दाल निर्यात पर प्रतिबंध हटाया

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने सभी प्रकार की दालों के निर्यात पर प्रतिबंध हटाने के लिये अपनी मंजूरी दे दी है। उम्मीद है निर्यात खुलने से देश की मंडियों में दालों के गिरते भाव थमेंगे और किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे।
सरकार का मानना है कि सभी प्रकार की दालों का निर्यात खोलने से किसानों को उनकी उपज को लाभकारी कीमतें मिलेगी और दालों का रकबा भी इस रबी में बढ़ सकता है। दलहनों के निर्यात से दालों के अधिक उत्पादन के लिये वैकल्पिक बाजार मिलेगा। दलहनों के निर्यात को अनुमति देने से देश को और इसके निर्यातकों को अपने बाजारों में पुन: स्थान बनाने में मदद मिलेगी। यह प्रत्याशा है कि देश में दलहन उत्पादन संतुलित बनेगा और दलहनों पर हमारी आयात निर्भरता पर्याप्त रूप से घटेगी।
उत्पादन वर्ष 2016-17 में, भारतीय किसान दलहनों पर भारत की आयात निर्भरता को कम करने की चुनौती पर कार्य करते रहे और उन्होंने 23 मिलियन टन दलहन का उत्पादन किया। सरकार ने हमारे किसानों द्वारा उच्च दलहन उत्पादन को बनाये रखने के लिये अनेक कदम उठाएं हैं। सरकार ने न्यूनतम समर्थन कीमत पर सीधे किसानों से 20 लाख टन दलहन खरीदी हैं और यह अभी तक दलहन की खरीद में सर्वाधिक खरीद रही है।
वर्ष 2016-17 में दलहन का सर्वाधिक उत्पादन रहा है। सरकार ने दालों के लिए न्यूनतम समर्थन कीमत (एमएसपी) पर लगभग 20 लाख टन दलहन की खरीद की है। वर्ष 2016-17 के दौरान दलहनों का घरेलू उत्पादन 2 करोड़ 29 लाख टन था। चना दाल का उत्पादन वर्ष 2015-16 में 76 लाख टन की तुलना में इस वर्ष 32 प्रतिशत बढ़कर 93 लाख टन हुआ है। वर्ष 2016-17 में अन्य रबी दालों (मसूर दाल आदि सहित) का उत्पादन वर्ष 2015-16 में 2.47 की तुलना में 22 प्रतिशत बढ़कर 32 लाख टन हो गया है।

 देशभर की थोक मंडियों में इस साल जनवरी से अभी तक चना दाल के दाम 25 फीसदी तक गिरकर 9,000 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गए हैं। वहीं इसी अवधि में तुअर दाल में 15 फीसदी, उड़द में 6 फीसदी, मूंग दाल में 6.3 फीसदी और मसूर में 5 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है। पिछले साल देश में दलहन की किल्लत को ध्यान में रखते हुए इस सत्र में किसानों ने 221.4 लाख टन दलहन का उत्पादन किया है।
हालांकि कहीं न कहीं इतना उत्पादन किसानों पर भारी पड़ सकता है। एगमार्क के आंकड़ों के अनुसार इसकी वजह यह है कि इस समय मूंग, अरहर, मसूर आदि दालों का कारोबार देश के कई दलहन उत्पादक क्षेत्रों में इनके न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे हो रहा है। बाजार से दलहन खरीदने वाली एजेंसियां भी एमएसपी पर दलहन नहीं खरीद पा रही हैं और जो खरीद सकती हैं उनके सामने इनका भंडारण करने की समस्या है।
भारत कृषक समाज के चेयरमैन श्री अजय वीर जाखड़ के अनुसार इस बार दलहन उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर हुआ है, लेकिन अफसोस है कि किसानों को न्यूनतम मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। सरकार को किसानों को एमएसपी देने का वादा पूरा करना चाहिए।’
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