कृषि, मनरेगा के समन्वित प्रयासों से बढ़ सकती है किसानों की आय

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गत दिनों नई दिल्ली में नीति आयोग की शासी परिषद की चौथी बैठक में रचनात्मक विचार विमर्श एवं विभिन्न मुख्यमंत्रियों द्वारा दिए गए सुझावों का स्वागत करते हुए उपस्थित समूह को आश्वस्त किया कि निर्णय-निर्माण करते समय इन सुझावों पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाएगा। उन्होंने नीति आयोग से कहा कि वह तीन महीनों के भीतर सुझाए गए कार्रवाई योग्य बिन्दुओं पर राज्यों के साथ अनुकूल कदम उठाएं।

 नीति आयोग की बैठक

उन्होंने कहा कि नीति आयोग द्वारा चिन्हित 115 आकांक्षापूर्ण जिलों की तर्ज पर, राज्य आकांक्षापूर्ण ब्लॉक के रूप में राज्य के कुल ब्लॉक के 20 प्रतिशत को चिन्हित करने के लिए अपने खुद के मानकों को निर्धारित कर सकते हैं।

जनसंख्या वृद्धि के अनुपात में केन्द्रीय सहायता में वृद्धि हो
बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रमुख रूप से मध्यप्रदेश से संबंधित दो मुद्दों पर बात की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पिछले वर्षों में जनसंख्या में वृद्धि वाले राज्यों के विभिन्न योजनाओं के केन्द्रांश और राज्य को मिलने वाली केन्द्रीय सहायता में जनसंख्या वृद्धि के अनुपात में वृद्धि की जाये। इसी प्रकार मध्यप्रदेश ने पिछले वर्षों में अपने हरित आवरण को बरकरार रखने के साथ ही उसे बढ़ाने के लिये उल्लेखनीय प्रयास विकास की कीमत पर किये हैं। उन्होंने मांग की कि मध्यप्रदेश को इसके लिये ग्रीन बोनस के रूप में अतिरिक्त राशि दी जाये, ताकि विकास को गति दी जा सके।
शिवराज सिंह की अध्यक्षता में समिति का गठन
देश में वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के प्रधानमंत्री के लक्ष्य को हासिल करने के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में समिति का गठन भी किया गया। समिति फसल की बुवाई के पूर्व और कटाई बाद के अंतराल में मनरेगा के माध्यम से कृषि से जुड़े कार्यों के लिये सुझाव देगी। समिति में आंध्रप्रदेश, बिहार, गुजरात, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल और सिक्किम राज्यों के मुख्यमंत्रियों को सदस्य मनोनीत किया गया है। समिति जुलाई अंत तक कार्य योजना प्रस्तुत करेगी

उन्होंने विभिन्न मुख्यमंत्रियों द्वारा जल संरक्षण, कृषि, मनरेगा आदि मसलों पर दिए गए कई अन्य सुझावों की सराहना की।
उन्होंने मध्य प्रदेश, बिहार, सिक्किम, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल एवं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से बुवाई-पूर्व एवं कटाई – उपरांत, दोनों ही चरणों समेत ‘कृषि एवं मनरेगा’ के दो विषयों के प्रति एक समन्वित नीतिगत दृष्टिकोण पर अनुशंसाएं करने के लिए एक साथ मिल कर कार्य करने की अपील की। प्रधानमंत्री ने युद्ध स्तर पर जल संरक्षण एवं जल प्रबंधन की दिशा में प्रयास करने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में कृषि क्षेत्र में कॉरपोरेट निवेश बहुत कम है। उन्होंने कहा कि राज्यों को एक नीतियां बनानी चाहिए जो वेयरहाउसिंग, परिवहन, मूल्य संवद्र्धन एवं खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में कॉरपोरेट निवेश को बढ़ावा दें।

इन विषयों पर विचार करेगी समिति

  • बुवाई पूर्व और फसल कटाई उपरांत दोनों के लिए राज्य विशिष्ट उपायों के व्यापक विकल्प सुझाना, ताकि आमदनी, जल संरक्षण और कचरे से संपदा पर दिए जा रहे विशेष जोर को और बढ़ाया जा सके।
  • मनरेगा के तहत विभिन्न कार्यों को वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लक्ष्य की प्राप्ति से जुड़ी आवश्यकताओं से पूरी तरह सुव्यवस्थित करना।
  • मनरेगा से जुड़े विशिष्ट उपायों पर ऐसी सिफारिशें पेश करना, जिससे कृषि क्षेत्र में मुश्किलें कम हो सकें। इनमें कार्य की उपलब्धता, मजदूरी की दरें, सीजन विशेष कार्य इत्यादि से संबंधित समस्याएं शामिल हैं।
  • विशेषकर अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों के परिवारों से जुड़े छोटे एवं सीमांत किसानों की आजीविका में विविधता के साथ-साथ विकास के लिए एक आजीविका स्रोत के रूप में मनरेगा की संभावनाएं तलाशना।
  • आजीविका के लिए संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने हेतु मनरेगा और महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), उत्पादक समूहों एवं उत्पाद कंपनियों से जुड़े आजीविका संबंधी विशेष जोर के बीच उचित समन्वय स्थापित करने के तरीके सुझाना।
  • कोष का उपयोग, दक्षताएं प्रभाव एवं निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न विभागों में कार्यक्रम संबंधी संसाधनों के सफल सामंजस्य की संभावनाएं तलाशना।

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