रिलायंस फाउण्डेशन की किसानों को सलाह

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  • गेहूं की सिंचित दशा वाली फसल में पांचवीं सिंचाई 75-85 दिन बाद दूधिया अवस्था के समय एवं छठी सिंचाई 85-95 दिन बाद दाने भराव की अवस्था में करें।
  • गेहूं की फसल में कंडवा रोग दिखाई देने पर ग्रसित बालियों को सावधानीपूर्वक तोड़कर खेत से निकालें।
  • गेहूं की फसल की कटाई के समय दानों में नमी 18 से 20 प्रतिशत होने पर, दानों को दांत से दबाने पर कट की आवाज नहीं आती, लेकिन दाना टुकड़े में बंट जाए, तब फसल काटें।
  • चने की कटाई पौधों की पत्तियाँ पीली या हल्के भूरे रंग की हो जायें, तब फसल काट लेना चाहिए। यदि फसल अधिक पक जाएगी, तो फल्लियां टूटकर गिरने लगती है। जिससे फसल का नुकसान होता है। फसल को काटकर अच्छी तरह सुखा लें।
  • ग्रीष्मकालीन मूँग की फसल की बुवाई 15 फरवरी से 15 मार्च के बीच करें। मूँग की उन्नत किस्में- जवाहर मूँग-3, जवाहर मूँग-721, हम-1, पीडीएम-11, पूसा विशाल, के-851 हैं। मूंग की फसल में गोबर की खाद 20-25 टन प्रति हेक्टर तथा उर्वरक के रूप में 20 कि.ग्रा. नत्रजन, 40-60 कि.ग्रा. स्फुर और 20 कि.ग्रा. पोटाश प्रति हेक्टर दें।

उद्यानिकी

  • कद्दूवर्गीय सब्जियों मे लौकी का प्रमुख स्थान है। ग्रीष्मकालीन लौकी की उन्नत किस्में – समर प्रालिपिक लाँग, पूसा समर प्रालिपिक राउंड, पंजाब गोल, अर्का बहार और अन्य उन्नतशील किस्मों की बुआई करना चाहिए। लौकी की फसल को औसतन गोबर की खाद 250 क्विंटल, नाइट्रोजन 60 किलो, स्फुर 30 किलो तथा पोटाश 100 किलोग्राम प्रति हेक्टर देना चाहिए।

पशुपालन

  • दुधारू पशुओं को हरा चारा 25 किलो प्रति पशु प्रतिदिन व संतुलित आहार एवं मिनरल की आपूर्ति हेतु 35 से 40 ग्राम प्रति पशु के हिसाब से मिनरल मिश्रण की खुराक दें।

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