कृषि विकास में एक शक्तिशाली उपकरण

कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) की अवधारणा बुनियादी तौर पर देश की राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली (एनएआरएस) से न सिर्फ जुड़ी हुई है बल्कि अब केवीके एनएआरएस का महत्वपूर्ण हिस्सा भी बन चुका है। केवीके की शुरूआत का मूल उदे्श्य था क्षेत्र विशेष की आवश्यकता के अनुसार कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की प्रोद्योगिकियों का मूल्यांकन, जरूरत के अनुसार सुधार एवं स्थानीय किसानों के खेतों में प्रदर्शन और इस प्रकार कृषि ज्ञान का प्रचार-प्रसार। देश में कृषि अनुसंधान नेटवर्क और किसानों के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में इनकी आज निहायत महत्वपूर्ण भूमिका हो चुकी है। दूसरे शब्दों में ये ग्रामीण क्षेत्रों में अद्यतन कृषि ज्ञान एवं संसाधन उपलब्ध करवाने वाले केंद्र के रूप में अपनी अहम पहचान बना चुके हैं। केवीके के महत्व को इसी बात से समझा जा सकता है कि स्वंय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिल्ली के पूसा संस्थान में आयोजित ‘ कृषि उन्नति मेला- 2018’ में नए 25 केवीके लांच किए गए। इस क्रम में भावी लक्ष्य देष के प्रत्येक जिले में आवश्यकता के अनुरूप इनकी संख्या में क्रमश: बढ़ोतरी करने का है।
इतिहास
देश में सबसे पहला केवीके 1974 में पुंडुचेरी में तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, कोयम्बटूर के अधीन स्थापित किया गया था। चूंकि इस प्रारंभिक स्थापना के बाद, भारत के सभी राज्यों में केवीके स्थापित किए गए हैं, और 2018 तक भारत में 690 केवीके हैं। औसतन, यह प्रति राज्य लगभग 23 केंद्र हैं, हालांकि अधिक घनी आबादी वाले राज्यों में अधिक केंद्र होते हैं।
कामकाज
वर्तमान में कार्यरत अधिकांश केवीके राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के अधीन हैं। केवीके की स्थापना से लेकर शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान करने का दायित्व केंद्र सरकार पर है। केवीके का आवंटन भारतीय कृषि अनुसंधान परषिद, कृषि विश्वविद्यालयों, संबंधित सरकारी कृषि विभागों और एनजीओ को किया जाता है और फिर इनके समुचित प्रबंधन का दायित्व इन संस्थाओं द्वारा आवश्यकतानुसार किया जाता है ताकि क्षेत्र विशेष के कृषकों को लाभ मिल सके और वे वैज्ञानिक तकनीकों पर आधारित खेती पर कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त कर सके। जैसा कि पहले भी उल्लेख किया गया है कि केवीके देश के दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले कृषक समुदाय के लिए कृषि सूचना, नवोन्मेषी कृषि प्रौद्योगिकियों और गुणवत्तापूर्ण कृषि प्रणालियों और विभिन्न फसलों की नई विकसित किस्मों का प्रदर्शन कर न सिर्फ उन्हें जागरूक बना रहे हैं बल्कि इन्हें अपनाने के लिए भरपूर प्रोत्साहन भी दे रहे हैं। कृषि विज्ञान केन्द्रों के कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने के लिए वर्ष 2016 में एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया है। जिसमें प्रत्येक केवीके द्वारा किये गये काम का मासिक ब्यौरा दिया जाना आवश्यक है। इस प्रकार इनके कार्यों की मॉनीटरिंग भी की जा रही है ताकि अधिक दक्षतापूर्वक ढंग से विभिन्न कृषि कार्यक्रमों का क्रियान्वयन हो सके। इस पोर्टल में कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन, कृषि बाजार और मौसम संबंधित उपयोगी जानकारियां भी उपलब्ध हैं।
जिम्मेदारियां
ऑन-फार्म टेस्टिंग: प्रत्येक केवीके आईसीएआर संस्थानों द्वारा विकसित बीज की किस्मों या अभिनव कृषि पद्धतियों जैसे नई प्रौद्योगिकियों का परीक्षण करने के लिए एक छोटा सा खेत चलाता है।
फ्रंट-लाइन प्रदर्शन: केवीके के खेत और आसपास के गांवों से इसकी निकटता के कारण, यह किसान क्षेत्रों पर नई प्रौद्योगिकियों की प्रभावकारिता दिखाने के लिए कार्यक्रम आयोजित करता है।
क्षमता निर्माण: नई प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करने के अलावा, केवीके किसानों के समूहों के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों पर चर्चा करने के लिए क्षमता निर्माण अभ्यास और कार्यशालाओं का भी आयोजन करता है।
मल्टी-सेक्टर सपोर्ट: अपने स्थानीय नेटवर्क और विशेषज्ञता के माध्यम से विभिन्न निजी और सार्वजनिक पहलों के लिए समर्थन प्रदान करते हैं। किसानों की एक विस्तृत श्रृंखला के साथ सर्वेक्षण करते समय सरकारी शोध संस्थानों के लिए केवीके के नेटवर्क का लाभ उठाना बहुत आम है।
सलाहकार सेवाएं: आईसीटी के बढ़ते उपयोग के कारण, केवीके ने रेडियो और मोबाइल फोन के माध्यम से किसानों की जानकारी, जैसे मौसम सलाहकार या बाजार मूल्य निर्धारण प्रदान करने के लिए प्रौद्योगिकियों को लागू किया है।
निष्कर्ष
देख जाए तो केवीके का कार्य क्षेत्र निरंतर बढ़ रहा है। अत्यंत उन्नत किस्मों के बीजों, रोपण सामग्रियों, उन्नत पशु नस्लों आदि का स्थानीय किसानों को इनके द्वारा वितरण किया जाता हैं समय-समय पर ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण एवं कृषि आधारित स्वरोजगार से संबंधित कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी केवीके आयोजन करते हैं। मोबाइल एप्स और अन्य आईटी आधारित तकनीकों की मदद से किसानों के लिए उपयोगी मौसम आधारित परामर्श सेवाएं भी इनके द्वारा प्रदान की जा रही हैं।
अत: कृषक भाईयों को भी स्वयं पहल करते हुए नजदीकी केवीके से संपर्क कर कृषि परामर्श एवं अन्य सहायता लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।

  • अनिल कुमार मलिक
  • सुनील कुमार
    मो. : 9728703434

www.krishakjagat.org

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