धान उगाने की एरोबिक विधि

पानी एवं वर्षा की हो रही लगातार कमी एवं श्रमिकों की अनुपलब्धता साथ ही साथ लागत में हो रही बढ़ोत्तरी को ध्यान में रखते हुए वर्तमान समय एवं आने वाले समय में धान को एरोबिक पद्धति से उगने की आवश्यकता हो गई है यह जानकर किसान भाईयों को आश्चर्य होगा कि 1 किलो चावल उत्पादन करने के लिए चार हजार से पांच हजार लीटर पानी की जरूरत पड़ती है। यदि हम इस विधि से बुवाई करते हैं तो पानी के साथ लागत को कम कर सकते हैं और 40 से 50 क्विंटल प्रति हेक्टर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। इस विधि से बुवाई करते हैं तो पानी के साथ लागत को कम कर सकते हैं और 40 से 50 क्विं. प्रति हेक्टर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

विधि
धान की एरोबिक विधि में सामान्यत: गेहूं या मक्के जैसे ही इसकी बुवाई की जाती है इसमें हम सामान्य रूप से धान की सूखी सीधे बोनी करते हैं। सर्वप्रथम 2 या 3 जुताई कर खेत को समतल कर मिट्टी को भुरभुरा करते हैं इसके बाद खेत में हल्की नमी हो तब हम सीडकम फर्टिड्रिल के माध्यम से 2-3 सेमी की गहराई में बुवाई करते हैं यदि काली मिट्टी है तो बुवाई 1-2 सेमी की गहराई पर करते है कतार से कतार की दूरी 22 से 25 सेमी एवं बीज की मात्रा 35 किलो प्रति एकड़ रखते हैं।
प्रजाति का चुनाव
इस विधि से बुवाई करते हैं इसके लिये प्रजाति का चुनाव करना सबसे बड़ा महत्व होता है इसके लिए हम कम पानी चाहने एवं कम समय में तैयार होने वाली प्रजातियों का चुनाव करना चाहिए इसके लिए कुछ अनुशंसित किस्में है। जैसे सहभागी धान, सत्यभामा सीआर 101, पूसा सुगंधा, सीआर धान-201 आदि का चुनाव करना चाहिए। सर्वप्रथम बीजों को कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचारित करके बोयें।
खरपतवार प्रबंधन
चूंकि जब हम धान की बुवाई सीधे खेत में करते हंै तो खरपतवार की अधिकता ज्यादा हो जाती है खरपतवार नियंत्रण हेतु बुवाई के तुरंत बाद पेंडामिथालीन 1.25 लीटर को 200 लीटर पानी के साथ मिलकर प्रति एकड़ या बुवाई के 15 से 20 दिन बाद बेस्पिरिबैक सोडियम 100 मिली को 200 लीटर पानी के साथ मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें।
पोषक तत्व का प्रबंधन
बुवाई के शुरूआत अवस्था में प्रति एकड़ 4 से 5 टन सड़ी गोबर की खाद 40 से 50 किलो डीएपी, 15 से 20 किलो यूरिया, 20 किलो पोटाश एवं 8 से 10 किलो जिंक सल्फेट का उपयोग बुवाई के समय करे शेष यूरिया की मात्रा को दो अलग-अलग अवस्था में डालें।
सिंचाई प्रबंधन
आवश्यकता अनुसार गेहूं की सिंचाई करते है उसी प्रकार हमें धान की सिंचाई करते रहना चाहिए यदि किसान भाईयों के पास स्प्रिंकलर की उपलब्धता है तो सिंचाई स्प्रिंकलर के माध्यम से करें जिससे अधिक उपज प्राप्त होगी।

लाभ

  • पानी की बचत होती है धान की सीधी बुवाई से 9 लाख लीटर पानी की बचत कर सकते है।
  • 40 से 60 क्विं. प्रति हेक्टर उत्पादन प्राप्त कर सकते है।
  • श्रमिकों में होने वाले खर्चों को कम कर सकते है।
  • जब हम खेत की मचाई करते है तो हमारी मिट्टी में एक कठोर परत बन जाती है यदि हम सीधे सूखी बुवाई सीडड्रिल के माध्यम से करते हैं तो मिट्टी की संरचना अच्छी बनी रहती है।
  • basmati-field-1-700इस विधि से खेती में लगने वाला खर्च कम हो जाता है।
  • रोग एवं कीटों को प्रकोप कम हो जाता है।
  • पानी भराव की स्थिति में धान के खेत में मिथेन गैस निकलती है। यदि हम खेत में पानी नहीं भरते हैं तो मिथेन गैस नहीं बनेगी जिससे वातावरण भी दूषित नहीं होगा।
  • खेत में प्रयोग की गई पोषक तत्वों का सम्पूर्ण उपयोग होता है।
  • जब खेत में पानी नहीं भरते हैं तब जड़ों का विकास अच्छा होता है। मिट्टी में हवा का प्रवेश होता है तो कल्लों का फुटाव ज्यादा होता है जिससे पैदावार अच्छी प्राप्त होती है।
  • विनोद कुमार तिवारी
  • रमेश अमूले
    वैज्ञानिक, कृविके सतना

www.krishakjagat.org

One thought on “धान उगाने की एरोबिक विधि

  • August 22, 2018 at 4:09 PM
    Permalink

    धान में कंसे बढ़ाने हेतु कौन सी दवाई या खाद की उपयोग करें। कृपया इस बारे में बताये।

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