कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने – तैयार की कपास की नई किस्म

प्रचलित किस्मों से 15 प्रतिशत अधिक उपज है आरव्हीके-11 की

ग्वालियर। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर के अंतर्गत कार्यरत कृषि महाविद्यालय, इंदौर की कपास परियोजना, द्वारा वर्षों के अथक प्रयास से अमेरिकन कपास की नई किस्म आर.व्ही.के -11 विकसित की गई है। पिछले वर्षो के दौरान किए गए अनुसंधानों द्वारा यह कपास फसल की दूसरी किस्म तैयार की गई है। यह किस्म सूखे के प्रति सहनशील होकर बारानी कृषि में एक सिंचाई के साथ 1600-1800 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर के लगभग कपास की पैदावार देने की क्षमता रखती है। रस चूसक कीटों के प्रति सहनशील यह किस्म राज्य शासन द्वारा अनुमोदित कर दी गई है तथा अधिसूचना के लिये प्रतीक्षारत है।

कपास केन्द्र द्वारा विकसित नई फसल किस्म आर.व्ही.के.-11 को केन्द्रीय किस्म पहचान समिति द्वारा केन्द्रीय कपास अनुसंधान संस्थान की वार्षिक कार्यशाला 2018 में दक्षिणी राज्यों के लिये अनुमोदित किया गया है। यह किस्म वर्षा आधारित दक्षिण क्षेत्र के लिये उपयुक्त होने के साथ-साथ रस चूसक कीटों, बीमारियों और सूखे की स्थिति के प्रति भी सहनशील है। इसके घेंटे का वजन 4.6 ग्रा. के करीब है। इस किस्म के रेशे की औसत लम्बाई 26.7 मि.मी. होने के साथ-साथ धागे की औसत मजबूती 27.03 ग्रा. प्रति टैक्स है तथा कटाई क्षमता 40 काउंट है। यह किस्म दक्षिण राज्यों के वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिये बहुत ही उपयुक्त है। इस केन्द्र के द्वारा इसके पहले आरव्हीके.-67 नामक किस्म भी विकसित की गई थी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.के. राव ने कपास परियोजना के कृषि वैज्ञानिकों को इस उपलब्धि के लिये बधाई दी है।

 

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