गेहूं की कटाई के बाद खेत में आग लगाने से हमें पोषक तत्वों का कितना नुकसान होता है।

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समाधान-

  • गेहूं की कटाई के बाद खेत में आग लगाना भले ही यह मजबूरी में किया हो, बुद्धिमत्ता पूर्ण कार्य नहीं है। यदि आप 35 क्विंटल प्रति हेक्टर उपज ले रहे हों तो खेत में 54 क्विं. प्रति हेक्टर फसल के ऊपरी अवशेष बचे रहते हैं। यदि इन्हें सावधानी पूर्वक जलाया जाये तो इससे 437 किलो राख मिलेगी व बचा भाग धुएं के रूप में वातावरण में चला जाता है।
  • इस प्रक्रिया में 16 किलो नत्रजन, 0.5 किलो फास्फोरस, 17 किलो पोटाश, 1 किलो गंधक का विनाश हो जाता है। इसका मूल्य आप भली-भांति समझ सकते हैं।
  • यह धारणा है कि फसल जलाने पर भी कार्बन का विनाश नहीं होता। अनुसंधानों से यह ज्ञात हुआ है कि जलाये गये खेतों की 80 प्रतिशत कार्बन, कार्बन डाई ऑक्साईड के रूप में वातावरण में चली जाती है भले ही यह अवशेषों द्वारा सडऩे के बाद छोड़ी गई कार्बन डाई ऑक्साइड से कुछ ही ज्यादा हो। परंतु यह पूरी की पूरी एक साथ निकल जाती है और यह भूमि में आवश्यक जैविक कार्बन के स्तर को बुरी तरह प्रभावित करती है।
  • इसलिये फसल की कटाई के बाद आग लगाने की प्रक्रिया को न अपनाये।

– राजकुमार पटेल, हरदा

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