रिलायंस फाउण्डेशन की किसानों को सलाह

  • धान की रोपाई श्री पद्धति अंतर्गत 10 से 14 दिन के रोपा की, कतार से कतार एवं पौधे से पौधे की दूरी- 25 से.मी. पर करें। श्री पद्धति से रोपाई के लिए रोपाई जगह की मार्कर से या नाइलोन की रस्सी से 25 से.मी. की दूरी पर गांठ लगाकर निश्चित करें। एक जगह पर एक ही पौधा लगाएं।
  • धान की पौधशाला में यदि पौधों का रंग पीला पड़ रहा है तो इसमें लौह तत्व की कमी हो सकती है। पौधों की ऊपरी पत्तियां यदि पीली और नीचे की हरी हो तो यह लौह तत्व की कमी दर्शाता है। इसके लिए 0.5 प्रतिशत फेरस सल्फेट 0.25 प्रतिशत चूने के घोल का छिड़काव करें।
  • सोयाबीन फसल को बुआई से 45 दिनों तक खरपतवार मुक्त रखें, इसके लिए फसल की निंदाई, डोरा (कुल्पा) चलाएं या नींदानाशकों द्वारा खरपतवार मुक्त रखें। इससे कीट व्याधि का भी प्रकोप कम होता है और उपज अधिक मिलती है।
  • लगातार वर्षा की स्थिति में बोई गई दलहनी एवं तिलहनी फसलों के खेतों में निकास नाली बनाकर वर्षा का पानी खेत में एकत्रित न होने दें।
  • भूमि में पर्याप्त नमी होने की स्थिति में सोयाबीन की फसल में नीला भृंग से पौधों को नुकसान हो सकता है। यदि नीला भृंग की समस्या है तो इसके नियंत्रण हेतु क्विनालफॉस 1.5 ली./हे. की दर से छिडक़ाव करें।

उद्यानिकी

  • वर्षाऋतु में रोपने के लिए बैंगन, टमाटर खरीफ प्याज, अगेती फूल गोभी, मिर्च आदि की रोपणी तैयार करें। कद्दूवर्गीय सब्जियों एवं भिंडी में सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए नीम तेल 50 मिली को 15 ली. पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

पशुपालन

  • पशुओं में खुरपका एवं मुंहपका के टीके लगवाएं। बाहरी परजीवी से बचाव के लिए ब्यूटॉक्स का उपयोग करें। पशु शाला की नियमित सफाई करें।

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