भावांतर भुगतान योजना – रेडियो और एसएमएस से मिलेगी किसान को भाव की जानकारी

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 (विशेष प्रतिनिधि)
भोपाल। प्रदेश में चलाई जा रही भावान्तर भुगतान योजना में पंजीकृत किसानों को अब सरकार मण्डी भाव की जानकारी रेडियो और एसएमएस के माध्यम से देगी, जिसमें किसानों को अपनी उपज मण्डी में ले जाने से पूर्व भाव की जानकारी हो। महाराष्ट्र सरकार भी इसी खरीफ से सोयाबीन के लिए म.प्र. के समान भावान्तर भुगतान योजना लागू कर रही है। म.प्र. में 16 से 31 अक्टूबर के मध्य उपज विक्रय करने वाले लगभग 1 लाख 55 हजार से अधिक किसानों को 248 करोड़ रुपए की राशि वितरित की जाएगी। इसके साथ ही मण्डी रिकॉर्ड में अब विक्रेता की जगह विक्रेता किसान का उल्लेख किया जाएगा तथा किसानों को 2 लाख तक नगद भुगतान करने में आयकर नियम बाधक नहीं होगा। इस तरह के कुछ खास निर्णय भावान्तर भुगतान योजना के तहत लिए गए हैं।
गत दिनों प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि योजना की लगातार मॉनीटरिंग की जाये। योजना के तहत जिलों में भावांतर राशि का भुगतान कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति बनाकर कराया जाये। योजना की जानकारी किसानों तक पहुँचायें। किसानों को मण्डियों के भाव की जानकारी देने की व्यवस्था बनायें ताकि उन्हें अपनी उपज मण्डी में ले जाने से पहले भाव की जानकारी हो। इसके लिये किसानों को एसएमएस और रेडियो के माध्यम से जानकारी दी जाये।

राशि जमा करने की प्रक्रिया तय

योजना के पोर्टल पर राजस्व एवं कृषि उपज मंडी समिति द्वारा भरे गए डाटा के आधार पर निर्धारित विक्रय अवधि के मॉडल विक्रय दरों की गणना कर पोर्टल पर दर्ज पंजीकृत किसानों को भावांतर की कुल राशि किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा म.प्र. राज्य कृषि विपणन बोर्ड के खातों में राशि जमा कराई जायेगी। इस राशि को पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के क्रम में गणना अनुसार जिला-स्तर की कृषि उपज मंडी समितियों को भुगतान के लिये प्रदाय किया जायेगा।

जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति

योजना के अंतर्गत 16 से 30 अक्टूबर 2017 की अवधि के लिये औसत मॉडल (होलसेल) रेट घोषित किये गये हैं। इन औसत मॉडल दर के आधार पर योजना के प्रावधानों अनुसार भावांतर की गणना तथा भुगतान किए जाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिये जिला-स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। समिति के अन्य सदस्यों में उप जिलाध्यक्ष स्तर का कलेक्टर द्वारा नामांकित अधिकारी, उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, म.प्र. राज्य सहकारी विपणन संघ के जिला विपणन अधिकारी, म.प्र. राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक, राष्ट्रीय सूचना केन्द्र के जिला सूचना अधिकारी, लीड बैंक अधिकारी को सदस्य और जिला मुख्यालय की मंडी के सचिव को समिति का सचिव बनाया  गया है।

भावांतर राशि का डिजिटल भुगतान

जिला मुख्यालय की कृषि उपज मंडी समिति द्वारा भावांतर भुगतान योजना में भुगतान के लिये प्राप्त फण्ड को रखने हेतु राष्ट्रीयकृत बैंक में अलग खाता खोला जायेगा। इस खाते से किसानों के खाते में सीधे डिजिटल भुगतान किया जायेगा। जिला कलेक्टर इन सब तथ्यों की पुष्टि के लिये राजस्व और कृषि विभाग तथा कृषि उपज मंडी समिति के अमले का उपयोग कर सकेंगे।

किसानों की जानकारी हार्ड कॉपी में

जिला स्तर की कृषि उपज मंडी समिति के कार्यालय द्वारा जिलों में पंजीकृत एवं लाभान्वित हितग्राहियों को भुगतान किये जाने के बाद पोर्टल पर जिले के पंजीकृत एवं लाभान्वित किसानों की सम्पूर्ण जानकारी हार्ड कॉपी में सुरक्षित रखी जायेगी। इसकी एक प्रति जिला कलेक्टर कार्यालय को समिति के सदस्यों के हस्ताक्षर सहित उपलब्ध करवाई जायेगी और एक प्रति मंडी बोर्ड को भेजी जायेगी।

नगद भुगतान में आयकर नियम आड़े नहीं

आयकर विभाग ने अनाज व्यापारियों की शंकाओं का समाधान करते हुए स्पष्ट किया है कि आयकर नियमों के अंतर्गत अनाज व्यापारी किसान से उसकी उपज की खरीदी के विरुद्ध 2 लाख रुपये तक का भुगतान नगद कर सकते हैं। भुगतान की इस कार्यवाही में आयकर नियम बाधक नहीं होंगे।उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री जेटली से प्रदेश में लागू की गई भावांतर भुगतान योजना में अनाज व्यापारियों में किसानों की उपज की खरीदी पर नगद भुगतान करने के बारे में व्याप्त शंकाओं के समाधान के लिए आग्रह किया था। इसके बाद वित्त मंत्रालय भारत सरकार की ओर से 3 नवम्बर 2017 को परिपत्र जारी किया गया। इस परिपत्र के अनुसार अनाज व्यापारी किसान की उपज का 2 लाख रुपये की सीमा तक नगद भुगतान कर सकता है।

22 नवम्बर तक 248 करोड़ का भुगतान होगा
भावांतर भुगतान योजना में 1 लाख 55 हजार 942 पंजीकृत किसानों को 22 नवम्बर तक 248 करोड़ 30 लाख रूपये का भुगतान कर दिया जाएगा। यह भुगतान सीधे उनके खाते में किया जाएगा। किसानों को बैंक तथा भुगतान के संबंध में 2 एस.एम.एस प्रेषित किये जा रहे हैं। जिसके द्वारा बेची गई सामग्री तथा भुगतान योग्य राशि की जानकारी किसानों को दी जाएगी। यह जानकारी गत दिनों प्रमुख सचिव किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा और म.प्र. राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री फैज अहमद किदवई ने दी। डॉ. राजौरा ने बताया कि योजना में 1 लाख 55 हजार से अधिक किसानों का डाटाबेस तैयार हो चुका है। इससे मंडियों में आने वाली उपज की मात्रा में वृद्धि होगी और किसानों को फसल का बेहतर मूल्य मिलेगा। उन्होंने बताया कि पड़ोसी राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश में सोयाबीन का बेहतर भाव मिल रहा है। योजना क्रियान्वयन के बारे में उत्तरप्रदेश, राजस्थान, उड़ीसा सहित 12 राज्यों ने जानकारी ली है। योजना क्रियान्वयन के पहले तथा क्रियान्वयन के बाद की दरों की तुलना से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भावांतर भुगतान योजना से बाजार में स्थायित्व आया है और किसानों को लाभ हुआ है। किसानों में योजना के लिए उत्सुकता है। योजना के अंतर्गत अधिसूचित मंडियों में सोयाबीन की मात्रा 4 लाख 44 हजार 260 मीट्रिक टन, मक्का 38 हजार 361 मीट्रिक टन, उड़द 26 हजार 210 मीट्रिक टन, मूंगफली 652.48 मीट्रिक टन और 134.47 मीट्रिक टन मूंग की आवक हुई है।

त्रुटि-सुधार का प्रावधान

पंजीकृत कृषक द्वारा भावांतर भुगतान की राशि उसके खाते में जमा होने के 15 दिवस में किसी प्रकार की त्रुटि के लिये जिला कलेक्टर को अभ्यावेदन प्रस्तुत किया जा सकेगा। जिला कलेक्टर स्तर पर अभ्यावेदन के प्राप्ति दिनांक से 10 दिवस में निराकरण कर अभ्यावेदक को सूचित किया जायेगा। ऐसे समस्त पंजीकृत एवं लाभान्वित किसान जिनको 2,000 रुपये से अधिक की राशि जारी की गई है उनके प्रमाण-पत्र तैयार कर सार्वजनिक कार्यक्रम में वितरित किये जायेंगे।

मण्डी रिकॉर्ड में अब विक्रेता/कृषक लिखा जाएगा

राज्य शासन ने मण्डियों में अधिसूचित जिन्सों की बेहतर नियमन व्यवस्था के लिए मण्डी समितियों के लिए लागू नियमों  में संशोधन किया है। नियमों में जहाँ विक्रेता शब्द आया है, वहाँ पर विक्रेता/कृषक शब्द स्थापित किया गया है। कृषि उपज मण्डी समितियों विशेष सम्मेलन बुलाकर उपरोक्त संशोधन करेंगी। अब मण्डी रिकार्ड में पंजीकृत किसान को 2 लाख रुपये तक के नगद भुगतान के लिए कोई दस्तावेज नहीं प्रस्तुत करना होगा।

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