अटल जी पंचतत्व में विलीन

याद रहेगा जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान

(विशेष प्रतिनिधि)
देश के सबसे चहेते नेता, ओजस्वी वक्ता और दसवें प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी गत 17 अगस्त 2018 को नई दिल्ली के स्मृति स्थल पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हो गये।
पूर्व प्रधानमंत्री श्री वाजपेयी का गत 16 अगस्त 2018 को एम्स में निधन हो गया था। 93 वर्षीय श्री वाजपेयी का जन्म 25 दिसम्बर 1924 को म.प्र. के ग्वालियर में ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी एवं माता का नाम कृष्णा देवी था। श्री वाजपेयी ने कानपुर के डीएवी कॉलेज से कानून की पढ़ाई की थी। सन् 1957 से 2004 तक के सक्रिय राजनीतिक सफर में कवि हृदय श्री वाजपेयी 10 बार लोकसभा और 2 बार राज्यसभा सांसद रहे। तीन बार वे प्रधानमंत्री बने। पहली बार 1996 में 13 दिन उनकी सरकार चली। इसके पश्चात 1998 से 1999 तक दूसरी बार 13 माह के लिए प्रधानमंत्री रहे, इसके पश्चात 1999 से 2004 तक तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने। 2005 में उन्होंने राजनीति से सन्यास ले लिया तथा 2009 से उन्होंने चुप्पी साध ली। इसके बाद उनकी आवाज नहीं सुनाई दी।
श्री वाजपेयी ने 15 अगस्त 1998 को लाल किले की प्राचीर से अपना पहला भाषण दिया इसमें उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री जी का नारा जय जवान, जय किसान में जय विज्ञान जोड़कर उसे पूरा कर दिया।
‘मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं।
लौट कर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं?’
यह बात अटल बिहारी वाजपेयी जैसा असाधारण मनुष्य ही कह सकता है। उनका निधन सिर्फ एक राजनेता, एक कवि, एक पत्रकार का अवसान नहीं है बल्कि पूरी मनुष्यता की अपूरणीय क्षति है। वह निर्मम राजनीति में भी संवेदना का दीप जलाते रहे।
उन्हें शत्-शत् नमन!

मैं नि:शब्द हूं, शून्य में हूं, लेकिन भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा है। हम सभी के श्रद्धेय अटल जी हमारे बीच नहीं रहे। अपने जीवन का प्रत्येक पल उन्होंने राष्ट्र को समर्पित कर दिया था। उनका जाना, एक युग का अंत है। लेकिन वो हमें कहकर गए हैं- ‘मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं, जि़न्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूं?’
अटल जी आज हमारे बीच में नहीं रहे, लेकिन उनकी प्रेरणा, उनका मार्गदर्शन, हर भारतीय को, हर भाजपा कार्यकर्ता को हमेशा मिलता रहेगा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और उनके हर स्नेही को ये दु:ख सहन करने की शक्ति दे। ओम शांति !

– नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री

हमारे प्रिय अटल जी नहीं रहे

सबको अपना मानने वाले, सबको प्यार करने वाले, सबकी चिंता करने वाले, सर्वप्रिय अजातशत्रु राजनेता, उनके लिए कोई पराया नहीं था, सब अपने थे। पूरा जीवन वे देश के लिए जिए। भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और परम्पराओं के वे जीवंत प्रतीक थे। भारत माता के पुजारी. उनकी कविता, ‘हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा, काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूँ, गीत नया गाता हूँ,’ साहस के साथ हमें काम करने की प्रेरणा देती है।
शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री, मप्र

यादगार पल…

प्रधानमंत्री निवास में श्री अटल बिहारी वाजपेयी को कृषक जगत भेंट करते हुए कृषक जगत के संचालक सचिन बोन्द्रिया एवं ए.एस. वाधवा।

www.krishakjagat.org

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share