मुर्गियों में बर्ड फ्लू फैलने का बचाव

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पोल्ट्री फार्म पर बरतें ये सावधानियां

18 जनवरी 2021,भोपाल। मुर्गियों में बर्ड फ्लू फैलने का बचाव- डॉ. ढाका ने बताया कि पोल्ट्री फार्म संचालकों और घरेलू मुर्गी पालकों को अपने हाथ में दस्ताने और चेहरे पर मास्क लगाने, आसपास क्षेत्र में कीटाणु नाशक घोल का छिड़काव करने, बाहर से आने वाले वाहन पर भी कीटाणु नाशक घोल का छिड़काव करें। घरों में कुक्कट पालन के बाड़ों के बाहर चूना या फिनाइल का प्रयोग करें, बाड़े के लिए अलग जूतों व कपड़ों का प्रयोग करें। स्वस्थ लोग ही कुक्कटों की देखभाल करें, बाड़े के पास झाडिय़ों व पेड़ों की कटाई करें, ताकि जंगली व अन्य पक्षी वहां न बैठ सके। मुर्गीपालक बाहरी आदमी को मुर्गीफार्म में प्रवेश नहीं होने दें एवं अपने हाथों को गुनगुने पानी और साबुन से धोएं, विशेष रूप से कच्चे चिकन और अंडों को छूने के बाद।

बर्ड फ्लू रोग से मृत पक्षियों का निस्तारण जमीन पर गाड़कर ऊपर से फिनाइल और चूना छिड़क दें तथा नियमित रूप से फार्म का लिटर बदलते रहें तथा समय-समय पर विसंक्रमण कार्यवाही करते रहें। ध्यान रहे की मुर्गियों को चुगने के लिए खुले में न छोड़ें, मुर्गियों के मरे पक्षियों को न खाने दें और मुर्गियों को खाने के लिए बाड़े में ही प्रबंध करें, बाड़े के पास से जंगली पक्षियों को भगाने का प्रयास करते रहें। कुक्कुट उत्पाद खाने से कोई नुकसान नहीं है, अण्डा, मांस को खाने से पहले उसे खूब पकाकर ही खायें। छत पर रखी टंकियों, रेलिंग्स या पिंजरों को डिटर्जेंट से एवं पक्षियों के मल या संबंधित जगह पर फैले पंख या कचरे को सावधानी से साफ करें तथा पक्षियों को खुले हाथों से न पकड़ें, उनसे निश्चित दूरी बनाकर रखें। ॥५हृ१ से संक्रमित पक्षी करीब 10 दिनों तक मल या लार के जरिए वायरस रिलीज कर सकता है।

इस तरह के होते है मुर्गियों में लक्षण

उन्होने बर्ड फ्लू का मुख्य कारण पक्षियों को ही माना जाता है। बर्ड फ्लू इंफेक्शन चिकन, टर्की, मोर और बत्तख जैसे पक्षियों में तेजी से फैलता है। स्वस्थ मुर्गी की कलगी लाल होती है व पंजे भी हल्के लाल रंग के होते है तथा यह पूर्णत: चलती फिरती रहती है तथा दाना पानी खाती है। मुर्गियों में बर्ड फ्लू के लक्षण जैसे पक्षी को ज्वर आना, फैटल कलगी व पैरों का बैंगनी हो जाना, मुर्गियों के गर्दन तथा आंखों के निचले हिस्से में सूजन व हरे व लालरंग की बीट है। साथ ही बीमार मुर्गियों की कलगी व पंजे भी काले पड़ जाते हैं तथा अंडे उत्पादन में गिरावट हो जाती है। वह यदि एक जगह बैठी रहती है तो उसे सांस लेने में दिक्कत होती है, नाक एवं आंख से पानी आता है।

चिकन व अंडे खाने वाले भी रहें सजग

डॉ. ढाका ने कहा कि दुकान से चिकन खरीदने के बाद उसे धोते वक्त हाथों पर ग्लव्स और मुंह पर मास्क जरूर पहनें। कच्चा मांस या अंडा भी किसी इंसान को संक्रमित कर सकता है तथा दूषित सरफेस के माध्यम से भी वायरस की चपेट में आ सकते हैं। इसलिए पोल्ट्री फार्म या दुकानों पर किसी चीज या सरफेस को छूने से बचें एवं किसी भी चीज को छूने के बाद हाथों को तुरंत सैनिटाइज करें। बर्ड फ्लू बीमार पक्षियों में पाया जाता है और सिर्फ उन लोगों के बीच फैलने की संभावना होती है, जो मुर्गी पालन या फिर संक्रमित पक्षियों के आसपास रहते हैं। कच्चे चिकन को धोने और पकाने के लिए एक अलग बर्तन का इस्तेमाल करें। चिकन को तब तक पकाएं जब तक वो अच्छे से उबल न जाए इसका कारण यह है कि पकाने से फ्लू नष्ट हो जाता है, इसके साथ ही जो बैक्टीरिया होते हैं वह भी पकाते समय खत्म हो जाते हैं। जिंदा मुर्गों और पोल्ट्री पक्षियों से सीधे संपर्क से बचें। इस बात का ख्याल रखना भी जरूरी है कि संक्रमित पक्षी इस फूड चेन का हिस्सा नहीं बन पाये। जिस स्थान पर कच्चे चिकन एवं अंडे को रखा गया हो वहां सब्जियां या अन्य खाद्य पदार्थों को नहीं रखें। उन्होने क्षेत्र के मुर्गी पालकों से आग्रह किया है कि वह कृषि विज्ञान केंद्र में संपर्क करके अधिक से अधिक जानकरी प्राप्त कर सकते है।

जिले में बहुत सारे युवा बेरोजगार एवं किसान मुर्गी पालन करके अपनी पारिवारिक आजीविका चलाने के साथ साथ अच्छा मुनाफा अर्जित कर रहे हंै। लेकिन हाल ही राज्य में बर्ड फ्लू बीमारी से पक्षियों की अचानक होने वाली मौतों से डर फैला हुआ है। देश में अभी मुर्गीपालकों से कोरोना का संकट टला नहीं कि बर्ड फ्लू नाम की बीमारी ने फिर से दहशत पैदा कर दी है। स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविधालय से संबद्ध कृषि विज्ञान केंद्र पोखरण के पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. राम निवास ढाका ने बताया कि मुर्गियों के मरने की दर अधिक एवं अचानक होने की वजह से यह बीमारी अन्य बीमारियों के अपेक्षा अधिक खतरनाक साबित होती है। यह बीमारी इनफ्लूएंजा वायरस से होने वाली बीमारी है और जंगलों में रहने वाले पक्षियों में सामान्य रुप से पाई जाती है, जिसे जंगली पक्षी अपने मलमूत्र के द्वारा विसर्जित करते हैं, जब यह पक्षी हवा में उड़ते समय हवा में मलमूत्र विसर्जित करते हैं, तो यह वायरस हमारी पोल्ट्री में आ जाते हंै। यह वायरस इन्सान में भी आ सकता है, परंतु मनुष्य में आसानी से नहीं फैलता है। राज्य मे अभी तक मुर्गियों में ॥5हृ1 वायरस की मौजूदगी नहीं पाई गई है। मुर्गीपालक कुछ विशेष सावधानियां अपनाकर पक्षियों से मुर्गियों में बर्ड फ्लू बीमारी के फैलने से होने वाले नुकसान की जोखिम को कम कर सकता है।

कृषि विज्ञान केन्द्र पोखरन
स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि महाविद्यालय पोखरन, जैसलमेर (राजस्थान)

 

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