किसानों को सलाह – सफेद सुण्डी का करें नियंत्रण

कृषि विज्ञान केन्द्र, शाजापुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जी.आर. अम्बावतिया, डॉ. एस.एस. धाकड़ एवं श्री संतोष पटेल द्वारा किसानों को सोयाबीन में कीट व्याधि एवं रोगग्रस्त सोयाबीन बचाव हेतु सलाह दी।

  • सफेद सुण्डी के नियंत्रण हेतु इमीडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 300 मिली./हे. अथवा जैविक कीटनाशक ब्यूवेरिया बेसियाना/ मेटाराइजियम एनाइसोप्ली 1 किलो/हे. साथ ही प्रभावित स्थानों पर क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी. 1500 मिली./हे. छिड़केंं।
  • इल्लियों द्वारा सोयाबीन की कलियां एवं फलियों पर भक्षण करने से अफलन जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसे स्थानों पर तुरंत बीटासायफ्यूरॉन$ इमिडाक्लोप्रिड 350 मिली./हे. या थायमिथाक्सम+लेम्बडा सायहेलोथ्रिन 125 मिली/हे. का छिड़काव करें।
  • गर्डल बीटल के लिए थायक्लोप्रिड 21.7 एससी. (650 मिली/हे.) या प्रोफेनोफॉस 50 ई.सी. (1250 मिली/हे) का छिड़काव करें।
  • कुछ स्थानों पर सोयाबीन मोजाइक/पीली मोजाइक बीमारी का प्रकोप प्रारंभ हो गया है। अत: सलाह है कि इससे ग्रसित पौधों को अपने खेत से उखाड कर गढ्ढे में गाढ दें तथा इसको अन्य पौधों पर फैलाने वाली रोग वाहक कीटों के नियंत्रण हेतु बीटासायफ्लूथ्रीन $ इमिडाक्लोप्रीड 350 मिली/हे. का 500 लीटर पानी के साथ छिड़काव करें।

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