भावांतर का बवंडर

मुख्यमंत्री, मंत्री, अधिकारी मैदान में
किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य दिलाने किसानों की खुशहाली के लिये बनी भावांतर भुगतान योजना अब सरकार के लिये शेर की सवारी बन गई है।
अगर सरकार इस योजना से उतरना चाहे तो भी नहीं उतर सकती। बीच रास्ते में बंद करती है, मझधार में छोड़ती है तो, सरकार कड्ड नैया डगमगाती दिखती है। गांव-देहात से आने वाली खबरें सरकार के लिये वैसे भी सुकून वाली नहीं है। योजना को येन-केन प्रकारेण पटरी पर लाने के सारे जतन किए जा रहे हैं। किसानों को व्यापारियों द्वारा नकदी भुगतान में आने वाली अड़चनों को सरकार अपने माथे ले रही है। मंत्रिमंडल के अनेक सदस्य मुख्यमंत्री को इस परेशानी में देख मन ही मन मुदित हो रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने सरकार की कार्यप्रणाली पर ही सवालिया निशान लगा दिया। जमीनी हकीकत से दूर वल्लभ भवन में बैठकर योजना बनेगी तो हश्र ऐसा ही होगा। उन्होंने कड़ा बयान दे डाला कि हवाई जहां पर बैठकर एक्सपेरिमेंट करेंगे तो खतरा ही खतरा। भाजपा सांसद अनूप मिश्रा ने सीधे प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा को चेतावनी दे डाली कि मंडी में जाकर प्रत्यक्ष हाल देखें वरना वे स्वयं जाएंगे। इस प्रकार भावांतर के बहाने राजनीतिक तीर भी चल रहे हैं। ये बात अलग है कि निशाने पर कोई और है।
बस तलवारें नहीं निकली हैं क्योंकि किसी के राजनीतिक वध की गुजाइंश वर्तमान समीकरणों में नहीं दिखती है। वहीं वल्लभ भवन के शीर्ष अधिकारी भी दबी छुपी जबान में, इशारों से ही सही कृषि विभाग पर आई कयामत का लुत्फ उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री स्वयं इस योजना की मानिटरिंग कर रहे हैं, और उनके निर्देशों पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारीगण जिलों में मंडियों में जाकर भावांतर योजना का क्रियान्वयन भी देखेंगे। किसानों को फसल बिक्री में होने वाली समस्याएं दूर करेंगे। नीति आयोग के दत्तक पुत्र के रूप में आई इस योजना को गोद में लेकर राजतिलक के सारे प्रयास हो रहे हैं। उम्मीद है किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने और किसानों की आय दुगनी करने के रोडमैप में यह योजना मील का पत्थर होगी। विभिन्न परिस्थितियों के अनुसार इसके आकार, प्रकार, प्रारूप में परिवर्तन करने की आवश्यकता भी होगी। ये भविष्य के गर्भ में है कि भावांतर सफल होने पर इस योजना के प्रवर्तक कुशल ‘सूत्रधारÓ के रूप में प्रतिष्ठापित होंगे या असफल भावांतर के ‘शिकारÓ के रूप में दया के पात्र होंगे।

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