसरे के चरित्र, चाल और चेहरे की गुप्त ढंकी-छुपी बातें आवाम को पता चली। चेहरा देखकर चरण चूमने वाली निर्दोष, नादान, नाशुक्री जनता को पता चल गया कि मंच पर ये शुभ्रवसन, रंगीन परिधान वाले पात्र भी इस हमाम में दिगम्बरी अवस्था में हैं। इन दोनों महारथियों के झगड़े की जड़ में वर्चस्व का संघर्ष, प्रभुता का मद और यशोदा का बीज है। आखिर क्या है यशोदा का बीज?

जानकारी के मुताबिक मंत्री एवं सांसद के मध्य हुई बहस के गर्भ में एक बीज कंपनी का होना बताया जा रहा है। यह बीज कंपनी हिंगण घाट वर्धा महाराष्ट्र की यशोदा बीज कंपनी है जो बालाघाट जिले में धड़ल्ले से बीज बेच रही है जबकि वर्ष 2016 में जिला प्रशासन ने सासंद की शिकायत पर इसे ब्लैकलिस्टेड किया था। इसके बाद कंपनी ने जबलपुर संयुक्त संचालक कृषि के यहांं अपील की थी कि उसे बहाल किया जाए। यहां कृषि मंत्री बिसेन पर आरोप है कि उन्होंने हस्तक्षेप कर उक्त कंपनी पर लगा प्रतिबंध हटवाया है। प्रतिबंध हटते ही उक्त बीज कंपनी फिर से बीज बेच रही है।
जानकारी के मुताबिक इस बात को लेकर लगभग एक वर्ष से मंत्री एवं सांसद के मध्य टकराव चल रहा है जो गत दिनों एक बार फिर उभर कर जनता के सामने आया।
ज्ञातव्य है कि मलाजखंड में आयोजित सबका साथ सबका विकास सम्मेलन में मंच पर ही मंत्री बिसेन एवं सांसद भगत में तीखी नोंक-झोंक हुई। सांसद ने मंच से बीज कंपनी पर प्रतिबंध का मामला उठाया तो मंत्री भी उखड़ गए। मंत्री ने कहा बहुत देेखे हैं ऐसे सांसद तो सांसद ने मंत्री को चोर कह दिया। जिससे नाराज होकर मंत्री बिसेन मंच छोड़कर चले गए।
बहरहाल मामला जो भी हो, परन्तु सरकार को यह देखना है कि दो महारथियों की लड़ाई में बेबस किसान का नुकसान न हो, उसे गुणवत्ता युक्त बीज उपलब्ध हो जिससे उत्पादन बढ़ सके।

श्री बोधसिंह भगत लोकसभा सांसद ने कृषक जगत को बताया कि यशोदा सीड्स द्वारा जिले में धान की जयश्री, आरपीएम, क्रांति किस्में बोई गई थी। जिनका अंकुरण नहीं हुआ था। धान बाहुल्य बालाघाट जिले के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। किसानों ने कृषि विभाग में आपत्ति दर्ज कराई थी और यशोदा सीड्स की बीज बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया था। परन्तु अचानक 3 जून को बैन उठा लिया गया और कंपनी ने जिले में धड़ाधड़ माल खपा दिया। 14 जून को कृषि मंत्री को किसानों ने पुन: आपत्ति दर्ज की। सांसद ने बताया कि 15 जून को प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने आदेश जारी कर यशोदा सीड्स पर प्रतिबंध लगा दिया। परन्तु प्रश्न विचारणीय है कि जिन किसानों को उपरोक्त कंपनी के अमानक बीज के कारण नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कैसे होगी?

 

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