3 वर्षों में गेहूं की 35 नई किस्में : डॉ. महापात्रा

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कृषि वैज्ञानिकों और कृषकों का हुआ सम्मान

58वां अ.भा. गेहूं तथा जौ अनुसंधानकर्ता सम्मेलन संपन्न 

(इन्दौर कार्यालय)

इंदौर। 58वां अखिल भारतीय गेहूं तथा जौ अनुसंधानकर्ता का तीन दिवसीय सम्मेलन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल तथा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान क्षेत्रीय केंद्र इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में गत दिनों रवीन्द्र नाट्य गृह इंदौर में आयोजित किया गया। सम्मेलन का शुभारम्भ बिहार कृषि वि.वि. के कुलपति डॉ. ए.के. सिंह और राजमाता विजयाराजे कृषि वि. वि. ग्वालियर के कुलपति प्रो. एस.के. राव द्वारा किया गया। इस सम्मेलन में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक, कृषि अधिकारी, किसान और कृषि आदान व्यवसायी उपस्थित थे। इस मौके पर कृषि प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।

भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान करनाल के डॉ.जी.पी. सिंह ने निदेशक रिपोर्ट पेश कर गेहूं प्रजनन कार्यक्रम को मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा कर  इस वर्ष देश में गेहूं का उत्पादन 10  करोड़ टन पार करने की जानकारी दी। गेहूं सुधार कार्यक्रम में सभी प्रधान अंवेषकों द्वारा वार्षिक रिपोर्ट के साथ आगामी कार्ययोजना पेश की गई। इसके पूर्व प्रधान अन्वेषक फसल सुधार डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह की अध्यक्षता में फसल सुधार कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा और आगामी अनुसंधान पर विचार-विमर्श किया गया।

गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने सम्मेलन में कहा कि देश में इस वर्ष गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है, इसमें सरकार की कृषि नीतियों, कृषि अनुसंधान और किसानों की मेहनत का योगदान है, लेकिन इस रिकॉर्ड को बनाए रखना हमारे लिए चुनौती है। गेहूं उत्पादन में पिछड़े राज्यों पर ध्यान देने की जरूरत है। गत तीन वर्षों में गेहूं की 35 नई किस्में लेकर आए हैं जो बढ़ते तापमान को भी सहन करने की क्षमता रखती है। बड़े अनुसंधान के बजाय छोटे नवाचारों से भी बदलाव लाया जा सकता है। केंद्रीय कृषि और सहकारिता मंत्रालय में संयुक्त सचिव श्री अश्वनी कुमार ने किसानों से गेहूं की बुआई समय पर करने पर जोर दिया, अन्यथा उत्पादन में 10  क्विंटल /हेक्टर की कमी आ सकती है। 

वहीं भा.कृ.अ. परिषद के निदेशक डॉ. ए.के. सिंह ने अच्छी गुणवत्ता वाला ब्रीडर सीड किसानों तक पहुंचाने और म.प्र. के अच्छी गुणवत्ता वाले गेहूं के निर्यात को बढ़ावा देने की भी बात कही। इस मौके पर आईसीएआर के महानिदेशक और अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने सम्मेलन परिसर में लगाई गई कृषि प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

सम्मान

महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्रा के विशेष सम्मान के साथ ही गेहूं अनुसंधान और उत्पादन में बेहतरीन कार्य करने वाले कृषि वैज्ञानिकों और किसानों को भी सम्मानित किया गया। इनमें क्षेत्रीय गेहूं अनुसंधान केंद्र इंदौर के प्रभारी डॉ.साईं प्रसाद और उनकी टीम, डॉ. जयप्रकाश पंतनगर, अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक के अलावा  किसान श्री जयदीप सिंह तोमर मुरैना (म.प्र.), श्री बहादुर सिंह जडिय़ा फतेहगढ़ साहिब (पंजाब), श्री सुनील कालरा, कुरुक्षेत्र  (हरियाणा) कोयली देवी गोरखपुर (उ.प्र.) और राघवेंद्र सिंह चंदेल, बिलासपुर (छत्तीसगढ़ ) शामिल हैं।

केन्द्र ने दी चेतावनी

इसके पूर्व शनिवार को सम्मेलन में गेहूं और जौ के बीज के ट्रायल और नई प्रजातियों को किसानों तक पहुंचाने को लेकर केंद्र सरकार और परिषद की चिंता व्यक्त कर  संयुक्त सचिव (बीज) श्री अश्वनी कुमार ने कृषि वैज्ञानिकों को आगाह किया कि जो अनुसंधान केंद्र व्यावहारिक रूप से बीजों का ट्रायल नहीं कर रहे हैं, उन्हें मिलने वाली आर्थिक सहायता बंद कर दी जाएगी। जबकि आईसीएआर के एडीजी (बीज) डॉ. डी.के. यादव ने कहा कि गेहूं देश की प्रमुख फसल है जिसके देश में 40  अनुसंधान केंद्र हैं। कुछ केंद्रों पर बीज का ट्रायल नहीं होने की बात सामने आई है. यह गंभीर बात है। इसमें लापरवाही नहीं चलेगी। किसानों को नई प्रजातियों की विशेषताएं बताते हुए उनकी बुआई का तरीका बताना होगा। 

नई किस्में

समापन दिवस पर देश के विभिन्न अनुसंधान केंद्रों से प्रस्तावित की गई गेहूं और जौ की 17 प्रजातियों को चिन्हित किया गया। इनमें 15  गेहूं की और 2 जौ की है। फिलहाल इन प्रजातियों को किसानों के लिए जारी नहीं किया गया है। केंद्रीय किस्म समिति की अनुमति मिलने के बाद इन्हें जारी किया जाएगा। गेहूं की इन 15  प्रजातियों में 9  रोटी वाले गेहूं और 6  मालवी ड्यूरम गेहूं की है। क्षेत्रीय अनुसन्धान केंद्र इंदौर ने चार प्रजातियां प्रस्तावित की। इन्हें कार्यशाला में संस्तुति हेतु चिन्हित किया गया। इनमें से दो मालवी ड्यूरम गेहूं की है। इन्हें म.प्र. के लिए अनुशंसित किया गया है, जबकि शेष दो  प्रजातियों चंदौसी और शरबती को अन्य राज्यों के लिए प्रस्तावित किया गया है। प्रजाति एचआई -1621 और एचआई -1628 रोटी वाले गेहूं की है, जबकि एचआई -8802  और एचआई -8805 मालवी ड्यूरम गेहूं की है। मालवी गेहूं की प्रजातियों की उत्पादकता 60 -65  क्विंटल /हेक्टर है।
 

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