रिलायंस फाउण्डेशन की किसानों को सलाह

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  • गेहूं फसल की कटाई के लिए दानों में नमी 18 से 20 प्रतिशत होना चाहिए और फसल को अधिक धूप में सुखाने पर फसल के दाने के बिखरने की सम्भावना रहती है जिससे हानि हो सकती है।
  • चने में फलियां अगर 90 से 95 प्रतिशत पक गई हों और पत्तियां सूख कर झडऩे लग गई हों तब फसल की कटाई प्रारम्भ करें और फसल को सुखाने के बाद गहाई करें।
  • सरसों में माहू के प्रकोप होने पर नियंत्रण हेतु एसीटामिप्रिड दवा 0.3 मिली प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें, प्रारम्भ में बोई गई सरसों की फसल कहीं कहीं परिपक्व अवस्था में है, तैयार फसल की कटाई कर समय से गहाई करें।
  • ग्रीष्म कालीन फसलों की बुआई के लिए मूंग, तिल, उड़द एक अच्छा विकल्प है, अगर सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो तो इन फसलों की बुआई को 15 फरवरी से अगले माह के मध्य तक कर सकते हैं ।

उद्यानिकी

  • ग्रीष्मकालीन फसलों में भिन्डी की बुआई के लिए खेत की तैयारी करें व बीज की व्यवस्था करें एवं भिड़ी के बीजों को बुआई के पूर्व फफूंद नाशकों से उपचार करके उचित नमी की दशा में बुआई करेें।
  • आम के फल व फूलों को झडऩे से रोकने के लिए मटर के आकार वाली अवस्था पर नेप्थलिन एसिटिक एसिड/ प्लानोफिक्स 4.5 प्रतिशत एसएल दवा की 1 मिली लीटर मात्रा को 3 लीटर पानी में घोल बनाकर बाँस की सहायता से 15 दिनों के अंतर पर 2 से 3 बार छिड़काव करें।

पशुपालन

  • पशुओं को बाह्य परजीवियों की सम्भावना हो सकती है अत: इनके बचाव हेतु क्लीनर या बुटाक्स नामक दवा को 1.0 लीटर पानी में 2.0 मिली दवा के अनुपात में मिलाकर पशुओं के शरीर पर सुरक्षात्मक तरीके से लगायें।

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