रिलायंस फाउण्डेशन की किसानों को सलाह

  • सोयाबीन में आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति हेतु खेत की तैयारी के समय अंतिम बखरनी के पूर्व गोबर खाद 10 टन या मुर्गी खाद 2.5 टन/हे. के हिसाब से खेत में फैलायें।
  • सोयाबीन की बोवनी हेतु मध्य जून से जुलाई के प्रथम सप्ताह का उपयुक्त समय है। अत: लगभग 100 मि.मी. वर्षा होने पर ही सोयाबीन की बौवनी करना उचित होगा।
  • सोयाबीन उन्नत किस्में जैसे-14 से (90 से 95 दिन), -24-80 से 85 दिन), 20-34, 20-29, 20-98, 93-05, 95-60 बीज की बुआई हेतु व्यवस्था करें।
  • सोयाबीन के बीज का आकार एवं अंकुरण क्षमता के अनुसार छोटे दाने वाली प्रजातियों का बीज दर 55-60 कि.ग्रा. /हे., मध्यम आकार – 60-65 कि.ग्रा. /हे. एवं बड़े दाने वाली किस्म के बीज का 70-75 कि.ग्रा./हे. रखें।
  • मक्का किस्में जेएम- 216, -1, -5, डीएचएम 117 हंै।
  • अरहर किस्में जैसे टीजेटी-501, जवाहर अरहर-4, आशा (आईसीपीएल-87119), जेकेएम-7,ं 189 किस्मों का चुनाव करें, बीज राईजोबियम एवं पीएसबी कल्चर से उपचारित करें।
  • धान की किस्में- शीघ्र पकने वाली जेआर-345, 201 पूर्णिमा तथा मध्यम अवधि में पकने वाली किस्मों में आईआर-64, 54, माधुरी, क्रांति, महामाया, पूसा बासमती आदि का रोपा तैयार करें।

उद्यानिकी

  • भिण्डी में पत्तियों की नसें यदि पीली पड़ रही हों तो ऐसे पौधों को निकालकर नष्ट कर दें तथा रस चूसने वाले कीड़ों के नियत्रंण के लिए किसी सर्वांगी कीटनाशी का छिड़काव करें।

पशुपालन

  • पशुशाला एवं मुर्गीशाला में किलनी एव चीमड़ी के नियंत्रण के लिए मैलाथियान दवा 3 मि.ली. प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

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