सोयाबीन पर संकट, अफलन पर आंसू

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सोयाबीन पर संकट

अफलन पर आंसू

भोपाल। राज्य में लगातार बारिश और बादल छाये रहने के कारण प्रमुख खरीफ तिलहनी फसल सोयाबीन में अफलन एवं कीट व्याधि को लेकर किसान परेशान है। कुछ जिलों में किसान फसल को उखाडऩे लगे हैं तथा कुछ किसान अफलन पर आंसू बहा रहे हैं। कीट व्याधि से भी फसल चौपट हो रही है। उत्पादन प्रभावित होने की आशंका से कृषि विभाग भी हरकत में आ गया है। हाल ही में सोयाबीन बाहुल्य वाले संभागों के अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की गई है। साथ ही सर्वे दल गठित कर आकलन के निर्देश दिए गए हैं।

प्रदेश में मानसूनी वर्षा का दौर जारी है। अब तक 25 जिलों में सामान्य से अधिक, 20 जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। सर्वाधिक वर्षा मंदसौर जिले में तथा सबसे कम वर्षा सीधी जिले में हुई है।

जानकारी के मुताबिक बैरसिया, सीहोर, आष्टा, शाजापुर, नीमच, मंदसौर, होशंगाबाद एवं हरदा सहित कई सोयाबीन बाहुल्य जिलों से अफलन एवं कीट व्याधि की शिकायतें किसानों ने की थी इसके चलते कृषि विभाग ने भोपाल, इन्दौर, उज्जैन एवं नर्मदापुरम संभागों के संयुक्त संचालकों को पत्र लिखकर जिलों में सोयाबीन अफलन की रिपोर्ट मांगी है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि विशेषज्ञों का दल गठित कर किसानों को जागरुक किया जाए।

इधर पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान सोयाबीन अफलन एवं इल्ली के प्रकोप से चौपट हुई फसल का सर्वे कराने की मांग को लेकर किसानों के साथ सीहोर कलेक्टर से मिले और समस्याएं बताई। 

अफलन से अन्नदाता चिंतित

उन्होंने कहा कि नुकसान का सर्वे कराकर किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। 

भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर के वैज्ञानिकों ने गत दिनों सोयाबीन फसल में अफलन की शिकायत पर गांवों में प्रभावित फसल का निरीक्षण किया था। इस दल में वैज्ञानिक डॉ. लोकेश कुमार मीणा (कीट विज्ञान), श्री संजीव कुमार और डॉ . लक्ष्मण सिंह राजपूत (पादप रोग विज्ञान) के अलावा एसडीएम उज्जैन, श्री सीएल केवड़ा (उप संचालक कृषि), डॉ. आर.पी. शर्मा (केवीके), श्री डीएस अर्गल सहा. संचालक कृषि (उज्जैन) और बीमा प्रतिनिधि श्री अरुण केवलिया उपस्थित थे। सोयाबीन अनुसंधान संस्थान के प्रभारी निदेशक श्री अमरनाथ शर्मा ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सोयाबीन की प्रारंभिक अवस्था में पानी की कमी तथा बाद में लगातार रिमझिम वर्षा के कारण अफलन की स्थिति बनी है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में सोयाबीन की एक ही किस्म 95-60 लगी है तथा अधिक बीज दर के कारण फसल घनी हो गई है जिससे कीटनाशकों का छिड़काव सही ढंग से नहीं हो पाया है, जो कीट व्याधि का मुख्य कारण है। वैज्ञानिकों ने बताया कि रिमझिम वर्षा के कारण इल्ली पत्तियों को छोड़कर फूलों एवं प्रारंभिक फलियों को खा रही हैं जिस कारण अफलन की स्थिति बन रही है।

अतिवर्षा से आई आफत

उज्जैन जिले के कई गांवों में 60 दिन बाद भी सोयाबीन की फसल में फलियां नहीं बनने से किसान मायूस हो गए हैं, जबकि करीब 85 दिन में यह फसल पक कर तैयार हो जाती है। भारतीय सोयाबीन अनुसंधान केंद्र, इंदौर से उज्जैन गए एक दल ने निरीक्षण पश्चात अपनी रिपोर्ट पेश की है उसके अनुसार प्रारंभिक अवस्था में पानी की कमी, फिर लगातार बारिश से किसान कीटनाशक का प्रयोग नहीं कर पाए इसलिए ऐसे हालात बने।

उल्लेखनीय है कि उज्जैन जिले की खाचरौद तहसील के कई गांवों में सोयाबीन की फसल में अफलन की स्थिति देखी जा रही है। मौके पर पहुंचे कृषक जगत के क्षेत्रीय प्रतिनिधि से खाचरौद क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्री एम.एल.शर्मा ने बताया कि अतिवर्षा से सोयाबीन की फसल में आर्द्रता के बावजूद तापमान बढऩे के बाद पौधों की वृद्धि रुकने और फिर लगातार बारिश होने से फूल गिरने से अफलन की स्थिति बनी है। यदि कृषक फसल में हार्मोन्स का उपयोग करे तो फिर से फलियां बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। 5 दिन पहले जहां ऐसी स्थिति थी वहां फिर से फूल आने लगे हैं। श्री शर्मा ने कहा कि तारोद के किसान श्री बहादुर सिंह आंजना, श्री शिवलाल आंजना, श्री राधेश्याम वर्मा, आकिया जागीर के सरपंच श्री पन्नालाल, श्री श्यामसुन्दर शर्मा, बरखेड़ा जावरा के श्री रामसिंह गुर्जर, झिरमिरा के श्री शम्भूलाल व्यास, श्री रूपसिंह गुर्जर, घिनोदा के श्री बसंतीलाल चौहान, बेड़ावनिया के श्री लखन राठौर और बरामदखेड़ा के श्री अर्जुन सिंह राजपूत की सोयाबीन फसल में अफलन देखा गया है।

 

उपचार क्या है ?

वैज्ञानिकों ने बताया कि जिन खेतों में फसल, फूल अथवा प्रारंभिक फलियों की अवस्था में है एवं इल्लियों का प्रकोप दिख रहा है वहां इंडोक्साकार्ब 15.8 ई.सी. 333 मि.ली. प्रति हेक्टेयर या क्विनालफॉस 25 ईसी 800 मि.ली. प्रति हेक्टेयर या प्रोफेनोफॉस 50 ईसी 1250 मि.ली. प्रति हेक्टेयर या फ्लूबेन्डियामाईड 39.35 एससी 150 मि.ली. प्रति हेक्टेयर या फ्लूबेन्डियामाईड 20 डब्ल्यूजी 300 मि.ली. प्रति हे. को 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की अनुशंसा की है। 

 

प्रदेश के 26 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा

सामान्य से अधिक वर्षा वाले जिले- मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, शाजापुर, भोपाल, झाबुआ, राजगढ़, बड़वानी, रतलाम, उज्जैन, गुना, बुरहानपुर, सीहोर, अलीराजपुर, खण्डवा, इंदौर, नरसिंहपुर, जबलपुर, रायसेन, श्योपुरकला, अशोकनगर, सिंगरौली, धार, खरगोन और देवास हैं।

सामान्य वर्षा वाले जिले- विदिशा, होशंगाबाद, मण्डला, रीवा, सागर, दमोह, उमरिया, बैतूल, भिण्ड, डिण्डौरी, मुरैना, टीकमगढ़, हरदा, शिवपुरी, सतना, अनूपपुर, छतरपुर, सिवनी, दतिया और ग्वालियर हैं।

सामान्य से कम वर्षा वाले जिले- पन्ना, छिंदवाड़ा, बालाघाट, कटनी, शहडोल और सीधी हैं।

 

प्रदेश में प्रमुख फसलों की बुआई स्थिति (लाख हे. में)
फसल लक्ष्य बुवाई
धान 24.97 22.08
ज्वार 1.39 1.43
मक्का 13.68 15.44
बाजरा 2.57 2.91
तुअर 4.47 4.85
उड़द 16.52 15.3
मूंग 1.92 1.77
सोयाबीन 56.32 52.19
मूंगफली 2.36 2.11
तिल 4.42 3
कपास 6.19 6.09

इधर प्रदेश में खरीफ फसलों की बोनी गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष लगभग 5 लाख हे. अधिक क्षेत्र में कर ली गई है। अब तक 129 लाख हेक्टेयर में फसलें बोई गई है जबकि गत वर्ष इस समय तक 124 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलें बोई गई थी। इसमें सोयाबीन की बोनी 52.19 लाख हेक्टेयर में की गई है जबकि गत वर्ष इस अवधि में 50.59 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन बोई गई थी। राज्य में अब तक धान 22.08 लाख हेक्टेयर में, मक्का 15.44, बाजरा 2.91, तुअर 4.85, उड़द 15.30, मूंगफली 2.11, तिल 3 एवं कपास 6.09 लाख हेक्टेयर में बोई गई है।

सोयाबीन के अफलन एवं कीट-व्याधि के मामले को लेकर सरकार एवं कृषि विभाग सतर्क है। मैदानी अधिकारियों से पहले ही रिपोर्ट मांगी जा चुकी है। दो लाख रुपये तक के कर्ज माफी के लिए भी सरकार वचनबद्ध है।      

- सचिन यादव
कृषि मंत्री (म.प्र.)

 

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